Monthly Archives: सितम्बर 2009

चिट्ठा चर्चा एक नए कलेवर में..

नमस्कार चिटठा चर्चा में आपका स्वागत है.. दो दिनों से ब्लोग्वानी ने साथी ब्लोगरो को लिखने की एक वजह दे डाली.. कितने ही लोगो ने ब्लोग्वानी को वापस बुलाया और बुलाकर धन्यवाद् भी दिया.. पर इस मनाने और बुलाने में … पढना जारी रखे

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ब्लागवाणी जनता की बेहद मांग पर वापस

कल ज्यादातर ब्लाग पर ब्लागवाणी के बैठ जाने से जुड़ी खबरें पोस्टों का विषय रहीं। लोगों ने अपनी लम्बी-लम्बी टिप्पणियां कापी-पेस्ट तकनीक से कीं। एकाध लोगों ने वरिष्ठ ब्लागरों से सवाल किया है कि वे चुप क्यों हैं। अब नाम … पढना जारी रखे

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दशहरे के मौके पर ब्लागवाणी बंद

  कल रविरतलामीजी ने नारकीय चर्चा करके कलम तोड़ दी। इसके बाद पता चला कि राजस्थान के एक अधिकारी की तबादला तनाव के मृत्यु हो गयी। उधर सिद्धार्थ इलाहाबाद में ब्लागर सम्मेलन/मिलन की तारीख् तय करके निकल लिये देवी दर्शन … पढना जारी रखे

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एक नारकीय चर्चा

कुछ दिन पहले अचानक इस पोस्ट पर नजर गई – देश नरक बन गया है “…सुबह सुबह एक दोस्त जो की पूर्वी भारत के एक मशहूर राज्य में सिविल सर्विसेस ट्रेनिंग ले रहा है का फ़ोन आया. वो बता रहा … पढना जारी रखे

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सफर में ख़ो गई मंज़िल,उसे तलाश करो

…..और ये बात यहीं तक न सीमित रही। डा.अमर कुमार जी ने भी कहा कि आज कुछ न लिखूंगा। और उन्होंने अपने वायदे के मुताबिक एक ठो पोस्टर बना के सटा दिया। शीर्षक है नक्कालों से सावधान। देखिये बगलै मां … पढना जारी रखे

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जब भी महफ़िल में नजारों की बात होती है

जब भी महफ़िल में नजारों की बात होती है,आसमान में चांद-सितारों की बात होती है,उस समय लब पर तुम्हारा ही नाम आता है,जब भी गुलशन में बहारों की बात होती है। आज सुबह जबसे शब्दों का सफ़र देखा तबसे यही … पढना जारी रखे

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ब्लॉगर और वर्डप्रेस के आगे जहाँ और भी हैं…

अपना माइवेबदुनिया भी हिन्दी चिट्ठाकारों से अंटा पड़ा है. हाथ कंगन को आरसी क्या? आइए देखते हैं कि कौन कौन यहाँ अड्डा जमाए हुए हैं. चलिए, कुछ हालिया बेतरतीब चिट्ठों पर नजर मारते हैं-   शेफाली अपने बच्चों की ओर … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 13 टिप्पणियाँ

छिच्छक दिवस

उच्च न्यायालय ने जसंवत सिंह की किताब से पाबंदी तो हटा दी है, पर सवालिया निशान इस बात का खड़ा होता है कि भारत की कार्यकारिणी ऐसे ही अपनी मर्ज़ी से क़ानून की तरोड़ मरोड़ करती रहेगी तो उसकी सज़ा … पढना जारी रखे

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बिना तू-तू मैं- मैं वाली ब्लॉगिंग – धत्त तेरे की

कल अनूप जी ने बिना तू-तू मैं- मैं वाली शादीशुदा ज़िंदगी को नीरस और स्वादहीन घोषित करते हुए बडी मज़ेदार दोहे चौपाइयों चेपीं ! विवाद और नोकझोंक जैसे विवाह को बनाए रखते हैं हमें लगता है ब्लॉगिंग को बने रहने … पढना जारी रखे

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रचनात्मक राजनीति की मिसाल और ओबामा को चिकोटी

राजनीति में रचनात्मकता न हो, यह ज़रूरी नहीं है. जैसे ब्लॉगर कुछ रच रहे हैं वैसे ही साहित्यकार भी कुछ न कुछ रच ही रहे हैं. लेकिन अब इनकी देखा-देखी राजनीतिज्ञ भी रचने पर अमादा है. जब राजनीतिज्ञ कुछ रच … पढना जारी रखे

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