Monthly Archives: जनवरी 2009

बरखा प्रभाव – स्ट्राइसेंड प्रभाव को देसी नाम मिला

यह चर्चा आलोक कुमार ने मुझे डाक से भेज आदेश दिया की एक फरवरी को छापा जाए, वजह उन का “चौडाबाजा” (ब्राडबैंड) बज नहीं रहा। कोई भूल चूक लेनी देनी हो तो उन को बताया जाए, अपना काम खत्म। विपुल … पढना जारी रखे

आलोक, चर्चा, रविवार में प्रकाशित किया गया | 15 टिप्पणियाँ

बसंत की गुमशुदगी की रपट थाने में लिखाओ

आज बसंत पंचमी है। न जाने कितनी कवितायें बसंत पंचमी पर लिखी गयीं हैं। मुझे याद है काशी्विश्वविद्यालय की स्थापना बसंत पंचमी के ही दिन हुई थी। यह बात मुझे तीन साल पहले अफ़लातून जी की पोस्ट से मिली थी। … पढना जारी रखे

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आओ विचारें मिलकर सभी

सोच रहा हूँ कहाँ से शुरूआत करूँ, कहीं ये विचारों का मर जाना तो नही। कह नही सकता शायद इसकी वजह ३-४ दिन से कुछ ना पढ़ पाना हो। सपनों का मर जाना, हो सकता है खतरनाक हो लेकिन आजकल … पढना जारी रखे

chitha charcha, chitthacharcha, Tarun में प्रकाशित किया गया | 12 टिप्पणियाँ

ब्‍लॉगपठन तालीबानी समय में

न जी हम श्रीराम सेना में भरती नहीं हो गए हैं अगर खुद श्रीराम भी अपनी सेना का भरती दफ्तर हमारे पड़ोस में खोल लें तब भी मुश्किल ही है कि वो हमें रंगरूट बनाना चाहेंगे। बिना श्रीराम सैनिक हुए … पढना जारी रखे

मसिजीवी, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 15 टिप्पणियाँ

मंथ…मंथन…मन्थरा…मट्ठा….जड़ में डालने के लिए.

हमारे अनूप जी इतने चर्चित हैं कि एक दिन में दो-दो चर्चायें कर डालते हैं. कर के डाल देते हैं. पहले धिनचक चर्चा उसके बाद पिंचक चर्चा. तुकबंदी का तकाजा ये है कि आज की चर्चा को मैं बमचक चर्चा … पढना जारी रखे

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ढिंचक चर्चा के बाद पिंचक चर्चा

कल सबेरे हमने चर्चा कर डाली तो लगता है कि वे सवाल लिये तैयारै खड़े थे। उन्होंने छूटते ही सवाल छोड़ दिया। विवके उवाच:पहले अनुजा जी एक व्यक्ति का नाम तो बताएं जिसने स्त्रियों को प्रयोग करने के लिए मना … पढना जारी रखे

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चाहे कुछ मत काम करो लेकिन पीटो ढोल मियां

यार विवेक दिखे बाजार में, भागत सरपट जांय,मिले लपक हम धाय के, पूछा इधर किसलिये भाय,बोले विवेक अब क्या कहें, बात भई बहुतै है गंभीर,हम निंदा करने को कह दिये,सो भई निंदकन की भीर,कहते सब निंदक लोग हैं, अब कुटी … पढना जारी रखे

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