Monthly Archives: अगस्त 2007

द साईलेंस इज़ डेफनिंग

जी हाँ आपने “खामोशी की आवाज़” जैसे जुमले सुने होंगे पर उदाहरण ज्यादा न देखे होंगे। तो पढ़िये अशोक जी चक्रधर की नवीनतम पोस्ट जो उन्होंने न्यूयॉर्क में संपन्न विश्व हिन्दी सम्मेलन पर लिखा। और शायद ये हिन्दी ब्लॉगजगत की … पढना जारी रखे

debashish में प्रकाशित किया गया | 6 टिप्पणियाँ

बया में रवीशी, अजदकी और अनामदासिया बयां

बया के नवीनतम अंक में हिन्दी ब्लॉगजगत् के बारे में अरविन्द कुमार का आलेख आपने संभवतः पढ़ा होगा. इसी अंक के संपादकीय में कहीं पर यह लिखा है “…ग़ौरतलब है कि प्रस्तुत व्यंग्य कथाओं में से तीन हिन्दी के ब्लौगों … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, रविरतलामी, chitha charcha में प्रकाशित किया गया | 1 टिप्पणी

चोरी भी करते हैं लेकिन शान से

यों तो चिट्ठों पर चर्चा के काबिल अधिक नहीं मिल पाताआखिर कब तक रवि रतलामी, फ़ुरसतिया, समीर को गाताकितने दिन आलोक पुराणिक या सागर की बात करूँ मैंया दुहाई मेरे पन्ने की , बोलो कितनी देर लगाता इसीलिये चर्चा का … पढना जारी रखे

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साहित्य जीवन के स्वांग का भी प्रतिबिंब होता है

हम एक बार फिर आलोक पुराणिक जी के दबाव में आ गये। वे पाठकीय ठसक के साथ बोले ! यह नियमित क्यों नहीं हो है जी। हमने जबाब देना ठीक नहीं समझा। सोचा पाठक तो राजा होता है। राजाजी जब … पढना जारी रखे

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साहित्य जीवन के स्वांग का भी प्रतिबिंब होता है

साहित्य जीवन के स्वांग का भी प्रतिबिंब होता है

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एक चर्चा ये भी है

1.विश्वास करें पर सतर्कता के साथ:जब समाज के यही हालत हैं तो यकीन किस पर किया जाय? 2.कुछ चेकिंग-ऊकिंग करने के लिए पोस्ट है, क्योंकि खोमचा शिफ्ट होने वाला है:हां भई नानैसेंस है पोस्ट! 3.लेखक वरिष्ठ पत्रकार है:क्या सच में … पढना जारी रखे

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फक्त तुझ्याचसाठी

लो जी ब्लागवाणी का नया संस्करण. मराठी में. और यह संदेश है कि कृपया आमचा व्यापर करा. मेरे लिए तो बहुत मजा हो गया. मराठी भूल रहा था अब रवां हो जाएगा. और चिट्ठाचर्चा में जल्द ही मैं मराठी चिट्ठों … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, संजय तिवारी में प्रकाशित किया गया | 9 टिप्पणियाँ