Monthly Archives: सितम्बर 2005

पहला असमिया चिट्ठा?

मेरी जानकारी में यह शायद पहला असमिया ब्लॉग है जो असमिया लिपी का प्रयोग करता है। दुख की बात यह कि इस ब्लॉग की कोई फीड प्रकाशित नहीं होती। Advertisements

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नये रंगरूट?

मेरा मतलब कुछ नये चिट्ठे से था। स्वागत है बंगलौर के वरुण सिंह का जो कहते हैं बाकी सब ठीक है, दिल्ली के पराग कुमार खड़े हैं बीच-बज़ार, दिल्ली की ही शालिनी नारंग से मिलने का माध्यम है झरोखा, पुरू … पढना जारी रखे

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बबुरी का बबुआ – भये प्रकट कृपाला

बबुरी बालक राजेश कुमार सिंह के जन्मदिन पर आशीष-वर्षा जारी रखी इंद्र कुमार अवस्थी ने। इधर विद्रोही कवि आंसुओं रसायन शास्त्रीय व्याख्या कर रहे हैं। रविरतलामी के गजलों के प्रयोग जारी हैं तथा हृदयेश जी के बारे में संस्मरण की … पढना जारी रखे

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आओ बैठें, कुछ देर साथ में

हिंदी जाल जगत:आगे क्या आलोक द्वारा आयोजित चौदहवीं अनुगूंज विषय है. साथियों के आलेख आना शुरु हो गये हैं. इसके पहले राजेश ने तेहरवीं अनुगूंज का विषय दिया था – संगति की गति. अपने लेख भेजिये अभी भी देर नहीं … पढना जारी रखे

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यूजनेट के माध्यम से विचार-विमर्श

चिट्ठों के बाद क्या हो? यह सवाल आलोक ने उठाया था. विनय ने सुझाया है कि ब्लाग के आगे यूजनेट समूह के माध्यम से विचार-विमर्श के बारे में विचार किया जाना चाहिये. आप भी अपने सुझाव दें. संबंधित कडि़यां हैं … पढना जारी रखे

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मराठी चिट्ठों का नायाब ख़जाना

कभी आपके साथ हुआ ऐसा की यूँ ही नेट पर टहलते हुए खजाना मिल जाये। मेरे साथ ऐसा ही हुआ आज! मराठी चिट्ठों को खोजता रहता ही हुँ, आज की खोज में टकराया पवन के शानदार मराठी चिट्ठे गोष्टी गमती … पढना जारी रखे

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चक्र चलता रहे

दो चिट्ठे नदारद तो दो नये चिट्ठे हुए अवतरित! मुम्बई के अतुल सबनिस का ठेले पे हिमालय और खड़गपुर के रूपक अग्रवाल का हिन्दी ब्लॉग। स्वागत है!

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