Monthly Archives: नवम्बर 2007

बोलो कटर कट की जय

ज्ञानजी अपनी इमेज सुधारना चाहते हैं ऐसा मुझे लगा। आज उन्होंने अपनी पोस्ट के आखिरी में लिखा- हत्या/मारकाट/गला रेत/राखी सावन्त के प्रणय प्रसंग/आतंक के मुद्दे पर लपेट/मूढ़मति फाउण्डेशन की निरर्थक उखाड़-पछाड़ आदि से कहीं बेहतर और रोचक है यह! लगता … पढना जारी रखे

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मोको कहां ढूंढे रे बंदे मैं तो तेरे पास में।

आज मिशीगन में पढ़ने वाली प्रिया का ब्लाग पहली बार देखा। उन्होंने अपने परिचय में लिखा है- मैं अभी पढ़ रही हूं। ये मेरी पहली हिंदी क्लास है। इसलिये स्पेलिंग में अभी बहुत गलतियां हैं। उन्होंने आज की पोस्ट में … पढना जारी रखे

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खेद , माफ़ी और मूढ़मतियों का दिन

आज चिट्ठाजगत में खेद , माफ़ी और मूढ़मतियों का दिन रहा। अविनाश ने नाहर के षडयन्त्र का खुलासा करते हुये जानकारी दी- अनूप शुक्ला मूढ़मति हैं। कुछ लोगों ने इस पर एतराज किया लेकिन अविनाश अपने मत पर पक्के रहे। … पढना जारी रखे

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खेत खायें गदहा, बांधें जायें कूकुर!

पाण्डेयजी कल कार की बात किये थे। आज साइकिल पर उतर आये। यही हो रहा है अपने देश में। बात खेत की करेंगे अगले क्षण खलिहान में मिलेंगे। अनीताजी को कौनौ दोस्त नहीं मिला तो किताबों से बोलीं-मुझसे दोस्ती करोगी। … पढना जारी रखे

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लुच्ची नजर, चुनिंदा नजारे- चश्मा आलोक पुराणिक का

अभय तिवारी की तमाम हसरतें पूरी होने को बेचैन रहती हैं। कानपुर में मिले तो बताइन कि उनके कोट पहनने की तमन्ना अधूरी रह गयी। एक दिन पाण्डेयेजी के ब्लाग में बोले -आप फ़ीड पूरी नहीं देते, आप तो ऐसे … पढना जारी रखे

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हिन्दी का पहला ब्लॉग गीत और ब्लॉग गान…

आज जब ये ब्लॉग गान पढ़ने में आया तो हिन्दी का पहला ब्लॉग गीत याद आ गया. ब्लॉगिंग बिना चैन कहाँ रे….

चिट्ठा चर्चा, रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 1 टिप्पणी