कश्मीर…! याद तो है ना?

आज से ठीक चार दिन बाद हम अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहे होंगे.. ब्लोगर नीरज भदवार ठीक कहते है कि दरअसल हमें आज़ादी मिल तो गयी पर अब हमें पता ही नहीं कि इसका करे क्या? कश्मीर में उठती लपटों के बारे में सोचने की किसी के पास फुर्सत ही नहीं.. शायद बाकी भारत ने कश्मीर से पहले ही नाता तोड़ लिया है.. ना वहा से कोई किसी टेलेंट हंट में आता है.. ना फ़िल्मी दुनिया में ना क्रिकेट की टीम में.. ना किसी को परवाह है उनके आने या ना आने से.. वो नाराज़ है और हमें परवाह नहीं…

दरअसल आज की चर्चा में शायदा जी की पोस्ट और उस पर प्रतिक्रियात्मक मेजर गौतम की पोस्ट को शामिल करना चाहता था पर एक लिंक से दुसरे लिंक्स तक पहुँचते पहुँचते विचारों का एक कोलाज सा बन गया.. कश्मीर के हालातो पर कोई एक विचार बना पाना अब मुश्किल हो गया है.. बहुत सारे लिंक्स बहुत सारी तस्वीरे बहुत सारे वीडियो हर किस्सा एक अलग हिस्सा बन गया है.. सुबह से तीसरी चाय पीने के बाद अब जो कोलाहल चल रहा है उसी को समेट कर यहाँ लिख रहा हूँ.. मकसद किसी एक का होंकर रहना नहीं बस अलग अलग निगाहों से मुद्दे को देखने की कोशिश भर है..

शुरुआत शायदा जी की उसी पोस्ट से कर रहा हूँ जिसमे एक मासूम की मौत का दर्द और मौत के लिए सीआरपीएफ को जिम्मेदार ठहराया गया है.. शायदा जी फेसबुक पर किसी वाल पोस्ट के हवाले से कहती है..

i am from batamaloo, i eyewitnessed the death of a 7 year old kid yesterday, here in batamaloo! he was coming back from home, after playing cricket with his friends in a nearby ground, while i was as usual collecting strings for my news re…p……ort. suddenly a group of crpf men came in a mobile bunker and started thrashing me, even broke my camera! fired indiscriminately over the residential buildings there! i was hurt! blood dripping from my head! i ran for my life and at that fateful minute, that 7 year old boy passed through that area. the dogs ran after him! and brought him down by a blow of gun on his head! he was beaten to pulp! i cried for help! i cried someone please save us! we are being murdered! no one came out! who would want to risk his life? i tried very hard! but i could barely move! when they thought it was not sufficent, they stick a cane deep down his throat till he died! ya allah!

हालाँकि इस पोस्ट से उनका मकसद किसी को भला या बुरा कहना नहीं उनका सवाल कुछ और था जो वे आगे लिखती है..

क्रप्‍या इस पोस्‍ट को उसी रोशनी में पढ़ा जाए जिसमें लिखा गया है, पाकिस्‍तान क्‍या कर रहा है, कश्‍मीर में पत्‍थर फेंकना एक व्‍यवसाय है, प्रदर्शनकारी स्‍पॉन्‍सर्ड हैं और कश्‍मीरी लोग इन दिनों जमकर तोड़फोड़ और आगज़नी रहे हैं, ये सब जानने के बाद भी मैं जानना चाहती हूं कि क्‍या इस बच्‍चे को इस तरह मर जाना चाहिए था …?

मेजर गौतम की पोस्ट पढने से पहले मैंने शायदा जी की पोस्ट के बारे में जानना चाहा जब मैं उस प्रोफाईल तक पहुंचा जिसमे इस बात का जिक्र हुआ था तो वहा से कई लिंक मिले जो नकारात्मकता की बुनियाद पर ही बने हुए थे.. उसमे से आधे लोगो की फ्रेंड लिस्ट्स में कई पाकिस्तानी लोग मिले जो भारत को खुलेआम गालिया दे रहे है..

शबीका नाजिर जिनके बयान को शायदा जी ने अपनी पोस्ट में शामिल किया था उनकी प्रोफाईल पर मुझे इन्नोसेंट कश्मीरी की प्रोफाईल मिली अपने परिचय में वो कहते है..

Kashmir Ki Aazaadi Tak Jung rahe Jung Rahe Gi…
Bharat Ki Barbaadi Tak Jung Rahe Gi Jung Rahe Gi….

कश्मीर की आज़ादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी
भारत की बर्बादी तक… जंग रहेगी जंग रहेगी..
 


इन्ही में से एक प्रोफाईल पर कश्मीरी पंडितो के प्रदर्शन की फोटो लगी है जिसके लिए उन्होंने शब्द इस्तेमाल किये है

ना घर के ना घाट के

नीचे जो टिप्पणिया आयी है वो कुछ यू है..

Musaib Hamid – they are not worth of holding the pictures of our leaders

Aashiq Shah – humara is se kuch nahe honie wala… victory is still ours.

Sitamzad Koushir – In kutoo ko idurhi tazaab chidk dana tha

Mohammed Mustafa Khan – kon ha ya dakhan…kon sa protect kar raha ha…

Syed Muzamil – how these bastards r opposing our movement

Our Land Kashmir – thy wer protesting against freedom movement

Wazim Neals – these the people which were throw-en out of Kashmir in 90’s

Mughal Kashmiri – they all are mthr fkrs……

नीचे जो तस्वीर है उसमे प्रदर्शनकारी पुलिस वाले को मार रहा है.. और नीचे लिखा है कि ये बदमाशी नहीं है बल्कि मैं सेल्यूट करता हु कि इसने पुलिस वाले को मारा है..

इसी पर एक टिपण्णी शाहिद दर नाम से है जिनका कहना है कि 

मैं उस पुलिस वाले को सेल्यूट करता हु जिसने वापस गोलिया नहीं चलायी वरना १०-१५ जाने और चली जाती..

उनकी इस टिपण्णी पर फ़िरोज़ लाला नाम से किसी ने टिपण्णी की है जो कि सिक्किम मनिपाल यूनिवर्सिटी से पास आउट है और अभी अबू धाबी में सोफ्टवेयर इंजिनियर है उनके वाल पर लगभग सभी पोस्ट में परवेज मुशर्रफ साहब की तारीफों के पुल बंधे है.. वो फरमाते है कि

यदि कश्मीर के जेहाद के बारे में जानना चाहते हो तो कुरआन ए पाक पढो.. तुमने कुरआन नहीं पढ़ी है इसीलिए ऐसा कह रहे हो.. और उनका कहना है कि कुरआन में एक शब्द है गजवा ए हिंद.. जाकर पहले उसके मतलब को समझो..

इस शब्द को जब गूगल में डाल के ढूँढा तो इसका कुछ अर्थ यू निकला कि किसी मुस्लिम देश द्वारा भारत पर फतह करना.. क्या वाकई में कुरआन में ऐसा लिखा हो सकता है?????

गजवा ए हिंद के बारे में जानकारी के लिए इन लिंक्स पर क्लिक करे लिंक एक, लिंक दो..

इसी पर कई टिप्पणिया है जिन पर लगभग सभी में पुलिस वालो को और जवानो को गालिया दी गयी है और उनके द्वारा किये गए गलत कामो का ब्यौरा है..

अब मैं उलझता जा रहा हूँ फेसबुक प्रोफाईल्स में उनमे जो विडियोस है उनमे लोगो के आक्रोश में.. ऐसा लग रहा है जैसे उकसाया जा रहा है लोगो को.. और यही हो रहा है.. आम भारतीय बहुत संवेदनशील होता है और इसी संवेदनशीलता का फायदा उठाकर मासूम लोगो को बहकाया जा रहा है.. शायदा जी की संवेदनशीलता भी इसी का परिणाम लगती है.. बच्चे की फोटो लगाकर सिर्फ आधा सच दिखाया गया है..

