Category Archives: debashish

और भी काम हैं जमाने में…

जब दो तीन महिने भारत से ठकुरासी करके लौटते हैं तो पहले दिन ऒफिस जाते ही दस मिनट हालचाल पूछने का शिष्टाचार निभाने के बाद ऐसा काम लादा जाता है कि प्राण ही निकल आते हैं. लगता है कि गये … पढना जारी रखे

उड़न तश्तरी, चिट्ठचर्चा, समीर लाल, हिन्दी, हिन्दी चिट्ठाचर्चा, blogs, chitha charcha, debashish में प्रकाशित किया गया | 23 टिप्पणियाँ

द साईलेंस इज़ डेफनिंग

जी हाँ आपने “खामोशी की आवाज़” जैसे जुमले सुने होंगे पर उदाहरण ज्यादा न देखे होंगे। तो पढ़िये अशोक जी चक्रधर की नवीनतम पोस्ट जो उन्होंने न्यूयॉर्क में संपन्न विश्व हिन्दी सम्मेलन पर लिखा। और शायद ये हिन्दी ब्लॉगजगत की … पढना जारी रखे

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मोबाइल का नया रिंगटोन और जलोटा जी के जालिम भजन

आज मन बड़ा प्रसन्न है। बड़े दिनों बाद पेट भर चिटठे पढ़े। रूखे सूखे नहीं, बेहद लज़ीज़। हर दिन ऐसे पकवान नसीब नहीं होते या फिर शायद अपनेराम ही टेबल पर ध्यान न देते हों। तो देर किस बात की? … पढना जारी रखे

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इंटरनेट के तार के पंछी

अनूप ने डपटकर पूछा क्यों आजकल बड़ा जी चुराते हो चिट्ठा चर्चा से। कहीं ऐसा तो नहीं कि शनिवार को चर्चा न करने का कोई धार्मिक तोड़ निकाल लाये हो। मैंने कहा नहीं चिट्ठे इतने लिखे जाने लगे हैं कि … पढना जारी रखे

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तकिये के नीचे पिस्तौल रखकर सोइयेगा

हिन्दी चिट्ठाकारी में पत्रकारों के पदार्पण पर अनूप के चिट्ठे ने मानो हम सब के मन की बात कह दी हो। मेरा ख्याल है कि अब इस कांड पर पटाक्षेप हो जाना चाहिये। ये पहला ऐसा मौका नहीं होगा जहाँ … पढना जारी रखे

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आई एम लविंग इट

रवि ने ख़बर दी कि दैनिक हिंदुस्तान के हिन्दी व अंग्रेज़ी संस्करणों में हिन्दी चिट्ठों पर लेख छपा है। इस लेख के बारे में सबसे पहले तो यही कहना चाहूंगा कि मुख्यधारा का मीडिया किस कदर आत्ममुग्धता और बेखबरी के … पढना जारी रखे

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चलते हैं दबे पाँव मेरे हाथ भी

चर्चा में देरी के लिये करिये क्षमा, उम्मीद है महफ़िल में अभी बुझी नहीं शमा! ईस्वामी शॉपिंग फ्रैंज़ी के शिकार अपने मुलक की हरकतों से हैरान हैं। बताते हैं कि शकीरा को यह नितंब झूठ न बोलें कहते देखने के … पढना जारी रखे

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