Monthly Archives: अक्टूबर 2008

बिलाग लिख लिख यूपी-बिहार बदलिहैं

राज ठाकरे अगर कोई बेनाम टिप्‍पणी होती तो अब तक अनगिन हिन्‍दी चिट्ठाकार बांकुरों ने उसे कब का डिलीट कर मारा होता पर अफसोस राज ठाकरे एक टिप्‍पणी नहीं, वे हैं-इतिहास की पैदाइश। महाराष्‍ट्र का ही इतिहास नहीं वरन बिहार … पढना जारी रखे

मसि‍जीवी, chitha charcha, chithacharcha, chitthacharcha, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 16 टिप्पणियाँ

इंकब्लागिंग की बात ही कुछ और है !

ज्ञानी लोग हमेशा आपके लिये परेशानी के कारण बनते रहेंगे। अब बताओ दीपावली के बाद ज्ञानजी को यह बताने की क्या जरूरत थी कि जो दीपावली के दिन सूरन (जिमीकन्द) नहीं खाता वह अगले जन्म में छछूंदर पैदा होता है! … पढना जारी रखे

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जो दीप उम्र भर जलते हैं वो दीवाली के मोहताज नहीं होते

आप सभी को एकबार फ़िर दीपावली की मंगलकामनायें। सब तरफ़ दीपावली के चर्चे हैं। खर्चे ही खर्चे हैं। बधाइयां है। शुभकामनायें हैं। द्विवेदीजी के ब्लाग लेखन का एक साल पूरा हुआ। एक साल के बच्चे ने अपने उद्गार प्रकट किये।: … पढना जारी रखे

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शुभ दीवाली लेउ मनाय

सुमिरन करके टिप्पणीश्वर कौ करके वीर निठल्ला याद ।चर्चा होगी अब आल्हा में कोई नहीं वाद प्रतिवाद ॥ सबतें पहले अनूप शुक्ला की सब मिलकें लेउ किलास । लिखें वीररस प्रेम पचीसी इनका रहा सफल पिरयास ॥अब तय करें सफर … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, दीपावली, विवेक में प्रकाशित किया गया | 17 टिप्पणियाँ

लिखना भी बाजार की तरह लुढकायमान है

दीपावली के मौके पर लोगों का लिखना-पढ़ना ,टिपियाना-विपियाना कम हो गया। सब बाजार और सेंसेक्स की तरह लुढ़कायमान हैं। लेकिन हम चर्चा तो करेंगे। न करेंगे तो चर्चा होगी। आफ़त है न! करो तो चर्चा , न करो तो चर्चा। … पढना जारी रखे

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करने लगते हैं तुमसे प्यार : रविवार्ता

आज धनतेरस है, आज से विधिवत् दीपोत्सव आरम्भ हुआ आप सभी को यह दीपावली अनंतमंगलफलदायी हो, सब के जीवन के सारे अंधेरे मेट दे। वेद में यों तो मानवजीवन के उत्थान से सम्बन्धित अनेक मंत्र है किंतु एक ऐसा मंत्र … पढना जारी रखे

रविवार्ता, हिन्दी चिट्ठाचर्चा, chithacharcha, Kavita Vachaknavee में प्रकाशित किया गया | 14 टिप्पणियाँ

आज की चर्चा ताऊ के साथ

टीवी पर आकर समीर जी फूले नहीं समाते ।पाठक भी पढ पोस्ट अधूरी टिप्पणियाँ बरसाते ॥ सिर्फ़ बमों से नहीं मरे कुछ मेट्रो ने भी मारे ।व्यंग्य वाण क्यों सहें अकेले गृहमन्त्री बेचारे ॥ सुख दुख के दो रंग आज … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, ताऊ रामपुरिया, प्रोफाइल, विवेक में प्रकाशित किया गया | 18 टिप्पणियाँ