Category Archives: संजय तिवारी

फक्त तुझ्याचसाठी

लो जी ब्लागवाणी का नया संस्करण. मराठी में. और यह संदेश है कि कृपया आमचा व्यापर करा. मेरे लिए तो बहुत मजा हो गया. मराठी भूल रहा था अब रवां हो जाएगा. और चिट्ठाचर्चा में जल्द ही मैं मराठी चिट्ठों … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, संजय तिवारी में प्रकाशित किया गया | 9 टिप्पणियाँ

तो हो जाए एक चिट्ठा वर्कशाप?

ब्लागर मीट तो होती रहती है. क्यों न एक वर्कशाप की जाए? ऐसे नये चिट्ठाकारों को एक जगह ले आया जाए जहां पुराने चिट्ठाकार उनकी समस्याओं का समाधान करें. तकनीकि पहलुओं पर आ रही समस्याओं का निदान करें. एकाध प्रेजेन्टेशन … पढना जारी रखे

संजय तिवारी में प्रकाशित किया गया | 6 टिप्पणियाँ

नये फुरसतिया का जन्म

आज अक्षरग्राम में आलोक ने गणितीय गणना कर बताया है कि किस तरह हिन्दी चिट्ठे लगातार बढ़ रहे हैं. सक्रिय चिट्ठाकारों की संख्या में भी अच्छी खासी बढ़ोत्तरी हुई है. अभी तक न पढ़ा हो तो यहां से वहां तक … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, संजय तिवारी में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियाँ

ये क्या कर रहे हो चिट्ठाकारों

यहां मैं एक सवाल उठा रहा हूं. किसी को नाराज करने के लिए नहीं सिर्फ सवाल करने के लिए सवाल उठा रहा हूं.विभिन्न एग्रीगेटरों पर हाल में जो शीर्षक मुझे दिखे हैं उनमें से कुछ नीचे मैं दे रहा हूं, … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, संजय तिवारी में प्रकाशित किया गया | 7 टिप्पणियाँ

एक अलिंकित चर्चा

महाशक्ति पर प्रमेन्द्र प्रताप सिंह लिखते हैं ” कुछ दिनों पूर्व देखने में आया था कि कुछ चिट्ठाकारों के द्वारा अप्रत्‍यक्ष रूप से महाशक्ति का बहिस्‍कार किया जा रहा था और इसकी छाप निश्चित रूप से चिट्ठाचर्चा पर दिखती है।” … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, संजय तिवारी में प्रकाशित किया गया | 4 टिप्पणियाँ

भोज-भात और साधुवाद

हिन्दी ब्लागिंग में साधुवाद का युग बीत गया इसलिए मैं आतंकवादी बनना चाहता हूं. मुझे इस ढांढस से कोई फर्क नहीं पड़ता कि क्या साधुवाद का कोई युग होता है. मैं और मेरी चिट्ठाकारी अक्सर ये बाते करते हैं कि … पढना जारी रखे

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खादिम, सारा दिन

राकेश जी की संक्षिप्त चर्चा के बाद, अब एक अति संक्षिप्त चर्चा. तो सत्ते की तिकड़ी बीत जाने के बाद भी संसार कायम है इसलिए अध्याय वहां से शुरू करते हैं जहां शास्त्री जे सी फिलिप की दक्षता पर रश्क … पढना जारी रखे

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