Category Archives: अनूप शुक्ल ०७/०१/०९

ख़ुशी बड़ी बड़ी चीज़ों की मोहताज नहीं

जाड़े के मौसम में लिखना/पढ़ना सब बड़ा बबाल लगता है। बैठे हैं कम्बल ओढ़े सुबह-सुबह कि चर्चा करी जाये। लेकिन उंगलियां कम्बल के बाहर नहीं जातीं। जाती हैं फ़िर लौट आती हैं। मुझे फ़िर विवेक की चर्चा याद आती है … पढना जारी रखे

अनूप शुक्ल ०७/०१/०९ में प्रकाशित किया गया | 31 टिप्पणियाँ