Monthly Archives: मई 2008

रार, लोकाट, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, पूर्णविराम या बिन्दु?

पूजा जी कह रही हैं, क्यों लगता है कि तुम मेरे होजब कि तुम मेरे नहीं हो शायद वे कहीं और भी लिखती हैं, पर मुझे पता ध्यान नहीं आ रहा है, उनसे पूछा है, यदि आपको पता हो तो … पढना जारी रखे

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ब्लॉग की हॉफ लाइफ ब्लागर की हलचल के समानुपाती होती है।

इलाहाबाद मे आंधी और…:छत पर फ़ैला गेहूं। हम भूल गए हों ऐसा भी नहीं: लेकिन किसी ने याद भी तो दिलाया ही नहीं। ब्लॉग की हॉफ लाइफ : ब्लागर की हलचल(चिरकुटई टू बि मोर प्रेसाइज) के समानुपाती होती है। 🙂 … पढना जारी रखे

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शर्तें लगाई नहीं जाती दोस्तों के साथ

जिस समय आप दूसरे के बारे में कुछ लिख रहे होते हैं और उसकी पोल खोल रहे होते हैं तो सबसे ज्यादा अपने बारे में लिख रहे होते हैं। रचनाकार-अज्ञात टिप्पणी वाले विमल वर्मा ठ्मरी वाले भी इलाहाबादी हैं। उनके … पढना जारी रखे

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फ़ूला गुब्बारा, लड़ियाती बकरी और गुब्बारे में चुभा पिन

वो क्या है जी कि दुनिया बड़ी जालिम है। किसी का सुख देखा नहीं जाता। बोधिसत्व भैया खुले मन से डंके की चोट पर कह दिये- यहाँ किसी साहित्यकार ब्लॉगर का नाम लेकर मैं किसी का दिल नहीं दुखाना चाहता … पढना जारी रखे

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एक था राजा एक थी रानी पर कुछ अलग ये कहानी

हम चिट्ठाचर्चा जैसे सामुहिक मंच के दुरुपयोग के लिए कुख्‍यात रहे हैं 🙂 तो लंबी छुट्टी के बाद आज इस चर्चा में इसी दुरुपयोग की परंपरा का जारी रखते हुए जिस चिट्ठे की चर्चा कर रहे हैं वह एक अंग्रेजी … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, मसिजीवी, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 4 टिप्पणियाँ