Category Archives: २९/१२/०८

मलिका, गुलाम और मुल्क …यानी मालामाल

जैसा कि आमतौर पर बह्स-प्रधान बातचीत का होता है वैसे ही गाली-गलौज वाली बात का हुआ। लोग बात के केंद्रीय भाव तक नहीं पहुंचे और बकौल सिद्धार्थ गाली-गलौज के बहाने दोगलापन के रूप में सामने आया। जाड़े के मौसम में … पढना जारी रखे

अनूप शुक्ल, २९/१२/०८ में प्रकाशित किया गया | 29 टिप्पणियाँ