Category Archives: मसि‍जीवी

दुविधा से मुझे डर लगता है वेताल

एक सहचर्चाकार आजकल गायब हैं उनसे पूछा कि ऐसा कयों ? उन्‍होंने कहा कि यार कुछ बोर होने लगे हैं कुछ नया दिखता ही नहीं ब्‍लॉग पर.. हमें हैरानी हुई इतने ब्‍लॉगर इतने पुरस्‍कार, इतने विवाद, कुत्‍तों से लेकर चॉंद … पढना जारी रखे

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अज्ञान के आनंद में डुबकी लगाती चर्चा अनइग्‍नोरेबुल की

  अज्ञान में अपूर्व आनंद है। अरसे से ब्‍लॉगक्रीड़ा से परे हैं, सप्‍ताह दर सप्‍ताह अनूपजी हमें बताते रहे कि चर्चा करनी है हम इस मेल के साथ वैसा ही बरताव करते रहे जैसा मितव्‍ययता के सरकुलरों के साथ सरकारी … पढना जारी रखे

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नो लल्‍लो-चप्‍पो: एक वर्तनीदोष चर्चा…. मास्साब टाईप

कई लोगों को लगता है कि भई चिट्ठाचर्चा दोषों की उपेक्षा करती है तिस पर हम जैसे मास्‍साब को तो चाहिए कि वे जमकर छिद्रान्‍वेषण करें दोष दर्शन, परदोष प्रदर्शन करें। काहे नहीं करते… इसलिए कि खुद हमारे चिट्ठाकर्म में … पढना जारी रखे

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लेकोनिक टिप्‍पणी लेकोनिक चर्चा

लेकोनिक हमारे प्रयोगवृत्‍त  का शब्‍द नहीं है, कतई नहीं। आज ज्ञानदत्‍तजी ने अपनी पोस्‍ट में ठेला तो विशेषण के रूप में खूब जमा। श्रीश पाठक “प्रखर” का अभियोग है कि मेरी टिप्पणी लेकॉनिक (laconic) होती हैं। पर मैं बहुधा यह … पढना जारी रखे

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स्मृतिशिलाएं और पत्थरों की ढेरियॉं

अनूपजी ने अल्‍ल सुबह की पोस्‍ट में चिट्ठाचर्चा के चर्चादर्शन को साफ करते हुए एक फुरसतिया पोस्‍ट ठेली है। चर्चाकार बिरादरी की जनसंख्‍या में बढ़ोतरी की भी घोषणा की गई है- इस बीच डा.अनुराग आर्य, श्रीश शर्मा मास्टरजी उर्फ़ ई … पढना जारी रखे

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इस चर्चा को खुद पढें दस लोगों को पढ़ने के लिए भी कहें…नहीं तो…

ये कोई शोध परिणाम नहीं सीधा साधा अवलोकन है कि कल, बोले तो सांता ताऊ के क्रिसमस वाले दिन चिट्ठे लिखे तो गए लेकिन पढ़े नहीं गए, मतलब कम पढ़े गए। ब्‍लॉगवाणी के ज्‍यादा पढ़े गए कॉलम को देखें तो  … पढना जारी रखे

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चर्चाए चिंतनशील औ चिंतित

डिस्‍क्‍लेमर– ये एक अकारण गरिष्‍ठ चर्चा है जिसका कारण ये है कि कल ही कल में तीन चर्चा हो गईं दो मिसिरजी ने कीं एक चर्चा, दूसरी वन लाइनर स्‍पेशल। एक और चर्चा या कहो कि पुरानी चर्चा का रीठेल … पढना जारी रखे

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