Category Archives: chithacharcha

जिन्‍हें हमारा मुल्‍क चुभता है

  वैसे तो इलाहबाद पर कुरूक्षेत्र अभी जारी है और क्या पैंतरे हैं साहब…मजा आ गया। जिसने भी अब तक हिन्‍दी चिट्ठाकारी के विवाद देखे हैं वह मानेगा कि इस प्रकरण के जैसा अब तक कुछ नहीं हुआ…तिस पर भी … पढना जारी रखे

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बवाले जान हुआ खुदा

ईश्‍वर मध्‍ययुगीनता के प्रतीकात्‍मक अवशेष का नाम है। जब जब इंसान को यह भ्रम होने लगता है कि वह मध्‍ययुगीनता से बाहर तो नहीं आ गया वो झट से भगवान को याद कर लेता है तुरंत ही पूरी हिंस्र मध्‍ययुगीनता … पढना जारी रखे

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काठ के उल्‍लुओं की स्‍वीकारोक्तियॉं

जब आत्मस्वीकृतियॉं आर्डर आफ डे बन ही गई हैं तो हम भी स्‍वीकार कर लें कि कि हम अहमक हैं, मूर्ख हैं, चुगद हैं, आलसी हैं, नकारा हैं…. लुब्‍बो लुआब ये कि जो अब तक आप हमारे बारे में सोचते … पढना जारी रखे

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‘जजमेंटल’ होने के ट्रैप से बचा रहना

कल अनूपजी ने चर्चा तारीख बदलने से बस कुछ ही पहले की, एक जानकार चर्चापाठक ने राय रखी- ई अपरिहार्य कार्य चर्चा के दिन ही क्यों टपक पड़ते हैं??? और यह मुत्तादी [कंटेजियस] क्यों होते हैं?? शायद किसी ब्लाग वायरस … पढना जारी रखे

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गेंहूँ, गेंहूँ से ब्‍याहा…घुन की जान बची

अदालत का फैसला आ गया है, बात अब क्‍लोजेट से बाहर है। चर्चा के लिए कीबोर्ड थामने से पहले ही पता था कि अंगी भाव समलैंगिकता ही पाई जाएगी पर उम्‍मीद के खिलाफ यहॉं पाया कि कम लोग सीधे सीधे … पढना जारी रखे

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वोट से बनो कि बिन वोट पप्‍पू तो तुम्‍हें ही बनना है

हमारा मानना रहा है कि भारतीय राजनीति और कला का बहुत गहरा नाता है ! जब जब राजनीति में सरगर्मियां और हलचल बढती है कला की सभी विधाओं में रचनात्मक उर्जा बढी हुई दिखाई देने लगती है ! खासकर ब्लॉग … पढना जारी रखे

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एक चोखेरचैट चर्चा: समरथ हमदरदी बांचें, बेचारे चरित्‍तरनाशी

शुक्रवार सुबह की शुरूआत ही ऐसे होती है कि नीलिमा से कहते हैं कि छोड़ो आज चाय मैं बनाता हूँ तुम  निश्चिंत होकर चर्चा करो पर न जी वे किसी झांसे में नहीं आतीं फिर फोन करके दूसरी चोखेरबाली सुजाता … पढना जारी रखे

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