Category Archives: criticism

अपनी ही तुच्छताओं की अधीनता

आज यद्यपि मुझे यात्रा पर निकलना है और प्रातः ४.३० बजे बैठ कर चर्चा शुरू करने की इस घड़ी में अभी यह भी नहीं पता कि कितना लिखा जा सकेगा। स्पोंडेलाइटिस के गंभीर कष्ट से १० घंटे से परेशान हूँ … पढना जारी रखे

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रविवार्ता : वाह सजण….. वाह सजण

यह सप्ताह बड़ा उथल पुथल वाला रहा है। भारत में लगता है कि लगभग गृहयुद्ध की -सी स्थितियाँ आ गई हैं। एक ओर जहाँ कुछ माह पूर्व हिन्दी भाषियों की हत्याओं का सिलसिला था, वहाँ एक पर एक बम विस्फोट … पढना जारी रखे

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एक धुरविरोधी चिट्ठे का विदाई गीत

आज ऐसे एक चिट्ठे की चर्चा जो (अब) नहीं है- लो प्रत्‍यक्षा तुम्‍हें छोटा सा बहाना चाहिए था खुश होने का, हम एक बड़ा सा कारण दे देते हैं, कारण यह है कि ये दुनिया आज सुबह सात बजे से … पढना जारी रखे

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चर्चा के साथ-साथ अब समीक्षा भी

जब पढ़ने को बहुत कुछ हो और समय उस अनुपात में कम उपलब्ध हो तो क्या पढ़ा जाए और क्या छोड़ दिया जाए, यह तय करने के लिए फ्रांसिस बेकन का प्रसिद्ध स्वर्णिम नियम अत्यंत उपयोगी माना जाता है: Some … पढना जारी रखे

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