आज की बच्चा, बुजुर्ग और जवान चर्चा

चवन्नी चैप बता रहे हैं कि अनुराधा नामक साइकिल सवार ने पहली फ़िल्म ८ साल की उम्र में देखी थी। माया मेमसाब ने मुलायम भाईसा की शिकायत लगाई है। इस बीच दूसरी पृथ्वी की खोज जारी है।

हँसगुल्ले

मैं भी कल छोले भटूरे खा के आया था लेकिन कलकत्ता से नहीं।

एक छुटंकी अपनी गाड़ी की सर्विस कराने की सोच रही हैं।

सोने के भाव – १९२५ से २००९ तक – है दिलचस्प। लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा की परिभाषा क्या हो?

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग बच्चों को सिखाने के लिए कुछ नुस्खे

दो सौ कदम की दूरी कम हुई कि बढ़ी? आगे पढ़ें। नहीं तो वो के बारे में जानें।

विष्णु बैरागी जी ने अपने चैंकने का कारण बताया है –

बचपन को जल्दी से जल्दी

बड़ा करने की होड़ में हैं।

उसे एक चूहा दौड़ में

शामिल कर देने की तेज होती दौड़ में हैं।

राजस्थानी में एक कहावत की व्याख्या

वो न पसंद आए तो बुंदेली पढ़ लेओ।

आजकल बच्चों ने छद्म लेखन बहुत शुरू कर दिया है। उदाहरण के लिए यह आदित्य महोदय।

और ये भाई बहन

और ये बोतल की लती

झारखंड में पहला ब्लागर मीट हुआ, पर शाकाहारी क्या करेंगे?

और कुछ बुजुर्गों की भी बात हो जाए, जिन्हें २० किलोमीटर चल कर भी थकान नहीं होती थी, और बेटी को दहेज में चरखा देते थे।

चरैवेति, चरैवेति।

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attractive,having a good smile
यह प्रविष्टि आलोक में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

15 Responses to आज की बच्चा, बुजुर्ग और जवान चर्चा

  1. अनिल कान्त : कहते हैं:

    बहुत अच्छी लगी चिटठा चर्चा …..लेकिन थोडी छोटी रही लेकिन फिर भी काम के लिंक मिल गये

  2. परमजीत बाली कहते हैं:

    क्या बात है आज बहुत छॊटी चर्चा ……? लेकिन अच्छी है।

  3. Shastri कहते हैं:

    चर्चा लघु है, लेकिन मुझे खुशी है कि आप नियमित रूप से हमें कुछ न कुछ मानसिक भोजन पहुंचा देते है. ईश्वर आपकी कलम को शतायु करें.कल की चर्चा भी अभी देख पाया हूँ. प्रत्युत्तर का प्रत-प्रत्युत्तर उस के अंत में देख लें.सस्नेह — शास्त्री

  4. Udan Tashtari कहते हैं:

    आज की कारस्तानी–और फिर नौ दो ग्यारह..फिर भी मजेदार. 🙂

  5. Ratan Singh Shekhawat कहते हैं:

    छोटी ही सही लेकिन शानदार रही चर्चा !

  6. आलोक सिंह कहते हैं:

    प्रणाम चिट्ठा-चर्चा थोडी छोटी है पर अच्छी है .गागर में सागर प्रस्तुत किया है आपने .धन्याद

  7. सैयद कहते हैं:

    झारखंड में पहला ब्लागर मीट हुआ, पर शाकाहारी क्या करेंगे?बहुत खूब !!

  8. विविधता बढ़ती जा रही है पोस्टोँ में और चर्चा में भीं।

  9. सैयद कहते हैं:

    एक निवेदन है कि कृपया आप लिंक्स को न्यू विण्डो में ओपन करने का कोड लगाये. हमें जरा सहूलियत हो जायेगी. अब क्या होता है कि जैसे ही किसी लिंक पर क्लिक करते है वो इसी पेज पर ओपन होता है. इससे हम आपके पेज से दूर हो जाते है.

  10. हिमांशु कहते हैं:

    सुन्दर चिट्ठाचर्चा. संक्षिप्तता यदि सारगर्भित हो तो ठीक. यहां संक्षिप्त ही पर बहुत पाया.नयी विण्डो में खुलने का विकल्प तो होना ही चाहिये.

  11. रंजन कहते हैं:

    छो्टी सी.. प्यारी चर्चा.. आदि को चर्चा में स्थान देने के लिये आभार..

  12. विवेक सिंह कहते हैं:

    प्याली प्याली छुन्दर छुन्दर चल्चा पलवाने का छुकलिया 🙂

  13. जमाए रहिए जी। लिंक वाली बात मान ली जाय।

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