Monthly Archives: नवम्बर 2009

दीपक हवा के ठीक मुका‍बिल जला लिया

 आम तौर गीत/गजल/कविता लिखने पर् लिखने वाले को वाह्-वाह् मिलती है। लेकिन नीरज गोस्वामी जी को क्या मिला  पता है आपको? उन्होंने एक् ठो धांसू सी गजल् क्या लिखी कि उनको मिल गयी धमकी। अरे हम् सच कह रहे हैं … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 28 टिप्पणियाँ

स्त्री विमर्श, नायिका भेद और हिमालय यात्रा

मैं आपसे ही पूछता हूँ इस धन्य-धन्य वातावरण में जंगल से घास काटकर आती थक जाती ढलानों पर सुस्ताती और तब अपनी बेहद गोपन आवाज़ में लोकगीत सरीखा कुछ गाती आपकी वो प्रतिनिधि औरत आखिर कहाँ हैं …. शिरीष कुमार … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 30 टिप्पणियाँ

पुरुष, मेरा मन करता है कि तुम्हारा एक झाड़ू बनाऊँ और उससे अपने कमरे को बुहारूं…

बचपन सामने जो एक नाला है ना, गिर नहीं जाना उसमें, ठीक? गिरने से क्या होगा? अरे! गिरने से क्या होगा? एक हज़ार नौ सो छिपकलियाँ एक के बाद एक नाले के कीचड़ से निकलेंगी, फिर पानी में तैरकर तुम्हारे … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 32 टिप्पणियाँ

विज्ञान चर्चा – डार्विन का विकासवाद

नमस्कार, विज्ञान चर्चा में आपका स्वागत है. सबसे पहले एक सूचना विज्ञान चर्चा अब हर माह की अंतिम शनिवार को होगी.पिछली चर्चा में मैंने दो महत्वपूर्ण विज्ञान चिठ्ठाकारों के ब्लॉग का उल्लेख नही किया, आज की चर्चा में मुख्यतः उन्ही … पढना जारी रखे

डार्विन का विकासवाद, लवली कुमारी में प्रकाशित किया गया | 28 टिप्पणियाँ

स्मृतिशिलाएं और पत्थरों की ढेरियॉं

अनूपजी ने अल्‍ल सुबह की पोस्‍ट में चिट्ठाचर्चा के चर्चादर्शन को साफ करते हुए एक फुरसतिया पोस्‍ट ठेली है। चर्चाकार बिरादरी की जनसंख्‍या में बढ़ोतरी की भी घोषणा की गई है- इस बीच डा.अनुराग आर्य, श्रीश शर्मा मास्टरजी उर्फ़ ई … पढना जारी रखे

मसि‍जीवी, chithacharcha, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 11 टिप्पणियाँ

आखिर कितने तकाज़े कर सकता है कोई महबूब??

कहने वाले   कहते है के   आने वाले दौर में   जब इस डीसेंसटाईज होती दुनिया में “संवेदनायो  या  तो डिस्कवरी  चैनल  पर नुमाया होगी    या उन  पर डॉक्यूमेंटरी बना करेगी ..फिर भी कुछ चेहरे ऐसे है जो बरसो बाद भी  उतने  … पढना जारी रखे

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…… नन्हें फूलों से महकी गलियाँ हैं

      मराठी भाई लोग उत्तर प्रदेश वालों की हर जगह लगता है ऐसी कम तैसी करने पर आमादा हैं। सचिन भाई साहब को बाला साहब कुछ कहे-सुने तो सचिन उहां तो कुछ नहीं बोले। बोले भी तो होंगे … पढना जारी रखे

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प्रेम न हाट बिकाय

Technorati Tags: Kavita Vachaknavee आज की चर्चा करने के लिए जी भर कोशिश करनी पड़ीं है| यात्रा पर निकलने से पूर्व चर्चा की मनःस्थिति बना पाना बड़ा ही दुष्कर होता है| पर आप तो जानते हैं कि कुछ चीजें दायित्वबोध … पढना जारी रखे

Kavita Vachaknavee में प्रकाशित किया गया | 25 टिप्पणियाँ

हिन्दी ब्लॉग विश्लेषण – वर्ष 2009

वर्ष 2009 में हिन्दी ब्लॉगों में क्या कुछ गया गुजरा इसका सिंहावलोकन करने का यह समय भले ही आपको थोड़ा जल्दी लगता हो, मगर साल के पिछले ग्यारह महीनों में जो कुछ घटित हुआ है उस पर एक दृष्टि डाल … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 9 टिप्पणियाँ

मल्टी स्किलिंग के झांसे में टिप्पणीनरेश

  दो दिन पहले की चर्चा की इत्ती तारीफ़ हो गयी कि हम शरमा के अगले दिन चर्चा ही नहीं कर पाये। पहले तो हम समझ ही नहीं पाये कि असल बात क्या है? लोग सही में तारीफ़ कर रहे … पढना जारी रखे

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