Monthly Archives: अक्टूबर 2007

चर्चाकार मंडली

चर्चाकार मंडली

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कितने निर्मम और निराले हैं राजनीति के खेल!

पुरानी रामलीला नया अंदाज हमें पता ही न था कि अनिल रघुराज का नाम अनिल सिंह है। सच में। यह बात हमको पता चली आज बेवदुनिया में छपे उनके ब्लाग के परिचय से। अभी उनकी पहली कहानी भी अभिव्यक्ति में … पढना जारी रखे

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अंग्रेजी न् जानने का अर्थ खुदकशी है!

चिट्ठों की बात् करने के पहले कुछ समाचार सुर्खियां:-१. अमर उजाला कानपुर् की खबर है -हत्यारे हदस गये। कल कुल् साठ लोगों को उम्रकैद् की सजा सुनाई गयी। इसमें उप्र के बहुचर्चित मधुमिता हत्याकांड के आरोपी, पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी … पढना जारी रखे

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ब्लागिंग भ्रष्टाचार का अनुपम उदाहरण है।

माया सभ्यता मैंने टिप्पणी न कर पाने के कुछ मासूम बहाने जब लिखे थे उस समय चिट्टाचर्चा करना बंद था वर्ना एक बहाना और लिखता कि चर्चा करने के कारण चिट्ठे पर टिप्पणी करना हो नहीं पाता। पढ़कर यहां लिखने … पढना जारी रखे

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आलोक जी का रावण अपने मोबाइल के बिल बाँच रहा है

हड़बड़ी में गड़बड़ी होती है ऐसा लोग कहते हैं। कहते तो हम भी हैं लेकिन मानते नहीं हैं। हमें तो लगता है कि हर धांसू काम हड़बड़ी में ही होते हैं जैसे कि यह गुटका चर्चा। है कि नहीं? बतायें, … पढना जारी रखे

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ये बनिये के बिल हो लेंगे

एक मास तक चिट्ठा चर्चा अब शायद न कर पाऊंगाअगले शनि को वाशिंगटन में करवाना है कवि सम्मेलनउसके दो दिन बाद निकलना अपनी भारत की यात्रा परकोई और करे चर्चायें, सब से करता नम्र निवेदन हां समीर दिल्ली में होंगे, … पढना जारी रखे

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तुम मुझे यूं जला न पाओगे

रावण आज के देश भर में जब रावण दहन हो रहा है और कुछ रावण ऐंठते हुये कह रहे हों कि तुम मुझे यूं जला न पाओगे तब चिट्ठाचर्चा करना अपने आप में अहमकपने का काम है। लेकिन करने में … पढना जारी रखे

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