Monthly Archives: मार्च 2006

नवांकुरित चिट्ठे

फिर बात कुछ नवांकुरित चिट्ठों की। पहले पहल बर्लिन स्थित क्षितिज कुलश्रेष्ठ का “एक और नज़रिया“। शायद जर्मनी की हवा ने क्षितिज को अपनी सेक्सुअल पसंद की खुलेआम चर्चा करने का साहस दिया है। क्षितिज आपकी साफगोई की प्रशंसा करते … पढना जारी रखे

debashish में प्रकाशित किया गया | 4 टिप्पणियाँ