Monthly Archives: जून 2009

शुक्ल जी किलियर कर दें

नमस्कार ! चिट्ठा-चर्चा में आप सभी का हार्दिक स्वागत है ! यदि आपने अभी तक नहीं जाना है तो अब जानना ही होगा कि आज हिमांशु जी का हैप्पी बड्डे है . बधाई देना न भूलें . इसमें कोई समस्या … पढना जारी रखे

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हे सूरज महाराज गर्मी को बरसाओ ना यूं

बड़े-बड़े लोग ब्लागरजन से बहुत मेहनत करवा लेते हैं। अब बताइये पुष्पा भारतीजी ब्लागिंग को साहित्य मानती ही नहीं हैं। न माने साहित्य हम भी नहीं मानते। लेकिन ई का कि वे रि-ठेल (रीठेल नहीं है सही ज्ञानजी) पर एतराज … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 21 टिप्पणियाँ

चुटकुला चर्चा

पिछले दिनों गगन शर्मा के धीर गंभीर चिट्ठे अलग सा में चुटकुले छपने पर बवाल मच गया था. पर, किसी भी लोकप्रिय पत्र-पत्रिका को उठाकर देख लें – उसका सर्वाधिक लोकप्रिय स्तंभ चुटकुले का ही होता है. रीडर्स डाइजेस्ट के … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 11 टिप्पणियाँ

क्यूँ हमारी संगीत प्रेमी जनता महरूम है एक उत्कृष्ट संगीत चैनल से ?

टीवी पर संगीत का कोई उत्कृष्ट चैनल क्यूँ नहीं आता जिस पर सारी संगीत विधाओं को समेटने और सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रसारित करने की काबिलियत हो ? रेडिओ वाले ऍसा क्यूँ ऐसा सोचते हैं कि हिट गानों की फेरहिस्त को … पढना जारी रखे

मनीष कुमार में प्रकाशित किया गया | 9 टिप्पणियाँ

तानसेन को मिस करता देश और बोरवेल अंकल का ‘साछात्कार’

हमारे देश का जनरल नालेज उद्योग बहुत बड़ा नहीं है. वैसे तो बाकी उद्योग भी क्या उखाड़ ले रहे हैं लेकिन वह एक अलग बात है. इसलिए उसपर चर्चा न करके केवल जनरल नालेज उद्योग पर ही टिके रहें तो … पढना जारी रखे

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बुनाई कढाई परनिंदा के माध्यम हैं

पाकिस्तान क्रिकेट का टी-२० वाला विश्वकप जीत गया। पिछले साल भी जीतते-जीतते ही हारा था। कहें कि पिछले साल की फ़िसली हुई जीत को उठाने में इत्ता समय निकल गया। हरमिंदर सिंह लिखते हैं: भारत से पिछले ट्वेंटी20 विश्व कप … पढना जारी रखे

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दुपट्टा सँभाल के

नमस्कार ! मंगलवाली चिट्ठाचर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है . आज चहुँओर से दु:खद खबरें सुनने को मिल रही हैं . सुबह जब से ब्लॉग्स पढ़ रहा हूँ, जिया बेचैन हुआ जाए है . पता चला है कि शिवकुमार मिश्र … पढना जारी रखे

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पिताओं के दिन भी बहुरे

कल पितृ दिवस पर था। पिताओं के दिन भी बहुरे। ढेर पोस्टें पिता लोगों के उप्पर लिख दी गयीं। आदित्य ने तो अपने पिता से गाना भी गवा लिया- तुझे सूरज कहूं या चन्दा। हिन्दयुग्म ने इस मौके पर कविता-आयोजन … पढना जारी रखे

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कितने मौसम गुज़र गये बारीश के,तुम्हारे बीना..

गुजराती भाषी कविगण यदि कविता हिन्दी में लिखेंगे तो क्या होगा? बारीश आएगी, और वे अकेले भीग लेंगे. भाई लोग (और बहना,), भाषा, व्याकरण और वर्तनी को मारो गोली – उसे साहित्य की किताबों में दर्ज रहने दो – ब्लॉग … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 11 टिप्पणियाँ

मरने की दुवायें क्यूं मांगू, जीने की तमन्ना कौन करे: संगीत चिट्ठाचर्चा

आज सबसे पहले तो सरोद के महान साधक उस्ताद अली अकबर खाँ साहब के निधन पर हार्दिक श्रद्धान्जली। ऐसे महान कलाकार के जाने के बाद सरोद वादन के क्षेत्र में एक शून्यता व्याप सी गई है। कबाड़खाना पर संजय पटेल, … पढना जारी रखे

सागर चन्द नाहर, Sagar Chand Nahar में प्रकाशित किया गया | 12 टिप्पणियाँ