Monthly Archives: फ़रवरी 2008

सात हिन्दुस्तानियों के ताज़े चिट्ठे

आवारा जानवर तेरे नाम अपनी कोमल कृतियाँ रचित कर रहे हैं, उम्मीद है और भी आएँगी, और गुंटकल, आन्ध्र प्रदेश से युग मानस वाले जय शंकर बाबु बता रहे हैं दक्षिण भारत में हिन्दी के फैलाव के बारे में। राजकपूर … पढना जारी रखे

आलोक, नए में प्रकाशित किया गया | 4 टिप्पणियाँ

कुछ चर्चीले चिट्ठों की चर्चीली चिट्ठियाँ

ठेले पे हिमालय ने कोसा भगवान बनाने वाले इंसान को, और ठेलों की चर्चा और जगह भी हो रही है, कचुमर रायते की भी। तनुश्री जी इ की मात्रा उल्टी लगा रही हैं पर मैनेजमेंट के फ़ंडे हिन्दिया जी दे … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 1 टिप्पणी

लगता है रोशनी पर सर्विस टैक्स लग गया है

कल की चर्चा में केवल सच ने बार-बार टिपिया के चित्र का लिंक ठीक ही करवा लिया। अभी भी उनका सच-हठ बना हुआ है कि नाम के नीचे बेजी का लिंक देते अच्छा रहता शायद!हम यही कहते हैं कि वे … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 8 टिप्पणियाँ

महीने भर की कोशिश

बहुत दिनों से सोच रहा था चिट्ठों की चर्चा की जाये उड़नतश्तरी चली रेल में, इसकी कथा सुनाई जाये कक्षामें से पंकज जी की कौन रहा अनुपस्थित दो दिन कंचन पारुल के लेखन पर कुछ तो टिप्पणियां की जाये फ़ुरसतिया, … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियाँ

ब्लागिंग ने चोर पकड़वाया

ये बगल वाला फोटो ब्लागखबरिया में छपा है। जयपुर के अखबार में। सुधाकर सोनीजी ने बनाया है। चौचक है न! तुलसीदास जी कह गये हैं- पर उपदेश कुशल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे॥ गोस्वामीजी जो बात बहुत पहले … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 14 टिप्पणियाँ

वैसे आप कहाँ के हैं?

<a href="http://bp2.blogger.com/_ve7Snvsgiuk/R772UNm6UkI/AAAAAAAAADo/f_UG0x24e2w/s1600-h/DSC00054.JPG ” title=”तारे जमीं पर”> १.चालाकी और पश्चाताप :एक सौ रूपये का चूना लगा कर नौ दो ग्यारह हो गये। २. स्त्री :कबीलों की लड़ाई में सबसे क़ीमती सामान। ३. तुम सँध्याके रँगोँ मेँ आतीँ, हे सुँदरी, साँध्य रानी … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 8 टिप्पणियाँ

बादल है या किसी का चेहरा

यूं ये रोज ही होता होगा पर आज तो मुझ जैसे कवित्त सवैया छंद के अखंड रिपु को कुछ कविताई दिख गई ब्लॉगवाणी के एक पृष्ठ पर। नोश फ़रमाईयेः भैया के पीछू दो-दो भाईबड़े प्यारे होते हैं दारू पीने वाले…. … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 2 टिप्पणियाँ