आप फेसबुक की इन प्रोफाईल्स इनकी पोस्ट्स और इनके कमेंट्स में देख सकते है किस तरह लोगो के दिमाग में जहर भरा जा रहा है.. इनमे से आधे लोग पाकिस्तानी है आधे दुबई में है आधे से ज्यादा हिन्दुस्तान में होने के बावजूद पाकिस्तानी नेताओ की तस्वीरे लगाये हुए है.. पत्थरो की गाड़िया भरके आ रही है..

महिलाओ और बच्चो को जानबूझ के आगे किया जा रहा है.. ये सब एक सोची समझी साजिश के तहत हो रहा है.. शुक्रिया शायदा जी का कि उन्होंने ये पोस्ट डाली और मुझे एक जरिया मिला कश्मीरी लोगो के मन को पढने का.. यदि फेसबुक पे जितनी कश्मीरी है उनकी माने तो उन्हें भारत से कोई हमदर्दी नहीं है…

भारतीय कुत्तो वापस जाओ..
जी हाँ मेजर गौतम अपनी पोस्ट में ऐसा ही कुछ लिखते है.. 

यक़ीन जानिये, अपने मुख पर “indian dogs go back” के नारे को सुनकर संयम बरतना बड़ा ही जिगर वाला काम है। एक सरफ़िरा नौजवान एक वर्दीवाले के पास आकर उसके युनिफार्म का कालर पकड़ उसके चेहरे पर चिल्ला कर कहता है बकायदा अँग्रेजी झाड़ते हुये “you bloody indian dog go back” और बदले में वो वर्दीवाला मुस्कुराता है और सरफ़िरे नौजवान को भींच कर गले से लगा लेता…पूरी भीड़ हक्की-बक्की रह जाती है और वो वर्दीवाला अपने संयम को मन-ही-मन हजारों गालियाँ देता हुआ आगे बढ़ जाता है।

 कश्मीरी लोग बैनर लिए यही नारे लगा रहे है.. शायद जी के ब्लॉग पर जो घटना दी गयी है उसी का खंडन मेजर अपनी पोस्ट में करते है..

एक आठ साल का बच्चा दौड़ते हुये गिर पड़ता है और उसके तमाम भाई-बंधु उसे अकेला छोड़ कर भाग जाते हैं तो सुरक्षाबलों की टुकड़ी में हरियाणा के एक जवान को उस गिरे बच्चे को देखकर दूर गाँव में अपने बेटे की याद आती है, वो उसे अपनी गोद में उठाकर पानी पिलाता है, अपनी गाड़ी में अस्पताल छोड़ कर आता है और जब उस बच्चे की मौत हो जाती है अस्पताल में तो उसी बच्चे को बर्बरतापूर्वक कत्ल कर देने का इल्जाम भी अपने सर पर लेता है। 

पर जैसा कि डा. अनुराग कहते है कि आर्मी के पास कोई फेसबुक या ट्विटर नहीं है..

ऐसी घटनाओ का जिक्र जानबूझ कर किया जा रहा है.. लोगो को बरगलाने के लिए मासूम लोगो की भावनाओ के साथ खेल खेला जा रहा है.. जो लोग फेसबुक पर ये सब शेयर कर रहे है यदि उन्हें गौर से पढ़ा जाए तो सिवाय नकारात्मकता फ़ैलाने के कुछ नहीं कर रहे है वे भारत के लिए घोर नफरत है उनके मन में.. और वाकई एक एजेंडा लेकर किया जा रहा है ये सब कुछ..

शायदा जी का सवाल कि उस बच्चे का मरना कितना सही था का जवाब शायद ऐसे लोग दे सके जो प्रदर्शनकरियो में महिलाओ और बच्चो को जबरदस्ती आगे भेज रहे है.. यक़ीनन उन्हें रोकना होगा आज़ाद कश्मीर के लिए ना सही पर शांत कश्मीर के लिए ही सही..

अंत में फेस बुक पर ही मिले दो विडियोस शेयर करना चाहूँगा..

http://www.youtube.com/v/mXneLyijBH0&hl=en_US&fs=1

http://www.youtube.com/v/HpbBIdu9DtY&hl=en_US&fs=1

About bhaikush

attractive,having a good smile
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