Category Archives: २१/१२/०८

चोट तो फ़ूल से भी लगती है, सिर्फ़ पत्थर कड़े नहीं होते

हिंदी ब्लाग जगत के आदि चिट्ठाकार के रूप में (?) ख्यात आलोक कुमार ने हमारे अनुरोध को स्वीकार करते हुये खिचड़ी-चर्चा पेश की। आर्यपुत्र शब्द पर कविताजी ने मौज लेते हुये टिपियाया- पहले यह बताया जाए कि फुरसतिया ने आपको … पढना जारी रखे

अनूप शुक्ल, २१/१२/०८ में प्रकाशित किया गया | 25 टिप्पणियाँ