कारगिल,नागपंचमी और सच का सामना


रश्मि स्वरूप

ये फोटो रश्मि स्वरूप की है। रश्मि ने नन्ही लेखिका के रूप में ब्लाग लेखन की शुरुआत की है। अपने परिचय में रश्मि लिखती हैं:

मात्र 9 वर्ष की आयु में चौथी कक्षा से सीधे दसवीँ प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की और 11 वर्ष की आयु में 12वीं जीव विज्ञान (biology) और 15 वर्ष में विज्ञान स्नातक (B.Sc.) करके राजस्थान की सबसे कम उम्र 16 वर्ष में M.Sc. करने वाली पहली छात्रा बनी

इतनी कम उम्र में एम.एस.सी. करने वाली रश्मि अपने बारे में बताते हुये लिखती हैं:

मै एक छोटी सी लड़की हूँ
सुबह की पहली किरण सी उजली हूँ
छा जाउंगी नभ पर,यही ख्वाब बुनती मै पली हूँ
मै एक छोटी सी लड़की हूँ

यूं तो अकेले ही अपनी मंजिल की और बढ़ी हूँ
पर कुछ सपने और जोड़ लिए हैं खुद से
और सबको साथ लेके चल पड़ी हूँ
मै एक छोटी सी लड़की हूँ

मैं दुआ करता हूं कि रश्मि के नभ पर छा जाने इरादे पूरे हों।


नागपंचमी

कल नागपंचमी के अवसर पर साथियों ने कुछ पोस्टें लिखीं। पहले ज्ञानजी ने सुबह सुबह नाग दर्शन कराये। अरविन्द मिश्र जी ने नागपंचमी क्यों मनायी जाती है यह बताने के लिये कहानियां सुनाईं। सोनालिका ने इंसानी सांप दिखाये और पा.ना. सुब्रमणियन ने सर्पों की एक और क्रीडा स्थली की जानकारी दी। बालसुब्रमण्यम ने सापों के बारे में जानकारी दी है:

हमें चिंतित करनेवाले केवल चार सांप हैं–नाग, करैत, फुर्सा और दबोइया–जो बड़े खतरनाक हैं और मानव बस्तियों के आसपास पाए जाते हैं। गनीमत है कि इन चार मुख्य सांपों का प्रत्येक दंश घातक नही होता। दंश की तीव्रता दंशित व्यक्ति के स्वास्थ्य, उसके शरीर के आकार और शरीर में गए विष की मात्रा आदि पर निर्भर करती है।


नागपंचमी

दीपक भारतदीप का कहना है कि पर्यावरण के लिये सांप और नाग की रक्षा जरूरी |सकलडीहा बाजार उत्तरप्रदेश से फ़ोटोग्राफ़र धीरज शाह भी नागपंचमी की कथा सुना रहे हैं। ऐसा क्यों न कुछ कर जायें हम, चले जाने पर बहुत याद आयें हम जैसी बहुत सेन्टीमेन्टल विचारधारा वाली शेली जबलपुर की नागपंचमी के किस्से सुनाती हैं। विवेक रस्तोगी उज्जैन के चंद्रमौलेश्वर मंदिर से जुड़ी यादें साझा कर रहे हैं। अजय सक्सेना इस मौके पर जो कार्टून पेश करते हैं वो बगल में है। इसे देखकर यही लगता है कि कहीं कोई नाग अपनी मानहानि का दावा न पेश कर दे।

कारगिल युद्ध के दस वर्ष हो गये। इस मौके पर तमाम ब्लागर साथियों ने संस्मरणात्मक, वीरतापूर्ण, सावधानीपरक और चेतावनी वाली पोस्टें लिखीं हैं। उनमें से कुछ के लिंक ये हैं:

  1. करगिल विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
  2. कारगिल के शहीदों को प्रणाम ‘ आंसु जो कविता बन गये ‘
  3. स्मृति के झरोखों से: कारगिल विजय दिवस

  4. करगिल विजय दिवस
  5. कागगिल दिवस पर द्रास वॉर मैमोरियल
  6. किया कारगिल वार
  7. कारगिल के १० वर्ष
  8. बोल पाकिस्‍तान तेरे साथ क्‍या सलूक किया जाए
  9. कारगिल विजय अभियान
  10. ‘विजय दिवस’ पर ‘सच का सामना’
  11. हमको तुम पर नाज़ है
  12. मेरे देश से मत लो पंगा
  13. कारगिल शहीदों को नमन
  14. कारगिल युद्ध की विजय की दसवीं वर्षगाँठ पर शहीदों को शत-शत प्रणाम -शरद आलोक
  15. कारगिल शहीद बीरो को सत सत नमन .
  16. क्या उनका कोई अरमान न था
  17. करगिल से मुंबई तक
  18. कारगिल शहीदों, हमें माफ करना
  19. कारगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि, ये मेरे वतन के लोगो जरा याद करो कुर्बानी
  20. कारगिल शहीदों के लिए
  21. ऐ मेरे वतन के लोगों
  22. आर्मी कभी मत ज्वाइन करना
  23. एनडीटीवी पर खास कार्यक्रम, दस साल बाद करगिल में बरखा दत्त और जंग की यादें
  24. जरा आंख में भर लो पानी (विजय दिवस पर विशेष) (व्यंग्य/कार्टून)

बरमूडा त्रिकोण के बारे में न जाने कितने किस्से सुने-सुनाये जाते हैं। वीरूभाई से जानिये दानवी त्रिकोण बरमुडा :मिथ या यथार्थ ?

शमीम मोदी पर प्राण घातक हमला हुआ इसलिये क्योंकि उन्होंने मध्य प्रदेश की पिछली सरकार में मन्त्री रहे जंगल की अवैध कटाई और अवैध खनन से जुड़े माफिया कमल पटेल के कारनामों के खिलाफ़ सड़क से उच्च न्यायालय तक शमीम ने बुलन्द आवाज उठाई ।इस मसले पर पूरी रिपोर्ट पढ़िये अफ़लातूनजी के ब्लाग पर।

आजकल टेलीविजन पर चल रहे चर्चित धारावाहिक सच का सामना के बहाने प्रख्यात उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा के उपन्यास रेखा की नायिका के द्वन्द की पड़ताल करते हुये अर्चना राजहंस लिखती हैं:

जब मैने इस उपन्यास को पढ़ना शुरू किया, ठीक इसी समय स्टार प्लस पर एक प्रोग्राम शुरू हुआ सच का सामना…दोनो की विषयवस्तु एक, समाज का शारीरिक सच…
रेखा और सच का सामना में हिस्सा ले रही प्रतियोगियों की सच्चाई में फर्क सिर्फ इतना कि रेखा में भगवती चरण वर्मा जी ने जब-जब रेखा को शरीर के लिए कमजोर होते हुए दिखाया है…उसके तुरंत बाद रेखा के तर्क रखे हैं…रेखा क्यों बार-बार किसी पुरुष से संबंध बना लेती है, इसका कारण भी बताया जाता है…हालांकि हर दूसरे पल रेखा को लगता है कि वो गलत कर रही है लेकिन हर अगले पल वो वही करती है…हालांकि, सच का सामना के प्रतियोगी जब-जब सच को बयां करते हैं तब-तब वो बड़े भावुक हो जाते हैं…उन्हें पश्चाताप होता है या नहीं ये पता नहीं…लेकिन चेहरे पर ऐसी लकीरें जरूर खिंच जाती है कि जैसे अगर पैसे का मोह न हो तो वो कभी इस सच को बयां करे ही नहीं…अमूमन समाज में ऐसे सच को बयां करता भी कौन है???
वैसे जीवन की कईएक ऐसी सच्चाई होती है जिसे हम कभी बयां नहीं करना चाहतें…और करते भी नहीं हैं.

इस मसले पर उठे हल्ले पर अपनी राय व्यक्त करते हुये अर्चना कहती हैं:

पश्चिम की नकल बताई जा रही इस धारावाहिक को बंद करने की मांग उठ रही है…संभव है कि इस प्रोग्राम का पर्दा गिर जाए…अगर ऐसा हुआ तो ये ठीक वैसे ही होगा जैसे कूड़े को बुहार कर दरी के नीचे छिपा देना…

सच का सामना के बारे में दीपक कुमार भानरे का कहना है- ऐसा सच सामने लाया जाए जो देश और समाज हित मैं हो !

सूर्य ग्रहण को आलोक पुराणिक अगड़म-बंगड़म अंदाज में देखते हैं:

आम तौर पर दूसरे की छत पर तांका झांकी पर प्रतिबंध होता है। पर सूर्यग्रहण के टाइम ऐसी ताका झांकी अलाऊ हो जाती है। और कई बालकों का इस चक्कर में भला हो जाता है। ऐसे बालक भी यही प्रार्थना करते हैं कि सूर्यग्रहण जल्दी से जल्दी आया करे।

समीरलाल आज हाय-हाय कर रहे हैं और नारी शक्ति के सामने माफ़ीनामा पेश कर रहे हैं। बहर है -फालुन फालुन फालुन फालुन!

विवेक आज जनसंख्या कम करने के तरीके बता रहे हैं। आजमाइये!

