Monthly Archives: जून 2009

पिताओं के दिन भी बहुरे

कल पितृ दिवस पर था। पिताओं के दिन भी बहुरे। ढेर पोस्टें पिता लोगों के उप्पर लिख दी गयीं। आदित्य ने तो अपने पिता से गाना भी गवा लिया- तुझे सूरज कहूं या चन्दा। हिन्दयुग्म ने इस मौके पर कविता-आयोजन … पढना जारी रखे

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कितने मौसम गुज़र गये बारीश के,तुम्हारे बीना..

गुजराती भाषी कविगण यदि कविता हिन्दी में लिखेंगे तो क्या होगा? बारीश आएगी, और वे अकेले भीग लेंगे. भाई लोग (और बहना,), भाषा, व्याकरण और वर्तनी को मारो गोली – उसे साहित्य की किताबों में दर्ज रहने दो – ब्लॉग … पढना जारी रखे

रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | 11 टिप्पणियाँ

मरने की दुवायें क्यूं मांगू, जीने की तमन्ना कौन करे: संगीत चिट्ठाचर्चा

आज सबसे पहले तो सरोद के महान साधक उस्ताद अली अकबर खाँ साहब के निधन पर हार्दिक श्रद्धान्जली। ऐसे महान कलाकार के जाने के बाद सरोद वादन के क्षेत्र में एक शून्यता व्याप सी गई है। कबाड़खाना पर संजय पटेल, … पढना जारी रखे

सागर चन्द नाहर, Sagar Chand Nahar में प्रकाशित किया गया | 12 टिप्पणियाँ

ब्लॉगिंग बच्चों का खेल नहीं जानी : इक आग का दरिया है और डूब के जाना है

ब्लॉगिंग का माया को समझने की कोशिश में आने वाली पोस्टें एक फैशन का रूप लेती जा रही हैं ! हर नया पुराना ब्लॉगर कुछ दिन अपने को ब्लॉगिंग में खपाकर , झोंककर इस मकडजाल में उलझकर इसकी विवेचना करने … पढना जारी रखे

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कुश की टिप्पणी और हमारी प्रतिटिप्पणी

कल की चर्चा में कुश की पोस्ट के संदर्भ में मेरी टिप्प्णी थी: कुश सुमन्तजी की टिप्पणी सटीक लगी इसीलिये इसे यहां पोस्ट करना जरूरी लगा। ड्रामेबाजी शब्द कुछ ज्यादा कड़ा और गैरजरूरी लगा था मुझे इसीलिये फ़िर उसको स्पष्ट … पढना जारी रखे

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सुन बे गुलाब …सरकार की भाषाई अक्षमता

क्रिकेट विश्वकप में भारतीय टीम हार गई. अब हार गई तो हार गई. खेलने गए हैं तो कोई ज़रूरी तो नहीं कि जीतेंगे ही. दो खेलेंगे तो एक हारेगा ही. ट्वेंटी-ट्वेंटी के खेल में मैच ड्रा नहीं हो पाता. ड्रा … पढना जारी रखे

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हिंदी का गोर्की, निरापद लेखन और टिप्पणी/प्रतिटिप्पणी

उदय प्रकाशजी दो महीने पहले हिंदी कथा साहित्य के महान कथाकार जैनेंद्र जी का घर देखने गये। वहां जाने और घर खोजने की तथा इस दौरान अपने मन के भाव उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखे हैं। घर के आसपास उनके … पढना जारी रखे

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