Monthly Archives: अगस्त 2009

देह, सेक्स और अजब संयोग

मैं अभी कुछ दिनों पहले ही अनुपजी से अनुगूँज फिर से शुरू करने की बात चैट पर कर रहा था और आज देखा तो उन्होंने एक पुराने अनुगूँज की रिठेल दे मारी। पहला आयोजन क्या देह ही है सब कुछ? … पढना जारी रखे

chitthacharcha, Tarun में प्रकाशित किया गया | 5 टिप्पणियाँ

भूख बिठाकर घर में उसका यार हुआ है घूरे लाल

आपने उड़ि-उड़ि बैठी हलवैया दुकनिया वाला गाना सुना होगा। इधर देखिये मोटरसाइकिलें उड़ रही हैं। डॉ. अहमद अली ‘बर्क़ी’ आज़मी की प्रदूषण पर कवितायें देखिये और प्रदूषण से बचने का मन बनाइये। सामान्य ज्ञान बढ़ा लीजिये अनिल कान्त की संगति … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 29 टिप्पणियाँ

मधुमक्खियाँ फूलों पर मँडराती नहीं

हफ़्ते की शुरुआत में नमस्कार या कुछ और कहते हुये डर लग रहा है। लेकिन ये डर ऊ वाला नहीं है जिसमें कहीं भूल से तू न समझ बैठे मैं तुझसे मोहब्बत करता हूं! लफ़ड़ा हो। हुआ ये कि भैये … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 11 टिप्पणियाँ

शाहकार बनने पर वे कटवा देंगे मेरे दोनों हाथ, उनका यही इनाम मेरी किस्मत में लिखा था

जेम्स कैमरॉन की याद है आपको? टाइटैनिक के फ़िल्मकार. कैमरॉन जल्द ही नई फ़िल्म अवतार (ये तो हिन्डी में शीर्षक लगता है जी!) लेकर आ रहे हैं जो तकनीक के मामले में आज तक की सभी फ़िल्मों को मात करने … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 6 टिप्पणियाँ

और यह चर्चा कमीने के बाद की

तो आर्यपुत्र कमीने को देख आए, और फिर से चर्चा करने बैठे हैं। क्या कह रहे हैं, फ़िलम कैसी थी – एकदम झकास। मुंबई के वडापाव की याद आ गई। विशाल भारद्वाज ने बिल्कुल हॉलीवुड स्टाइल में बनाई है। देखना … पढना जारी रखे

आलोक में प्रकाशित किया गया | 6 टिप्पणियाँ

एक चर्चा कमीने के पहले की

(अब शीर्षक लग गया है, पहले नहीं था)हाँ तो आर्यपुत्र जी सुबह पाँच बजे का एक अलार्म, और साढ़े पाँच का दूसरा अलार्म (दो क्यों? दो फ़ोन हैं भई) लगा के सो गए। सुबह जब अलार्म बजा तो सबसे पहले … पढना जारी रखे

आलोक में प्रकाशित किया गया | 7 टिप्पणियाँ

अपना रास्ता लो बाबा ! माफ करो !

आज चिट्ठाचर्चा नही करनी होती तो मै शायद एक ऐसे पोस्ट पढने से वंचित रह जाती जो इतने महान विचारों से अनुप्राणित है कि उसके आगे सबका कद बौना है!टहलते टहलते मेरी निगाह शायदा की इस पोस्ट पर जा टिकीं। … पढना जारी रखे

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