अजित वडनेरकर आपके सामने पेश कर रहे हैं बालकवि बैरागी जी की कहानी- विकल्प!

नक्सली समस्या के बारे में कनक तिवारी मुख्यमंत्री को एक खुला खत लिख रहे हैं। पत्र लंबा है और सुझाव क्रांतिकारी।

आने वाले समय के बारे में तमाम भविष्यवाणियां की जा रही हैं। डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल भी अपनी धारणा व्यक्त करते हैं-आने वाला समय मुफ़्त का है

आप काफ़ी कुछ लिखना चाह्ते होंगे और लिख नहीं पाते होंगे इससे परेशान होते होंगे। इस परेशानी से बचने के लिये शायद आपकी कुछ मदद कर सकें –न लिखने के खूबसूरत बहाने !

और अंत में

फ़िलहाल इतना ही। आपका नया सप्ताह शुभ हो। मस्त-टिचन्न!

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18 Responses to कारगिल,नागपंचमी और सच का सामना

  1. नागपंचमी का पुण्य है नागों को – कल एक करियवा निकला। भरतलाल ने उसे मारा नहीं। बोलता रहा – बेबी दीदी, तू कह त मारी, नाहिंत पाप न लेब!

  2. Nirmla Kapila कहते हैं:

    बहुत बडिया पोस्ट खास कर रश्मि बिटिया से परिचय आपका बहुत बहुत आभार्

  3. Pankaj Mishra कहते हैं:

    रश्मि जी के बारे में जानकर अच्छा लगा और आपके चर्चा के माध्यम से कई लिंक मिला पढ़ने कोआभार .

  4. ताऊ रामपुरिया कहते हैं:

    बहुत खूबसूरत चर्चा. आज चिठ्ठाचर्चा की फ़ी्ड आई है और रुकी हुई पुरानी पोस्टों की भी एक साथ आई. लगता है आपने नागपंचमी की पूजा करवा दी है?:)रामराम,

  5. बहुत ही उम्दा चर्चा!!! रश्मि के बारे में जानकर अत्यन्त प्रसन्नता हुई।

  6. cmpershad कहते हैं:

    रस्मी को भविष्य के लिए बहुत सारी शुभकामनाएं। साथ ही यह सुझाब कि ब्लाग के चक्कर में कम्प्यूटर पर सारा समय न बिताएं। वर्ना कंप्यूटर अडिक्ट होने का खतरा रहना ही।

  7. Udan Tashtari कहते हैं:

    रश्मि को बधाई एवं शुभकामनाऐं.अच्छी चर्चा.

  8. हिमांशु । Himanshu कहते हैं:

    रश्मि स्वरूप के संबंध में जानकर अच्छा लगा । उन्हें शुभकामनायें । बहुत से संदर्भ एक साथ समा गये इस चर्चा में । धीरज के ब्लॉग का जिक्र देखकर खुशी हुई ।

  9. नन्हीँ लेखिका कहते हैं:

    बहुत बहुत धन्यवाद् सर, इतने सारे आशीर्वाद पाकर मै तो फूली नहीं समा रही.और हाँ, चिंता मत कीजिये, मै इन्टरनेट एडिक्ट नहीं होने वाली, 🙂

  10. Dhiraj Shah कहते हैं:

    अनुप जी इक नन्ही ब्लोगर रश्मि जी से परिचय करने के लिये धन्यवाद ।चिट्ठा चर्चा मे शामिल करने के लिये धन्यवाद ।

  11. लड़की हो चाहे छोटी सीपर इरादे हैं बड़ेइन इरादों में अनेकनेक कार्य हैं जुड़े

  12. डॉ. मनोज मिश्र कहते हैं:

    रश्मि जी के बारे में जानकर प्रसन्नता हुई। उम्दा चर्चा…

  13. गौतम राजरिशी कहते हैं:

    कारगिल संबधित पोस्टों की लिंक इकट्ठा देकर अहसान किया है देव…सचमुच…

  14. बी एस पाबला कहते हैं:

    नन्हीं लेखिका रश्मि स्वरूप से परिचय करवाने हेतू आभारऔरगुस्ताखी माफ,कनक तिवारी, देश के एक जाने माने पुरूष एडवोकेट हैं।

  15. अनूप शुक्ल कहते हैं:

    पाबलाजी शुक्रिया! गलती सुधार ली।

  16. Arvind Mishra कहते हैं:

    समग्र चर्चा -और एक मेधावी से मुलाकात भी !

  17. रश्मि को बधाई एवं शुभकामनाऐं.Aasha karta hoon ki ve Desh ka Naam Roshan Karnegi

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