Category Archives: blogs

बीता हुआ कोई क्षण नहीं लौटता

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Blogger, blogs, Kavita Vachaknavee में प्रकाशित किया गया | 26 टिप्पणियाँ

मैं सच में केवल इसलिए बचा हूँ क्योंकि…..

देश में स्थितियाँ निरंतर घातक बनी हुई हैं। पिछले ४-५ दिन का चिट्ठाजगत और ब्लॉगवाणी का आँकड़ा देखें तो सर्वाधिक प्रविष्टियाँ राष्ट्रीय विपदा की इस घड़ी के चहुँ ओर घूमती दिखाई देती हैं। हम आपादमस्तक लज्जा में गड़ने के खुलासों … पढना जारी रखे

हिन्दी चिट्ठाचर्चा, Blogger, blogs, chitthacharcha, Kavita Vachaknavee में प्रकाशित किया गया | 28 टिप्पणियाँ

औरतें : परिवार, रंग, खेमे और चर्चा की सहज संभाव्य कविता के नए प्रतिमान

सुबह की चर्चा के बाद गंगा में जाने कितना पानी बह चुका है पर हम हैं कि वहीं ठिठके अटके हैं कि अभी एक लाईना बकाया है | वैसे क्या आपको नहीं लगता कि आज का दिन कविता के नाम … पढना जारी रखे

हिन्दी चिट्ठाचर्चा, blogs, chithacharcha, Kavita Vachaknavee में प्रकाशित किया गया | 15 टिप्पणियाँ

जहाँ विश्वास होता है वहाँ फिर भ्रम नहीं होते

चिट्ठाचर्चा के इस प्रथम सत्र में सर्वप्रथम अनूप जी की सदाशयता के प्रति आभारी हूँ , जिन्होंने आप सभी से इस प्रकार संबोधित होने का अवसर दिया आप सभी किसी न किसी रूप में ज्ञान, कुल, शील, वय, मर्यादा आदि … पढना जारी रखे

हिन्दी चिट्ठाचर्चा, Blogger, blogs, chithacharcha, Kavita Vachaknavee में प्रकाशित किया गया | 26 टिप्पणियाँ

और भी काम हैं जमाने में…

जब दो तीन महिने भारत से ठकुरासी करके लौटते हैं तो पहले दिन ऒफिस जाते ही दस मिनट हालचाल पूछने का शिष्टाचार निभाने के बाद ऐसा काम लादा जाता है कि प्राण ही निकल आते हैं. लगता है कि गये … पढना जारी रखे

उड़न तश्तरी, चिट्ठचर्चा, समीर लाल, हिन्दी, हिन्दी चिट्ठाचर्चा, blogs, chitha charcha, debashish में प्रकाशित किया गया | 23 टिप्पणियाँ

ब्लॉग की बंजर धरती पर चंपा के फूल

कोई अगर कहे कि ब्लॉग की धरती बंजर है तो उसका क्या अर्थ लिया जाना चाहिए? चलिए, मान लेते हैं कि यह हिन्दी ब्लॉगों के संबंध में कहा गया होगा जहाँ बमुश्किल आधा-हजार चिट्ठे हैं. परंतु वहाँ भी, शायद कहने … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, रविरतलामी, हिन्दी चिट्ठाचर्चा, blogs, chithha charcha में प्रकाशित किया गया | 6 टिप्पणियाँ

आकस्मिक चर्चा

नमस्कार साथियों,मै आपका मित्र जीतेन्द्र चौधरी फिर से हाजिर हूँ, चिट्ठा चर्चा करने के लिए। अरे आप लोग सोचेंगे ये फिर आ गये, अभी रविवार को तो इसके झेला था, फिर पकाएगा? अरे का करें अपने शुकुल महाराज जो ना … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, हिन्दी चिट्ठाचर्चा, blogs, chithha charcha में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियाँ