Monthly Archives: जुलाई 2009

बिजली और विवेक ने तुड़वाई पंखे की सगाई

भारत और आसपास के देशों के हाल मासाअल्लाह टाइप हैं। नेता लोग बल भर और अकल भर कोशिश कर रहे हैं अपने-अपने देश को आगे ले जाने की लेकिन देश लोग हैं कि मानते ही नहीं हैं। बैक गियर में … पढना जारी रखे

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प्रभु जी मोहे साहित्यकार कहौ

नमस्कार ! चिट्ठा चर्चा साहित्य में आपका हार्दिक स्वागत है । चर्चा के साथ साहित्य शब्द के इस्तेमाल पर आप अवश्य चौंके होंगे । पर आपने अगर टिप्पणी में यह कह दिया कि चर्चा साहित्य नहीं है तो आपसे ज्यादा … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 14 टिप्पणियां

जो बना रहे थे साफ्टवेयर, अब बनायें समोसा

ज्ञानजी देश में इलेक्ट्रानिफ़िकेशन की स्थिति पर अपने विचार व्यक्त करते हैं। सरकारी विभागों में इलेक्ट्रानिफ़िकेशन पर अपनी अपनी पीड़ा बताते हुये ज्ञानजी लिखते हैं: यह हताशा अवश्य होती है कि ये लोग जब इन्फोसिस बना रहे थे तब हम … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 13 टिप्पणियां

<p>फेल ब्लॉग</p>

कोई ब्लॉग फेल हो सकता है? हाँ. हो सकता है. और यहाँ तो कई-कई फेल ब्लॉग हैं. एक त्वरित नजर मारते हैं. पहला – दुनिया का संभवत: सबसे ज्यादा फेल ब्लॉग. इसके सैकड़ों पृष्ठों में समाहित कुछ फेल पोस्टों की … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 13 टिप्पणियां

शनीचरी एक लाईना

एक लाईना रामप्यारी मैम की इंगलिश क्लास : में A फ़ार ऐश्वर्या आंटी.. क्या ब्लॉग साहित्य है ? – मेरी हाजिरी : को ही साहित्य समझा जाये यंत्रणा और आत्मद्वंद्व के अंधेरे दिन :भी गुजर जायेंगे उदयप्रकाश का सफाईनामा और … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 15 टिप्पणियां

है मुस्कुराता फूल कैसे तितलियों से पूछ लो

उदयप्रकाशजी के द्वारा गोरखपुर के एक कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कबाड़खाना में दनादन छप रही पोस्टों से अशोक पाण्डेयजी कचुआ गये और इस प्रकरण का कबाड़खाने से, बकौल अजित वडनेरकर, हरिओमतत्सत कर दिया: उदय प्रकाश जी वाले मसले … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 24 टिप्पणियां

इक नई उम्मीद लेके आएगी कल की सहर

आज की चर्चा अनूपजी के याद दिलाने पर सम्भव पाई… इस कारण कई चिट्ठों को पढ़ने का मौका मिला… कभी कभी हम पूरी पोस्ट पढ़ जाते हैं लेकिन कुछ पंक्तियाँ दिल को छू जाती हैं……… आज उन्हें यहाँ उतार दिया … पढना जारी रखे

मीनाक्षी में प्रकाशित किया गया | 20 टिप्पणियां

हमको अच्छी नहीं लगी यह रीत तिहारी !

नमस्कार ! चिट्ठा चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है । नरोत्तमदास जी ने सुदामा चरित में लिखा है : सीस पगा न झगा तन में प्रभु, जानै को आहि बसै केहि ग्रामा।धोति फटी-सी लटी दुपटी अरु, पाँय उपानह की नहिं … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 19 टिप्पणियां

बड़े लोगों की बड़ी बातें

हमारे शब्दशिल्पी अजित वडनेरकर ने कल उदयप्रकाशजी की त्वरित टिप्पणी को ब्लागर की टिप्पणी बताया और यह आशा की कि यह लफ़ड़ा जल्द निपटेगा। उदयप्रकाशजी ने अपने ब्लाग पर अपनी बात रखी और कहा: अगर मैं क्षोभ या हताशा में … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 23 टिप्पणियां

आँख के बदले आँख और दाँत के बदले दाँत

यह एक सुविचार है. जब बात चली है सुविचारों की , तो अभिषेक प्रसाद की कविता में ये सुविचार तो हम आप सब पर शत प्रतिशत लागू होते हैं – यहाँ देखिये मेरी नजर से एक बच्चा खेल रहा है … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 6 टिप्पणियां