Category Archives: चिट्ठाचर्चा

बताइए साबजी कैसा लग रहा है ?

प्रौद्योगिकी की दुनिया बहुत तेजी से बदलती है..इतनी  तेजी से कि इंसान अपनी एक ही पीढ़ी में तकनीक की कई पीढि़यॉं देख कर विदा लेता है…  अभी कल तक की बात लगती है जब डोस वातावरण में फ्लॉपी डालकर बूट … पढना जारी रखे

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‘जजमेंटल’ होने के ट्रैप से बचा रहना

कल अनूपजी ने चर्चा तारीख बदलने से बस कुछ ही पहले की, एक जानकार चर्चापाठक ने राय रखी- ई अपरिहार्य कार्य चर्चा के दिन ही क्यों टपक पड़ते हैं??? और यह मुत्तादी [कंटेजियस] क्यों होते हैं?? शायद किसी ब्लाग वायरस … पढना जारी रखे

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गेंहूँ, गेंहूँ से ब्‍याहा…घुन की जान बची

अदालत का फैसला आ गया है, बात अब क्‍लोजेट से बाहर है। चर्चा के लिए कीबोर्ड थामने से पहले ही पता था कि अंगी भाव समलैंगिकता ही पाई जाएगी पर उम्‍मीद के खिलाफ यहॉं पाया कि कम लोग सीधे सीधे … पढना जारी रखे

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चर्चाशास्‍त्र प्रकरण : चर्चा का अंगीरस उर्फ मेरे निन्‍यानवे तेरे निन्‍यानवे

हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग फैशन का वो दौर है जिसमें गारंटी की अपेक्षा न करें। हमने शुक्रवार का दिन चर्चा के लिए अपने जिम्‍मे लिए है पर अगर पारा 43 से ऊपर हो तो भला गारंटी कैसे ले सकते हैं। तो समझो … पढना जारी रखे

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हँसिए कि हम बिना मंजिल के जी रहे हैं

  शुभकामनाओं से भरे ब्‍लॉग क्षितिज में अफलातून ने बताया कि किस प्रकार अखबार माफिया ने पुलिस का इस्‍तेमाल कर संघर्षरत हॉकरों की हड़ताल तोड़ने में सफलता प्राप्‍त की। अखबारों की कीमत में एक तिहाई की वृद्धि के एवज में … पढना जारी रखे

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आपको कंडोन नहीं कंडेम बोलना था

२००८ २००८ वर्ष २००८ ईस्वी सन् की अपनी अन्तिम चर्चा करते हुए भोर के ४ बजे मुझे इस कल्पना से अत्यन्त हर्ष हो रहा है कि चिट्ठाचर्चा के लिए इस वर्ष का यह अन्तिम पखवाड़ा बहुत महत्वपूर्ण रहा है। क्य़ों … पढना जारी रखे

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गब्बर चिट्ठाचर्चाकार संवाद

(वैसे तो मूलत: यह चर्चा 19 मार्च 2007 को की गई थी. इस बीच, हिन्दी चिट्ठाकारी में हजारों पोस्टें ठेल दी गई हैं, और चिट्ठाकार पांच सौ से बढ़कर पांच हजार हो गए हैं, मगर परिस्थितियां घेला भर नहीं बदली … पढना जारी रखे

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