Category Archives: मसिजीवी

काठ के उल्‍लुओं की स्‍वीकारोक्तियॉं

जब आत्मस्वीकृतियॉं आर्डर आफ डे बन ही गई हैं तो हम भी स्‍वीकार कर लें कि कि हम अहमक हैं, मूर्ख हैं, चुगद हैं, आलसी हैं, नकारा हैं…. लुब्‍बो लुआब ये कि जो अब तक आप हमारे बारे में सोचते … पढना जारी रखे

मसिजीवी, chithacharcha, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 12 टिप्पणियाँ

‘जजमेंटल’ होने के ट्रैप से बचा रहना

कल अनूपजी ने चर्चा तारीख बदलने से बस कुछ ही पहले की, एक जानकार चर्चापाठक ने राय रखी- ई अपरिहार्य कार्य चर्चा के दिन ही क्यों टपक पड़ते हैं??? और यह मुत्तादी [कंटेजियस] क्यों होते हैं?? शायद किसी ब्लाग वायरस … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, मसिजीवी, chitha charcha, chithacharcha, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 27 टिप्पणियाँ

एक पापाराज्‍़ज़ी चर्चा बरास्‍ता ट्विटर

चर्चा से पहले देख लें कि पिछले 24 घंटे में किसने क्‍या लिखा। अब ये भी कोई बात हुई एग्रीगेटर से तो कोई भी पता चला लेगा कि किस चिट्ठाकार ने क्‍या लिखा, ऐसे में चर्चाकार क्‍या भाड़ भूंज रहा … पढना जारी रखे

मसिजीवी, chithha charcha, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 7 टिप्पणियाँ

गेंहूँ, गेंहूँ से ब्‍याहा…घुन की जान बची

अदालत का फैसला आ गया है, बात अब क्‍लोजेट से बाहर है। चर्चा के लिए कीबोर्ड थामने से पहले ही पता था कि अंगी भाव समलैंगिकता ही पाई जाएगी पर उम्‍मीद के खिलाफ यहॉं पाया कि कम लोग सीधे सीधे … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, चिट्ठाचर्चा, मसिजीवी, chithacharcha, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 12 टिप्पणियाँ

चर्चाशास्‍त्र प्रकरण : चर्चा का अंगीरस उर्फ मेरे निन्‍यानवे तेरे निन्‍यानवे

हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग फैशन का वो दौर है जिसमें गारंटी की अपेक्षा न करें। हमने शुक्रवार का दिन चर्चा के लिए अपने जिम्‍मे लिए है पर अगर पारा 43 से ऊपर हो तो भला गारंटी कैसे ले सकते हैं। तो समझो … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, मसिजीवी, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 10 टिप्पणियाँ

चिट्ठाचर्चा टाईम्‍स – चर्चा अंक 800

बड़े आकार के लिए छवि पर क्लिक करें     इतनी मेहनत के बाद अब देखा तो पाया कि हाट स्पाट लिंक काम नहीं कर रहे हैं। इसलिए मजबूरी में पूरा टेक्‍स्ट लिंकों के साथ नीचे दे रहे हैं। हम … पढना जारी रखे

मसिजीवी, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 28 टिप्पणियाँ

ब्‍लॉगपठन तालीबानी समय में

न जी हम श्रीराम सेना में भरती नहीं हो गए हैं अगर खुद श्रीराम भी अपनी सेना का भरती दफ्तर हमारे पड़ोस में खोल लें तब भी मुश्किल ही है कि वो हमें रंगरूट बनाना चाहेंगे। बिना श्रीराम सैनिक हुए … पढना जारी रखे

मसिजीवी, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 15 टिप्पणियाँ