Category Archives: चर्चा

बरखा प्रभाव – स्ट्राइसेंड प्रभाव को देसी नाम मिला

यह चर्चा आलोक कुमार ने मुझे डाक से भेज आदेश दिया की एक फरवरी को छापा जाए, वजह उन का “चौडाबाजा” (ब्राडबैंड) बज नहीं रहा। कोई भूल चूक लेनी देनी हो तो उन को बताया जाए, अपना काम खत्म। विपुल … पढना जारी रखे

आलोक, चर्चा, रविवार में प्रकाशित किया गया | 15 टिप्पणियाँ

पूरा विश्वास उठ चुका है!!!

फुरसतिया जी का हम पर से पूरा विश्वास उठ चुका है. उठ भी जाना चाहिये. ऐसी हरकत बार बार कि अभी चर्चा कर रहे हैं, करते हैं, करेंगे और फिर नहीं कर पायेंगे कब तक कोई झेले. मगर हमारी भी … पढना जारी रखे

उड़न तश्तरी, चर्चा, चिट्ठा चर्चा, समीर लाल, Blogger, chitha charcha, chithacharcha, chithha charcha, sameer lal में प्रकाशित किया गया | 17 टिप्पणियाँ

चर्चा : लाशों पर लाठीचार्ज?

साथियों मैं आपका दोस्त जीतेन्द्र चौधरी हाजिर हूँ बुधवार यानि दिनांक 14 मार्च 2007 को लिखे गए चिट्ठों की चर्चा को लेकर। आज के दिन काफी चिट्ठे लिखे गए जिनका लेखा जोखा यहाँ पर मौजूद है। मै छांव छाव चल … पढना जारी रखे

चर्चा, चिट्ठा चर्चा, चिट्ठाचर्चा, हिन्दी चिट्ठाचर्चा में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियाँ

कट गई अरमानों की पतंग

चिट्ठाचर्चा के रूपाकार को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है, और यह जारी रहनी चाहिए ताकि हमेशा कुछ अच्छा कुछ नया सा होता रहे. आइए, सबसे पहले नए चिट्ठों का स्वागत करें, जो, हो सकता है नए तो न हों, … पढना जारी रखे

चर्चा, चिट्ठा चर्चा, चिट्ठाचर्चा, हिन्दी चिट्ठाचर्चा में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियाँ

रविवारीय चिट्ठा चर्चा:

साथियों, आपका दोस्त जितेन्द्र चौधरी हाजिर है शनिवार के चिट्ठों की चर्चा के साथ। आज की चर्चा शुरु करने से पहले मै कुछ निवेदन करना चाहूंगा। हम चिट्ठा चर्चा कर रहे है, जितनी छोटी,संक्षिप्त और बिन्दुवार होगी उतने ज्यादा लोग … पढना जारी रखे

चर्चा, चिट्ठा चर्चा, चिट्ठाचर्चा, हिन्दी, हिन्दी चिट्ठाचर्चा में प्रकाशित किया गया | 10 टिप्पणियाँ

गाँधीजी का न्यासिता (ट्रस्टीशिप) संबंधी सिद्धांत

गाँधी जी पुण्य स्मरण करते हुये आज की चर्चा प्रारंभ कर रहा हूँ. १२ जनवरी से शुरु हुई जद्दो जेहद को आज अंजाम पाते देख खुशी से आँख छलक आई. इसे कहते हैं कि अगर जज्बा हो तो मंजिल पाने … पढना जारी रखे

चर्चा में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियाँ

उफ्फ!!ये कहाँ आ गये हम

सन १९८१ में एक फिल्म आई थी ‘सिलसिला’. अमिताभ और रेखा मुख्य कलाकार थे. याद आता है वो कशिश भरा गीत, जब अमिताभ अपनी स्थितियों को यूँ शब्द देते हैं: मैं और मेरी तन्हाई, अक्सर ये बातें करते हैं,तुम होती … पढना जारी रखे

चर्चा में प्रकाशित किया गया | 10 टिप्पणियाँ