Monthly Archives: मार्च 2008

जिक्र तेरा कर के हम, हाजिर जवाबी हो गए

कल अजित वडनेरकर ने शब्द-सफ़र की जगह शख्सियत-सफ़र कराया। अनीता खरबंदा के अनीताकुमार में बदलने की कथा सुनाई। अनीताजी लिखती हैं- कॉलेज के जमाने से ही हमें किताबों से बहुत प्यार था, लायब्रेरी हमारे लिए दूसरे घर जैसी होती थी। … पढना जारी रखे

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बगैर जिम्मेदारी, चाटें सत्ता की मलाई

अगर आप गाज़ा पट्टी पर न रह रहे हों तो सुरेश की तरह इस तरह फट पड़ने का मन तो आपका भी होता होगा: लाल झंडे वाले…मूर्खों की तरह परमाणु-परमाणु रटे जा रहे हैं, नंदीग्राम में नरसंहार करवाये जा रहे … पढना जारी रखे

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बनना था हुस्बाद तुम्हारा, भइया में तब्दील हुआ!

चर्चा की शुरुआत अच्छी खबर से किया जाये। अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन एवं श्रीमती सुमन चतुर्वेदी स्मृति ट्र्स्ट(भोपाल) के द्वारा डा. रमा द्विवेदी को ’ श्रीमती सुमन चतुर्वेदी श्रेष्ठ साधना सम्मान-२००७’से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें उनके … पढना जारी रखे

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