Monthly Archives: जुलाई 2008

सिर्फ़ टिप्पणियां बचेंगी क्या?

अभिषेक अभिषेक नियमित रूप से गणित की बातें रुचिकर तरीके से बताते रहते हैं। सह्ज लेखन और सरल अंदाज उनके लेख को उन लोगों के लिये भी पठनीय बनाता है जिनके गणित के नाम से पसीने छूटते हैं। आज उन्होंने … पढना जारी रखे

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अमेरिका झुमरी तलैया से कित्ती दूर है?

डील कल मानसी ने नारी स्वतंत्रता पर अपने विचार रखे: अपने घर में छोटी छोटी बातों को नारी शोषण और नारी के प्रति अन्याय का नाम दे कर नारी कई बार खुद अपनी खुशियों को दूर कर देती है। “मैं … पढना जारी रखे

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भूलेगा नहीं उतरते वक्त कुरते का कील पर अटक कर फट जाना

डील खबर है कि:१. उड़नतश्तरी ने अपनी एक पोस्ट पर टिप्पणियों का सैकड़ा पूरा किया। २.आकाशवाणी मुम्बई केन्द्र ने अपनी स्थापना के ८१ वर्ष पूरे किये। ३.ज्ञानदत्त जी का गूगल रीडर भ्रष्ट हो गया है। ४. पल्लवी आंग्लभाषा की जय … पढना जारी रखे

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चिट्ठाजगत के इनाम और ब्लाग की पिरिक सफ़लता

डील कल चिट्ठाजगत ने अपने इनाम घोषित किये। एक जनवरी से २६ जनवरी तक के लेखों में निम्न लेखों को पुरस्कार के लिये चुना गया। इनाम और उनके विवरण यहां पर हैं। सभी को बधाईयां। प्रथम पुरस्कार: दम बनी रहे … पढना जारी रखे

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जो कुछ भी हुआ हो गुरु सरकार बच गई

डील गरिमा जी ने अपनी कहानी का अगला भाग आज पेश किया। सुनावत सुनावत उनका निन्नी आ गईल सो वे सूत गयीं। अगला भाग अब कल पेश होगा। गरिमाजी की पिछली पोस्ट आत्म हत्या क्यों जनाब? पठनीय व उद्धरणीय है। … पढना जारी रखे

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स्मार्ट नेता बन, ब्लॉगर्स का भेजा चूस!

वागीशा ब्लागजगत की कोई सच्ची-झूठी खबर सुनायें उसके पहले आपके लिये सूचना। सिद्धार्थ की बिटिया बागीशा का २० जुलाई को आठवां जन्मदिन पड़ता है। आप अपनी शुभकामनायें उसको ई-मेल करिये न। वह आपको शुक्रिया कहेगी। ई-मेल पता है:vagisha.tripathi@gmail.com आज ब्लाग … पढना जारी रखे

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भले ही फ्लाप आश्रम चलायें लेकिन इन ब्लोग को मत पढ़िये

आज सोचा फुरसतिया को थोड़ी फुरसत क्यों ना दे दी जाय, शनिवार की सुबह जब वो उठें तो थोड़ी चाय की चुश्कियों का आनंद बगैर चिट्ठा चर्चा की चिंता किये उठा सकें। तो अब थोड़ा चिट्ठा बांचे जाय, जो रहे … पढना जारी रखे

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पालिटिक्स अब हाथ की नहीं, जूता लात की है

कैटरपिलर हिंदी ब्लागर कम लिखते हैं| लेकिन जब लिखते हैं, पाठक की जानकारी में इजाफ़ा होता है। बालू में से तेल निकालने का मुहावरा तो सुना था लेकिन सच में तेल निकल सकता है बालू से ऐसा पता न था। … पढना जारी रखे

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निरंतर का नया अंक प्रकाशित

निरंतर आज की खास खबर यह है कि निरंतर का ११ वां प्रकाशित हुआ। कभी यह महीने में एक बार प्रकाशित होती थी। साथियों की व्यस्तताओं के चलते इसका प्रकाशन बंद हुआ लेकिन अपने ‘निरंतर’ नाम को सार्थक करते हुये … पढना जारी रखे

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भूत-वर्तमान-भविष्य: का फ़ैसला चवन्नी उछाल कर करें

हिंदी ब्लाग शुरुआत मौसम से। रमानाथ अवस्थीजी अपनी एक कविता में कहते हैं:-कुछ कर गुजरने के लिये मौसम नहीं नहीं मन चाहिये।इसी बात को प्रपन्ना इस कहते हैं:बाहिर का मौसम कैसा भी हो ,अंदर का मौसम तै करता है मौसम(कैसा) … पढना जारी रखे

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