Category Archives: २०.१२.२००८

आज की चिट्ठा खिचड़ी

फुरसतिया देव ने कल आह्वान किया, “आर्यपुत्र! तुम चिट्ठाचर्चा क्यों नहीं करते? कब तक हमीं कलम घिसते रहेंगे? आखिर हमें भी कुछ और काम होते हैं!” आर्यपुत्र जी अपनी जिम्मेदारी स्वीकारते हुए शुक्रवार की रात ऐसे सोए कि शनिवार – … पढना जारी रखे

आलोक, २०.१२.२००८ में प्रकाशित किया गया | 23 टिप्पणियाँ