Monthly Archives: दिसम्बर 2009

तुलसी और दुर्वासा इतने भौंडे तो नहीं थे

ब्लॉग पर कविता लिखना कितना आसान है उसका एक उदाहरण देखिये. स्वनामधन्य महाकवि श्री अलबेला खत्री ने एक कविता लिखी है. कविता का शीर्षक है; “लोग माथा पीट रहे हैं और तुम लिंग पकड़ कर बैठी हो.“ शीर्षक पढ़ लिया? … पढना जारी रखे

शिवकुमार मिश्र में प्रकाशित किया गया | 45 टिप्पणियाँ

आइए, एक दूजे को चिट्ठा ईनाम बांटें…

उड़नतश्तरी चिट्ठे के बाजू पट्टी में अमित गुप्ता द्वारा दिए गए ब्लॉग पुरस्कार पर नजर गई तो वहाँ से कड़ी दर कड़ी खोजते पुरस्कारों का खजाना मिल गया. वैसे भी ब्लॉग पुरस्कारों का मौसम चला आया है. तो क्यों न … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 20 टिप्पणियाँ

नो लल्‍लो-चप्‍पो: एक वर्तनीदोष चर्चा…. मास्साब टाईप

कई लोगों को लगता है कि भई चिट्ठाचर्चा दोषों की उपेक्षा करती है तिस पर हम जैसे मास्‍साब को तो चाहिए कि वे जमकर छिद्रान्‍वेषण करें दोष दर्शन, परदोष प्रदर्शन करें। काहे नहीं करते… इसलिए कि खुद हमारे चिट्ठाकर्म में … पढना जारी रखे

मसि‍जीवी, chitthacharcha, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 34 टिप्पणियाँ

बड़ी घिनौनी लगती है अब आदम की बू-बास मियां

बहुत दिनों बाद आज चिट्ठाचर्चा करने बैठा हूँ. लगता है जैसे भूल गया हूँ कि कहाँ से शुरू करें और कहाँ ख़तम करें? लेकिन चर्चा करनी है तो कहीं से भी शुरू कर दूँ न. करीब बारह बजे रात के … पढना जारी रखे

शिवकुमार मिश्र में प्रकाशित किया गया | 12 टिप्पणियाँ

भोपाल, बंगलौर,दिल्ली,पूना और रायपुर

कल संजय बेंगाणी के हवाले से खबर मिली कि रविरतलामीजी को भी मीडिया मंथन पुरस्कार मिला है। सो उनको यानि की रविरतलामी जी को भी बधाई। इनामों की इस कड़ी में एक और इनाम की घोषणा कल हुई। ब्लाग जगत … पढना जारी रखे

अनूप शुक्ल में प्रकाशित किया गया | 19 टिप्पणियाँ

तरकश को मंथन मीडिया अवार्ड

विस्फ़ोट के हवाले से मिली खबर है कि  तरकश को मिला मंथन मीडिया अवार्ड!  इस् समाचार की जानकारी देते हुये आगे बताते हैं विस्फ़ोट के साथी — ज्ञान विज्ञान से जुड़े हिन्दी पोर्टल तरकश.कॉम को ई न्यूज श्रेणी में प्रतिष्ठित … पढना जारी रखे

अनूप शुक्ल में प्रकाशित किया गया | 17 टिप्पणियाँ

पांच पोस्ट, पच्चासों कार्टून और चंद एकलाईना

  एक इंसान हूँ मैं तुम्हारी तरह श्रीवास्तव जी जैसे लोगो को देखकर लगता है हम किस बात पे इतराते है ….ओर हमने किया ही क्या है अब तक ?ये वो लोग है जो बिना इश्तेहार बाजी के वर्तमान सिस्टम … पढना जारी रखे

अनूप शुक्ल में प्रकाशित किया गया | 27 टिप्पणियाँ