Monthly Archives: सितम्बर 2010

हम अपने- अपने समय की खिडकियों से झांकते चेहरे है

जावेद अख्तर ने कहा था” मुश्किल हालात में जीना भी एक आर्ट है” ….पर सच पूछिए तो बहुत अच्छे हालात में भी जीना भी एक आर्ट है ….हर कोई यश को नहीं संभाल सकता… .हर कोई सचिन नहीं होता….यश की … पढना जारी रखे

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जहाँ निःशब्द शब्द भी बोलते हैं

आमीर खान की आने वाली फिल्म धोबीघाट को एक समस्या आन पड़ी है और वो ये कि धोबियों की यूनियन को फिल्म के नाम में धोबी नाम का होना पसंद नही आ रहा, अपने अपने लॉजिक देकर कानून की सहायता … पढना जारी रखे

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ज़िन्दगी में कुछ न कुछ अच्छा भी होना चाहिए

Best Among Equals दिव्या दिव्या अजीत कुमार पहली महिला कैडेट बनीं जिनको सबसे बेहतर कैडेट के रूप में चुना गया। 21 वर्षीय दिव्या को ऑफीसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) की पासिंग आउट परेड में थल सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह ने … पढना जारी रखे

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सोमवार की चर्चा (२०.०९.२०१०)

नमस्कार मित्रों! मैं मनोज कुमार एक बार फिर सोमवार की चर्चा के साथ हाज़िर हूं। इसी सप्ताह हिन्दी दिवस था। तो दिवस को समर्पित करते हुए कुछ विद्वानों के विचार रखते हुए आज की इस चर्चा का शुभारंभ करते हैं। … पढना जारी रखे

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अन्तर्मन् से अनेक मन तक

एक और शनिवार, एक और चर्चा, एक और चिट्ठाकार लेकिन सुस्ती थोड़ा ज्यादा है इसलिये सोचा इंडिया तक का सफर कौन करे यहीं किसी को पकड़ उसकी चर्चा कर देते हैं। आसपास नजर दौड़ायी तो वो अन्तर्मन् पर जाकर अटक … पढना जारी रखे

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सोमवार (१३.०९.२०१०) की चर्चा

नमस्कार मित्रों! मैं मनोज कुमार सोमवार की चर्चा के साथ एक बार फिर हाज़िर हूं। सरोकार पर arun c roy ने लगा रखी है सीढियां!  ये बैसाखी नहीं है। यह वो माध्यम है जिस के द्वारा कवि कहता है सीढ़ियों … पढना जारी रखे

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गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है

हमारे आज के चिट्ठाकार आफिस के लिये देरी होने पर अपनी बैटर हॉफ को शायद यही कहते होंगे, ‘गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है, तुम हो कि खाने में मेरी, देर करती ही जा रही है‘। ओके ओके, … पढना जारी रखे

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सोमवार (०६.०९.२०१०) की चर्चा

नमस्कार मित्रों! हिन्दी का वार्षिक उत्सव आ रहा है। पूरे देश में १४ सितंबर को यह पर्व मनाया जाएगा, जिसे हिन्दी दिवस भी कहते हैं। वैसे तो एक फ़ैशन सा हो गया है कि हर दिवस पर हम कह देते … पढना जारी रखे

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(तथाकथित, अन्यभू) महागुरू चर्चाकार की ऐतिहासिक आखिरी ब्लॉग-चर्चा…

पिछले रविवार की चर्चा करते वक्त भूलवश रविवार की शेड्यूल्ड पोस्ट शनिवार को छप गई. सामूहिक प्रकल्पों में इस तरह की त्रुटियाँ कभी कभार हाइड्रोजन बम की तरह धमाका कर जाती हैं. तो, भाइयों ने इसे इंटेंशनल समझ लिया. किसी … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

एक सौम्य चिड़िया और उफ्फ ये अंदाज

मेरी पोस्ट पर एक युवा मित्र ने मुझे सुझाव दिया है कि मैं अपनी कलम का रुख बदल दूँ। उनका कहना है कि स्त्रियों को लेकर मेरी कलम एक तरफ ही चलती है। उनका सुझाव है कि मुझे स्त्रियों के … पढना जारी रखे

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