Author Archives: bhaikush

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attractive,having a good smile

यहां वहां से उठाकर रखे कुछ अधूरे पूरे सफ्हे

शब्द शब्द होते है …उन्हें किसी लिबास की आवश्यकता क्यों……न किसी नेमप्लेट की…….कभी कभी उन्हें गर यूं ही उधेड़ कर सामने रखा जाए तो…….(एक) हर दिन की तरह, अल्सुबह की नरमी आँखों में भारती रही, दोपहर का सूरज चटकता रहा … पढना जारी रखे

डॉ .अनुराग में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

सोमवार (१३.१२.२०१०) की चर्चा

नमस्कार मित्रों! मैं मनोज कुमार एक बार फिर हाज़िर हूं सोमवार की चर्चा के साथ। कुछ दिन के अंतराल के बाद आया हूं। ऐसी कोई खास व्यस्तता न होते हुए भी कुछ ऐसा होता गया कि इस मंच से चर्चा … पढना जारी रखे

मनोज कुमार में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

माचिस एक आग का घर है…..जिसमें बावन सिपाही रह्ते हैं.

लिखते रहना एक अच्छी जिद है ….किताबी पन्नो के बरक्स कंप्यूटर भी बड़ी  सहूलियत से किसी   भी वक़्त अपने स्क्रीन पर बहुत कुछ अच्छा लिखा दिखा सकता है .टेक्नो लोजी ने  पाठको को न केवल बढाया है ..अलबत्ता परस्पर … पढना जारी रखे

डॉ .अनुराग में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

….इस देश में देशभक्ति बड़ी सस्ती चीज़ है

कल की चर्चा में नीरज बसलियाल की टिप्पणी थी- हम टिप्पणी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले गरीब ब्लोगरों को कितना राशन मिलेगा| टिप्पणी देखते ही लगा कि कुछ खास ग्राहक है। गये ब्लॉग तो देखा नाम है कांव-कांव। … पढना जारी रखे

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चिट्ठाचर्चा को राशन की दुकान मत बनाइये

ब्लॉगिंग करने को फ़िर मन आया कई दिनों के बादपोस्टों पर बेमतलब टिपियाया कई दिनों के बादभाईचारे का भभ्भड़ देखा फ़िर कई दिनों के बादटिप्पणियों से खिल गयीं बांछे फ़िर कई दिनों के बाद। यहां-वहां लड़-भिड़कर आया वो कई दिनों … पढना जारी रखे

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सोमवार (०८.११.२०१०) की चर्चा

नमस्कार मित्रों! मैं मनोज कुमार एक बार फिर हाज़िर हूं। दीपावली के पटाखों की गूंज से मन थोड़ा शांत हुआ तो चर्चा के लिए कुछ ब्लॉग्स की खोज में निकला। अपने मन को सकून देने के लिए अपना-अपना तरीक़ा होता … पढना जारी रखे

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हसरतसंज -मासूम मोहब्बत के कुछ प्यारे किस्से

मैं फिजिक्स का विद्यार्थी हूँ और होम साइंस की किताब चुपके से पढ़ रहा हूँ । पढने के बाद अंगडाई लेता हूँ जैसे हवाई जहाज कैसे बनता है, जान लिया हो । बाहर देहरी पर दस्तक हुई है, चुपके से … पढना जारी रखे

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