Category Archives: chitthacharcha

देसी तबेले में गर्मी बहुत है

उफ्फ गर्मी बहुत है…आग लगी है…प्‍यास लगी है। बिजली है…पंखे हैं…एसी भी है पर गर्मी फिर भी है। कमरा ठंडा है पर एसी अंदर की गर्मी बाहर फेंके दे रहा है पर यहॉं से वहॉं चले जाने से गर्मी खत्‍म … पढना जारी रखे

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नीतीश स्‍पीक्‍स- लफत्‍तू रीड्स

लफत्‍तू हिन्‍दी ब्‍लॉगजगत के लिए नए नहीं हैं नीतीश जरूर हैं इसलिए लपूझन्‍ना के लफत्‍तू के सामने नीतीश जो बेचारे पहली पहली हिन्दी ब्लॉग पोस्ट लिख रहे हैं (दरअसल इतिहास की पहली मुख्‍यमंत्रीय हिन्‍दी पोस्‍ट) को इतने जमे हुए पात्र … पढना जारी रखे

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नो लल्‍लो-चप्‍पो: एक वर्तनीदोष चर्चा…. मास्साब टाईप

कई लोगों को लगता है कि भई चिट्ठाचर्चा दोषों की उपेक्षा करती है तिस पर हम जैसे मास्‍साब को तो चाहिए कि वे जमकर छिद्रान्‍वेषण करें दोष दर्शन, परदोष प्रदर्शन करें। काहे नहीं करते… इसलिए कि खुद हमारे चिट्ठाकर्म में … पढना जारी रखे

मसि‍जीवी, chitthacharcha, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 34 टिप्पणियाँ

गर्व का हजारवाँ चरण : प्रत्येक ज्ञात- अज्ञात को बधाई

आज का दिन बहुत विशेष है और इसे संयोग ही कहा जाएगा कि इस दिन की चर्चा का दायित्व अनायास ही मुझे करने का सुयोग मिला है | जिन कारणों से आज का दिन ऐतिहासिक है, उनमें से कुछेक का … पढना जारी रखे

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टिप्पणियों के रूप में कड़ी भर्त्सना और आरोप झेलने को मिलने वाले हैं आज

गत सप्ताह की हमारी चर्चा को आप सभी स्नेही मित्रों का जो दुलार मिला, उसके लिए कृतज्ञ हूँ | डा० अमर कुमार  जी ने कहा – आपको पुनः अपने मध्य देखना ही सुखद है,बतायेंगी नहीं, इस बीच क्या क्या पढ़ड्डाला … पढना जारी रखे

chitthacharcha, Kavita Vachaknavee में प्रकाशित किया गया | 44 टिप्पणियाँ

देह, सेक्स और अजब संयोग

मैं अभी कुछ दिनों पहले ही अनुपजी से अनुगूँज फिर से शुरू करने की बात चैट पर कर रहा था और आज देखा तो उन्होंने एक पुराने अनुगूँज की रिठेल दे मारी। पहला आयोजन क्या देह ही है सब कुछ? … पढना जारी रखे

chitthacharcha, Tarun में प्रकाशित किया गया | 5 टिप्पणियाँ

वोट से बनो कि बिन वोट पप्‍पू तो तुम्‍हें ही बनना है

हमारा मानना रहा है कि भारतीय राजनीति और कला का बहुत गहरा नाता है ! जब जब राजनीति में सरगर्मियां और हलचल बढती है कला की सभी विधाओं में रचनात्मक उर्जा बढी हुई दिखाई देने लगती है ! खासकर ब्लॉग … पढना जारी रखे

नीलिमा, chitha charcha, chithacharcha, chithha charcha, chitthacharcha, neelima में प्रकाशित किया गया | 10 टिप्पणियाँ

धूल की मोटी परतें हैं पर उन परतों पर नहीं हैं कहीं अब उन नंगे पैरों के निशान……

आप में से जो लोग कविता पढ़ने (लिखने–भर नहीं) में रूचि रखते हैं उन्होंने गहरी संवेदनात्मक से लेकर विचार–प्रखर तक और आग लगा देने वाली से लेकर नथुने फड़काने वाली तक कई प्रकार की कविताएँ सुनी – पढ़ी होंगी। वैसे … पढना जारी रखे

chitthacharcha, Kavita Vachaknavee में प्रकाशित किया गया | 29 टिप्पणियाँ

एक और अनेकः सच्चा शरणम् अखिलं मधुरम्

कभी पहले जब मैं नियमित चर्चा करता था तब मैं ज्यादा से ज्यादा उन चिट्ठों को टटोलता था जो भीड़ में गुम से रहते थे। अपनी इस कोशिश में कई अच्छे लिखने वालों का पता चला था जिनमें से ज्यादातर … पढना जारी रखे

chitha charcha, chitthacharcha, ek aur anek, Tarun में प्रकाशित किया गया | 16 टिप्पणियाँ

एक और अनेकः अशोक का कृषि दर्शन

अपने पर्सनल चिट्ठे पर जब मैं दूरदर्शन के पुराने दिनों की याद कर रहा था तो उसमें डा अनुराग ने एक टिप्पणी में कहा था, जो एक प्रोग्राम कुछ खासा अच्छा नही लगता था वो था कृषि दर्शन, कमोबेश यही … पढना जारी रखे

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