Monthly Archives: अप्रैल 2009

एक टेंशनीय चिट्ठाचर्चा

टेंशन के दिन हैं. वैसे दिन तो चुनाव और क्रिकेट के भी हैं. लेकिन जो मज़ा टेंशन लेन-देन में है, वो क्रिकेट में कहाँ? वैसे भी क्रिकेट में अब मज़ा नहीं रहा. क्रिकेट में तो केवल शाहरुख़ और शिल्पा शेट्टी … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 15 टिप्पणियाँ

ब्लॉगजगत की हवेली के अनगिनत दरवाज़े

पहली बार अनायास ही हमारे द्वारा की गई चिट्ठाचर्चा आप सबके सामने आ गई या यूँ कहिए कि रविरतलामीजी का कहा टाल न सके और अनूप शुक्ल जी ने झट से मंच पर धकेल दिया… लेकिन मंच पर आकर कुछ … पढना जारी रखे

मीनाक्षी में प्रकाशित किया गया | 26 टिप्पणियाँ

पुस्तक चर्चा, टिप्पणी चर्चा

कल पुस्तकचर्चा के अंतर्गत दो पोस्टें छूट गयीं थीं। एक पुस्तक की चर्चा नीरज गोस्वामीजी ने की थी। उन्होंने राजेश रेड्डी के गजल संग्रह उड़ान का जिक्र करने से पहले राजेश रेड्डी के बारे में जानकारी दी! येल्लो भैया नीरजजी … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 25 टिप्पणियाँ

जूता, जोरा-जामा, मुखौटा और गिरगिट

चुनाव सभाओं में अभी जूते चलने बन्द नहीं हुये हैं लेकिन इष्टदेव सांकृत्यायन ने अथातो जूता जिज्ञासा की आखिरी किस्त पेश कर दी। उन्होंने आवाहन किया अपने संपर्क में आने वाले हर शख़्स को यह समझाने की ज़रूरत है कि … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 21 टिप्पणियाँ

मिलिए, दिल्ली हंसोड़ दंगल चैम्पियन से…

चलिए, इस चर्चा में कुछ अत्यल्प या अचर्चित से चिट्ठों की चर्चा करते हैं. अचर्चित इसलिए भी कि इनमें बहुत से चिट्ठे मूलत: अंग्रेजी में हैं, परंतु इनमें इक्का दुक्का प्रविष्टियाँ हिन्दी में भी हैं. हम इन्हीं हिन्दी प्रविष्टियों की … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 9 टिप्पणियाँ

सांगीतिक चुनावी चिट्ठा चर्चा : सब ताज उछाले जाएंगे सब तख्त गिराए जाएंगे

तकरीबन महिने भर बाद आप सबसे इस मंच पर मुलाकात हो रही है। पिछली बार माहौल था होली का और अब इन झुलसाती गर्मियों मे चुनावी हवाएँ जोर मार रही हैं तो फिर इस बार की इस सागीतिक चर्चा का … पढना जारी रखे

मनीष कुमार में प्रकाशित किया गया | 11 टिप्पणियाँ

जो "आज की पसन्द" पर टकटकी लगाए नही खड़े हैं

हिन्दी लिखने ,पढने , जीने वालों की हमेशा से यह एक दिक्कत रही है कि वे हमेशा से एक चौपालनुमा स्पेस गढते रहना चाहते हैं। जहाँ घर-बार ,नौकरी ,बाल-बच्चे की चिंता घरवालियों पर छोड़कर , चन्द पगड़ीधारी , चारपाइयाँ बिछा … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 14 टिप्पणियाँ

निर्वाचन के ऊपर हावी चुनाव, चरणों वाला मतदान और नया दामाद

बड़ी गर्मी है जी. मंदी की मारी दुनियाँ और गर्मी का मारा भारत, दोनों लस्त-पस्त हुए जा रहे हैं. मंदी की मारी दुनियाँ में तमाम विद्वान कंज्यूमर कांफिडेंस इंडेक्स को निहार रहे हैं. गर्मी का मारा भारत चिंतित है. चिंता … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 23 टिप्पणियाँ

अब भी खिले फूल के अन्दर खुशबू होती है

कल की स्टार पोस्ट ज्ञानजी के अखाड़े से आई। उनका कैमरा कल माइक्रो फ़ाइनेन्सिंग से खरीदे गये नये-नवेले आरामदेह रिक्शे पर टूट पड़ा और यह धांसू ब्लागरीय पोस्ट बन गयी। वे इसके बारे में जानकारी देते बताते हैं: रिक्शे के … पढना जारी रखे

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टिप्पणीकार की चर्चा

मीनाक्षीजी ने 18 अप्रैल को जो अपने ब्लाग पर पोस्ट लिखी तो उसपर रविरतलामी जी की टिप्पणी थी-यह तो आपने मिनी चिट्ठाचर्चा कर डाली!इसे चिट्ठाचर्चा मंडली में आमंत्रण की तरह स्वीकार करने का कष्ट करें। मीनाक्षीजी को कष्ट प्रदान करने … पढना जारी रखे

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