Monthly Archives: मार्च 2007

महिला चिट्ठाचर्चाकार की शुरुआती पारी

लीजिए इस महिला चिट्ठाचर्चाकार की मेडन पोस्‍ट हाजिर है। आज आप सबों की चर्चा करने का सौभाग्‍य मुझे प्राप्‍त होने का समाचार मेरी रसोई के बेलन चकले, कड़ाही, साग सब्जियों, बच्‍चों, कामवाली बाई, कॉलेज की पुस्‍तकों और पतिश्री को मिला … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, नीलिमा, रविवार, neelima में प्रकाशित किया गया | 13 टिप्पणियाँ

कहाँ गया नारद?

चिट्ठाचर्चा सूनसान पड़ा, चर्चा कहाँ गायबअनुपजी से बतलाया यूँ, तुम ही करो अबजीतू का टर्न था, वे गये छूट्टियाँ मनानेफ्री तो हूँ ‘कविराज’, पर नहीं मेरा मनतुम्ही हो कर्णधार इसके, कहकर फुसलायाख़बर लेने का मौका है, धिरे से समझायाउनकी यह … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 8 टिप्पणियाँ

कहाँ रहें राम?

सभी पाठकों को रामनवमीं की शुभकामनायें. इस अवसर पर संबंधित लेखन लेकर आये हमारे संजय भाई, कहते हैं हैप्पी बर्थ डे, रामजी, अभय तिवारी जी कहते हैं कहाँ रहें राम? और इसी अवसर पर यह भी खुब रही पर प्रयास … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, समीर लाल, chithha charcha, sameer lal में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियाँ

पिघली हुई गज़ल और बीमार चाँदनी

फिर आई रुत चर्चा की वाह मनी, माडल नाओमीकिसके उतरे कपड़ेटिंचर का उपयोग कहां हैकुछ बातें सूरज से कहां कहां पर गईं कटारेंक्या है लिये तुम्हारेकौन किसे देता शाबासीखोल ह्रदय के द्वारे हिन्दी ल्के चिट्ठे देखोहै हिन्दी का सम्मेलनएक डायरी, … पढना जारी रखे

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नए बावर्ची का चिट्ठाचर्चा कोरमा

लीजिए हाजिर है कैफे चिट्ठा-चर्चा के इस नए बावर्ची की यह पाक विधि जिसमें मैं आपको बताउंगा कि चिट्ठा चर्चा कोरमा कैसे तैयार किया जाता है। लेकिन उससे पहले आज की सारी पोस्‍टों के पकवानों की सूची यहाँ देंखें। हाँ … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, मसि‍जीवी, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 9 टिप्पणियाँ

इक सुनहरी किरण पूर्व में आ गई

अपने ब्रेक को ब्रेक करके हम फिर से आपके सामने हाजिर हैं। पहले आज प्रकाशित हुये सारे चिट्ठे देख लें यहां! इसके बाद कुछ कविता-सविता हो जाये।तो भैया कविता तो एक बड़ी धांसू लिखी है तन्हा कवि ने- अश्कों से … पढना जारी रखे

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चर्चा के साथ-साथ अब समीक्षा भी

जब पढ़ने को बहुत कुछ हो और समय उस अनुपात में कम उपलब्ध हो तो क्या पढ़ा जाए और क्या छोड़ दिया जाए, यह तय करने के लिए फ्रांसिस बेकन का प्रसिद्ध स्वर्णिम नियम अत्यंत उपयोगी माना जाता है: Some … पढना जारी रखे

समीक्षा, सृजन शिल्पी, criticism, Srijan Shilpi में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियाँ

जस्ट कूल ड्यूड, कुछ पॉजिटिव तो ढूंढ

कल का दिन भारत के विश्वकप से निकलने पर स्यापे के नाम रहा। स्यापा टसुये बहाकर नहीं खिलखिलाते हुये किया गया।यह आधा भरा हुआ गिलास देखने की आशावादी नजर थी। साथियों ने भारत की हार में अच्छाइयां तलाशी। सबसे पहले … पढना जारी रखे

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तकिये के नीचे पिस्तौल रखकर सोइयेगा

हिन्दी चिट्ठाकारी में पत्रकारों के पदार्पण पर अनूप के चिट्ठे ने मानो हम सब के मन की बात कह दी हो। मेरा ख्याल है कि अब इस कांड पर पटाक्षेप हो जाना चाहिये। ये पहला ऐसा मौका नहीं होगा जहाँ … पढना जारी रखे

debashish में प्रकाशित किया गया | 2 टिप्पणियाँ

आह-हा! गाओ खुशी के गीत… चिठ्ठा चर्चा

गिरीराज जोशी पिछले कुछ समय से चर्चा नहीं कर पाये और उसकी कसर उन्होने अपन कल लिखे चिट्ठों की चर्चा में निकाल दी और आदरणीय फुरसतिया जी के लेखों से दो ढ़ाई इंच कम चर्चा लिख बैठे । उम्मीद करते … पढना जारी रखे

सागर चन्द नाहर, chithha charcha, Sagar Chand Nahar में प्रकाशित किया गया | 7 टिप्पणियाँ