Category Archives: Tarun

जहाँ निःशब्द शब्द भी बोलते हैं

आमीर खान की आने वाली फिल्म धोबीघाट को एक समस्या आन पड़ी है और वो ये कि धोबियों की यूनियन को फिल्म के नाम में धोबी नाम का होना पसंद नही आ रहा, अपने अपने लॉजिक देकर कानून की सहायता … पढना जारी रखे

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अन्तर्मन् से अनेक मन तक

एक और शनिवार, एक और चर्चा, एक और चिट्ठाकार लेकिन सुस्ती थोड़ा ज्यादा है इसलिये सोचा इंडिया तक का सफर कौन करे यहीं किसी को पकड़ उसकी चर्चा कर देते हैं। आसपास नजर दौड़ायी तो वो अन्तर्मन् पर जाकर अटक … पढना जारी रखे

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गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है

हमारे आज के चिट्ठाकार आफिस के लिये देरी होने पर अपनी बैटर हॉफ को शायद यही कहते होंगे, ‘गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है, तुम हो कि खाने में मेरी, देर करती ही जा रही है‘। ओके ओके, … पढना जारी रखे

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एक सौम्य चिड़िया और उफ्फ ये अंदाज

मेरी पोस्ट पर एक युवा मित्र ने मुझे सुझाव दिया है कि मैं अपनी कलम का रुख बदल दूँ। उनका कहना है कि स्त्रियों को लेकर मेरी कलम एक तरफ ही चलती है। उनका सुझाव है कि मुझे स्त्रियों के … पढना जारी रखे

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ये शम्मह का सीना रखते हैं, रहते हैं मगर परवानों में

मेरा मानना है नये नये प्रयोग करते रहने चाहिये इससे जिज्ञासा और कुछ नया पाने की उम्मीद बंधी रहती है और कहने वाले कह गये हैं, उम्मीद में दुनिया कायम है या यूँ कह लीजिये उम्मीद में भारत टिका है … पढना जारी रखे

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शब्दों का क्या, बिखरे हैं इधर-उधर

टेप पर गाना बज रहा है, ‘सुरमई अंखियों वाली, सुना है तेरी अंखियों में‘, मैं गाना एन्जॉय करता हुआ चर्चा करने की सोचता हूँ तभी छुटकी आती है और जिसे ए बी सी तक पता नही उसे चेंज कर अपना … पढना जारी रखे

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एक बच्चा कम और दो पेड़ ज्यादा

मेरी नज़र कुछ दिनों पहले एक खबर में गयी थी जिसमे गुलाम नबी आज़ाद ने देश की जनसँख्या बढ़ने पर चिंता जतायी थी लेकिन उनका मानना था कि बात अभी आपातकाल तक नही पहुँची। नेताओं के और जनता के किसी … पढना जारी रखे

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