नहीं रही इकबाल बा्नो: साप्ताहिक संगीत चिट्ठाचर्चा

नमस्कार, एक बार फिर हाजिर हूं, गीत संगीत के चिट्ठों पर पोस्ट हुए गीतों या उनकी चर्चा की जानकारी लेकर। पिछले हफ्ते हिन्दी चिट्ठों (संगीत के चिट्ठे) पर गज़लों का बोलबाला रहा। 

सबसे पहले हम बात करेंगे मशहूर गायिका इकबाल बानो  की जिनका पिछले दिनों (21 अप्रेल को) इंतकाल हो गया था। कबाड़खाना पर  अशोक पाण्डे जी उनको श्रद्धान्जली देते हुए अपने लेख में मिर्जा गालिब की मशहूर गज़ल

मुद्दत हुई है यार को मेहमां किये हुए
जोश-ए-कदः से बज़्म चराग़ां किये हुए

जिसे  स्व. इकबाल बानो ने स्वर दिया है; को पोस्ट की है । इसके बाद अशोक भाई  दूसरी पोस्ट सब ताज उछाले जाएंगे, सब तख्त गिराए जाएंगे

में एक और एक्स्क्लुसिव रचना हम देखेंगे… सुनवा रहे हैं।

महेन भाई भी अपने ब्लॉग प्रत्येक वाणी में महाकाव्य में बानो को श्रद्धान्जली देते हुए  मिर्जा गालिब की एक और दूसरी गज़ल दिया है दिल अगर उसको बसर है क्या कहिए सुनवा रहे हैं। इन लाईनों को देखिये

दिया है दिल अगर उस को, बशर है क्या कहिये
हुआ रक़ीब तो हो, नामाबर है क्या कहिये
ये ज़िद, कि आज न आवे और आये बिन न रहे
क़ज़ा से शिकवा हमें किस क़दर है क्या कहिये

इतनी उम्दा रचना और इकबाल बानो की आवाज हो तो… सुनने में एक अलग सा सूकुन मिलता है, वर्णन कर पाना मुमकिन नहीं है, ये तो गूंगे के गुड़ के समान है, बस चख ( सुन) कर ही आनन्द का अनुभव किया जा सकता है।

कबाड़खाने पर ही अशोक भाई अपनी एक और पोस्ट में एक गुमनाम अभिनेत्री गुलाब बाई जो एक जमाने में मशहूर नौटंकी कलाकार एवं गायिका थी के बारे में बता रहे हैं, सचमुच अशोक भाई हमने भी आज तक ना तो गुलाब बाई का नाम सुना था ना उनकी आवाज सुनी थी, आपने हमें अनमोल हस्ती के बारे में बताया सुनवाया बहुत बहुत आभार।अशोक भाई अपनी इस पोस्ट में कह रहे हैं कि

… ख़ैर छोड़िये, इन तफ़सीलात के बारे में जानना हो तो किताब खोज कर पढ़ें. मैं कोशिश में हूं कि किसी तरह इस किताब के अनुवाद के अधिकार हासिल कर लूं और जल्द से जल्द हिन्दी के पाठकों के सम्मुख इसे रख सकूं. यह मास्टर फ़िदा हुसैन नरसी के लिए मेरी व्यक्तिगत श्रद्धांजलि भी होगी और गुलाब बाई के जीवन वृत्त के माध्यम से लोग क्रूरतापूर्वक बिसरा दी गई एक विधा का इतिहास हिन्दी में पढ़ सकेंगे.

आमीन!

हम दुआ करते हैं अशोक भाई की आपको इस पुस्तक को अनुवाद करने के अधिकार मिलें और हम सब गुलाब बाई के बारे में और ज्यादा जान सकें।

अब  आगे  बढ़ते हुए सबसे पहले  चर्चा करते हैं मशहूर संगीतकार जोड़ी शंकर जयकिशन के शंकर यानि स्व. शंकर राम सिंह रघुवंशी को उनकी बाईसवीं पुण्य तिथी पर श्रद्धान्जली देते हुए  पर एक लेख  अभागे शंकर लिखा है दिलीप कवठेकर जी ने ।  इस लेख में दिलीप जी ने लिखा है कि स्व. शंकर जी केवल अच्छे संगीतकार ही नहीं वरन अच्छे गायक भी थे, आईये उनके ही शब्दों में पढ़ते हैं।

बस एक मोड पर यूं हुआ कि शंकर जी ने शोभाजी को एक जगह मुरकी लेने को कहा, मगर किसे भी तरह उनसे वह मुरकी गले से नही उतरी.अंत में फ़ेस सेविंग के लिये शोभा जी नें कहा-शंकरजी, ये मुरकी तो गले में से निकलना संभव ही नही है, वरना मैं तो गा ही देती.
शंकर जी हंसे, हारमोनियम पकडा ,आंखें बंद की और त्वरित ही खुद गाकर वह मुरकी पेश की !!
मान गये शंकर जी… शोभा जी के हाथ खुद ब खुद जुड गये उस महान संगीतकार के वंदन में जो स्वयम एक महान गायक भी था!!

पिछले हफ्ते एक बड़ी ही मजेदार बात हुई मीत ने और मैने ( महफिल पर) एक साथ एक दिन एक ही गीत अपने अपने ब्लॉग पर पोस्ट किया, वह गीत है  रफी साहब का गाई हुई गैर फिल्मी गज़ल उठा सुराही…. रफी साहब की यह गज़ल सुनने के अलावा बढ़िया अशआर  पढ़ने  की इच्छा हो तो मीत के चिट्ठे पर इस पोस्ट मय नहीं है तो निगाहों से काम ले साकी  को जरूर पढ़िये।

पारुल आज अपने चिट्ठे पर  जगजीत सिंह की एक शानदार गज़ल सुनवा रही हैं  खुद को मैं ना बाँट ना लूं दामन दामन  कर दिया अगर मुझको मेरे हवाले।

हिन्द युग्म पर इस सप्ताह गीता दत्त छाई रहीं, पराग सांकला ने अपने एक लम्बे लेख में स्व. गीता दत्त को श्रद्धान्जली देते हुए  कई दुर्लभ गीत इस पोस्ट असली गीता दत्त की खोज में;  में सुनवाये, जो हम सबके लिये आज तक लगभग  अनसुने-अन्जाने ही थे।

 यहाँ बताना चाहूंगा कि राजस्थान के पराग सांकला गीता दत्त के बहुत बड़े प्रशंसक- भक्त हैं और गीता दत्त पर एक साईट  गीतादत्त.कॉम  पराग ने बनाई है। जिस पर स्व. गीता जी के बारे में बहुत सी जानकारी पाई जा सकती है।

इस पोस्ट के अलावा ओल्ड इज गोल्ड श्रंखला में भी गीतादत्त का ही गाया हुआ गीत  मेरा सुन्दर सपना बीत गया सुनवाया गया।
 
आगाज पर अफलातून जी सुनवा रहे हैं आंधी फिल्म का मशहूर गीत ये पाँच सालों का देने हिसाब आये हैं

मनीष भाई बता रहे हैं राँची की एक शाम पीनाज मसानी के नाम.. के बारे में और उनकी गाई गज़ल कहाँ थे रात को हमसे ज़रा निगाह मिले सुनवाई।

महफिल पर पिछले दिनों तीन प्रविष्टियां आई.. वे निम्न हैं

अब इजाजत दीजिये अगले महीने के पहले शनिवार को फिर मुलाकात होगी तब तक के लिये राम.. राम।

इकबाल बानो और गुलाब बाई के फोटो “कबाड़खाने” से साभार

About bhaikush

attractive,having a good smile
यह प्रविष्टि सागर चन्द नाहर, Sagar Chand Nahar में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

8 Responses to नहीं रही इकबाल बा्नो: साप्ताहिक संगीत चिट्ठाचर्चा

  1. हिमांशु । Himanshu कहते हैं:

    सुन्दर संगीतमय चर्चा । धन्यवाद ।

  2. cmpershad कहते हैं:

    संगीत की दुनिया की विस्तृत जानकारी मिली इस चर्चा में। इकबाल बानो की गाई प्रसिद्ध गज़ल ‘दिल तोड़नेवाले देखता चल, हम भी तो खडे हैं राहों में’ यकायक स्मरण हो आई। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे॥

  3. Udan Tashtari कहते हैं:

    बढ़िया संगीतमयी चिट्ठों की चर्चा

  4. इकबाल बानो के चले जाने का वाकई दुःख है. गुलाब बाई की जानकारी के लिया धन्यवाद.

  5. सागर भाई, गीत सुनाने का यह कारनामा हम भी कर लेते हैं। इस बीच सहगल साहब का एक मधुर गीत मौके से हमने भी जनतंतरकथा में पोस्ट किया। जो आज के हालात पर बहुत मौजूं है।

  6. Arvind Mishra कहते हैं:

    वाह ये संगीत भी कैसा जादू है ! इस चर्चा के लिए बहुत आभार !

  7. अनूप शुक्ल कहते हैं:

    सुन्दर चर्चा। आशा है कि अशोक भाई को गुलाब बाई के बारे में किताब लिखने के अधिकार मिल जायेंगे।

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