Monthly Archives: अगस्त 2006

हम तो हमारी मस्ती में झूमते चले हैं

धर्मेन्द्र के तकियाकलाम के बारे में बताते हुये हनुमानजी कहते हैं:- अमरीका में दोस्ती करनी बहुत मुश्किल है। यहाँ आदमी पैसे, कर्जे, होड़, और प्रतिस्पर्द्धा के बुखार से बावरा है। यही कारण है कि :- अब यहाँ दोस्ती करनी मुश्किल … पढना जारी रखे

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सुबह-सुबह की हवा सुहानी

मानसी ने दूसरे देशों में रहने वाले भारतीयों के बारे में लिखना शुरू किया था। उनके लिखने के बाद काफी लेख प्रवासी लोगों के बारे में लिखे गये। अपने लेख को आगे बढ़ाते हुये मानसी ने कुछ और बातें आज … पढना जारी रखे

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आया ज़माना ‘उत्पभोक्ता’ का

हमने चिट्ठाचर्चा शुरू किया था चिट्ठों के बारे में चर्चा करने के लिये ।लेकिन यह बीच-बीच में थम जाता है। दो दिन लिखा नहीं तो समीर जी ने उकसाया कि इसे बंद न किया जाये। देबाशीष ने भी संतोष जाहिर … पढना जारी रखे

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जाने किसके चित्र बनाती ….

कैसा संयोग है! कल इधर ब्रह्मांड की उत्पत्ति की बात शुरू हुयी और इधर पिछले ७६ साल से सौरमंडल का गृह रहे प्लूटो को नटवर सिंह और गांगुली की तरह बाहर कर दिया गया। हिंदी ब्लागर की बात का मतलब … पढना जारी रखे

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उस पार न जाने क्या होगा!

आजकल चिट्ठाकारी में प्रवासी लोग छाये हुये हैं। इसकी आग लगाई मानसी ने। इसके बाद तो आग ब्लाग दर ब्लाग फैलती जा रही है। वैसे कुछ सूंघने वाले बताते हैं कि इस आग की चिंगारी स्वामीजी की लगाई हुई है। … पढना जारी रखे

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