Category Archives: संजय बेंगाणी

मध्यान्हचर्चा दिनांक : 19-03-2007

(आप सभी को भारतीय नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऐं)संजय कक्ष में प्रवेशते देख धृतराष्ट्र ने व्यंग्य किया,” आओ, संजय. नियमितता कोई तुमसे सीखे. संजय ने आँखें चुराते हुए लैपटॉप पर नजरे गड़ा दी. घृतराष्ट्र : यहाँ वहाँ के टंटो में टाँग … पढना जारी रखे

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मध्यान्हचर्चा, संजय बेंगाणी, sanjay bengani में प्रकाशित किया गया | 2 टिप्पणियां