बीता हुआ कोई क्षण नहीं लौटता

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26 Responses to बीता हुआ कोई क्षण नहीं लौटता

  1. हिमांशु कहते हैं:

    अनेक फ़लक समाहित करती हुई चर्चा. बहुत कुछ नया जान पाते है हम.धन्यवाद.

  2. अनूप शुक्ल कहते हैं:

    बेहतरीन, व्यापक , बहुआयामी चर्चा। दो साल पहले की गयी चर्चा की चर्चा देखकर बहुत अच्छा लगा। तमाम बातें याद आ गयीं। उन दिनों नारद अकेला संकलक था और अतुल हमारे सबसे लोकप्रिय चर्चाकार। शैलबालाजी के और अनुराग अन्वेषी के बारे में परिचय कराने का आभार!अनुराग की मां के बारे में लिखी पो्स्टें अभी पढ़नी हैं। लेकिन सोचिये कि अगर ब्लाग जैसा सहज सुलभ माध्यम नहीं होता तो क्या हम अनुराग की अपनी मां के बारे में लिखीं पोस्टों तक पहुंच पाते। यहीं राजेन्द्र यादव जैसे अनुभवी लेकिन पूर्वाग्रही महारथी गलत साबित होते हैं कि ब्लाग पर जो है सब कूड़ा है और मन की भड़ास है।आपकी पुस्तक के विमोचन के लिये अभी से बधाई। “समाज-भाषाविज्ञान : रंग- शब्दावली : निराला- काव्य” शायद एकदम नया विषय है। पुस्तक का इंतजार रहेगा।

  3. Arvind Mishra कहते हैं:

    पुस्तक के विमोचन की अग्रिम बधाई ! बनारस में होता तो शामिल हो लेते !

  4. seema gupta कहते हैं:

    “चर्चा को चर्चा ही रहने दो कोई नाम न दो बहुत सटिक…… आपको अपनी पुस्तक “समाज-भाषाविज्ञान : रंग- शब्दावली : निराला- काव्य” के विमोचन पर ढेर सारी शुभकामनाये ….”Regards

  5. विश्व भ्रमण कराती आपकी चिठ्ठा चर्चा एक अलग रंग देती जा रही है इस मंच को। बधाई। इलाहाबाद पधारिए। हम आपके स्वागत को उत्सुक हैं।:।

  6. डा० अमर कुमार कहते हैं:

    आज भान होरहा है…. ” हम बालक नादाँ “शो, मँई कूश्श नेईं बोलेंगा, हम बोलेगा तो, बोलोगे कि बोलता है ।चर्चा को चर्चा ही रहने दो, अख़ाड़ा न बनाओ !

  7. अल्पना वर्मा कहते हैं:

    बहुत ही व्यापक और रोचक चर्चा. सभी पक्षों का ध्यान रखा गया है.ग्लोबल चर्चा जैसी रही .बधाई.

  8. Udan Tashtari कहते हैं:

    कब इलाहाबाद जाना है-जबलपुर रास्ते में ही है. नहीं रुक पायें तो स्टेशन पर मुलाकात हो जाये. खबर करिये.चर्चा बेहतरीन है.

  9. विनय कहते हैं:

    ज़ोरदार चर्चा—आपका हार्दिक स्वागत हैचाँद, बादल और शाम

  10. डॉ .अनुराग कहते हैं:

    प्रियदर्शन जी के लेख को यहाँ देखकर खुशी हुई…..कविता जी शायद चिटठा चर्चा की गरिमा को एक नए आयाम देती है..वैसे भी मेरा मानना है की एक खूब पढ़ा पाठक किसी लेखक जैसा ही होता है…..या उससे ही थोड़ा इतर …कई बार मेरे मन में भी ये प्रशन आता है की हमारे यहाँ कुछ पोस्ट की उम्र महज़ २४ घंटे ही होती है ….ओर मै कई बार सोचता हूँ की काश इस महीने की कुछ बेहतरीन पोस्ट एक जगह इकट्ठी कर पाता …कल कुश से इसी विषय पर बात हुई थी की क्यों ना एक ऐसा ब्लॉग बनाया जाए जहाँ बेहतरीन पोस्ट का संग्रह हो…..किसी भी लेखक की ….लेकिन सवाल फ़िर वहां निजी पसंद का आ जाता है ….कई बार नेट इस्तेमाल करने वाले भी ब्लॉग कैसे पढ़े ये प्रशन पूछते है….जाहिर है पत्रकार या दूसरे माध्यम अखबार में किसी चिट्ठाकार का चर्चा तो कर देते है पर अग्ग्रीगेटर का प्रसार नही करते …..जिसकी ज्यादा आवश्यकता है….वैसे डॉ अमर कुमार ने एक विधि सुझाई थी..चिटठा चर्चा को वर्गीकृत करने के लिए ..एक बार कुश ने उस पर चर्चा भी की थी….

  11. डॉ .अनुराग कहते हैं:

    ओर दूसरी बात .शब्दों के चित्तेरे राजेन्द्र यादव असल में मानस के तौर पे कैसे है.ये इस माह का कथादेश पढ़कर आप समझ जायेंगे ..

  12. अभिषेक ओझा कहते हैं:

    अच्छी चर्चा. पुस्तक विमोचन की बधाई ! आपकी यात्रा शुभ हो.

  13. सभी ब्लॉगर साथियों की शुभकामनाओं व प्रतिक्रियाओं के प्रति कृतज्ञ हूँ. समीर जी, मेरा आईडी है – kavita.vachaknavee@gmail.comआप मुझे अपना फोन नं भेजें ताकि कार्यक्रम संपर्क किया जा सके. मेरा नं आपके पास होगा ही.

  14. Shiv Kumar Mishra कहते हैं:

    शानदार चर्चा. विस्तृत चर्चा. दो साल पहले की चर्चा भी पढ़ी. लेकिन एक बात है. कभी-कभी लगता है दो साल में ज्यादा कुछ नहीं बदला. मसले वही हैं जो सौ-पचास चिट्ठों के समय थे. दो साल का समय छोटा होता है शायद. सचमुच ऐसा है क्या?आपकी पुस्तक के विमोचन के लिए हमारी शुभकानाएं और बधाई.

  15. यहां मां के ब्लॉग की चर्चा देखकर वाकई बेहद खुशी हुई। कविता वाचक्नवी का हार्दिक आभार। कृपया शैलबाला की जगह सुधार कर शैलप्रिया कर दें। एक बार फिर आभार…-अनुराग अन्वेषी

  16. ऋषभ कहते हैं:

    इस बार की चर्चा में सबसे महत्त्व पूर्ण रहा शैलप्रिया जी का प्रसंग.ऐसे प्रसंग चर्चा को संग्रहणीय बना देते हैं. आपकी नई पुस्तक के प्रकाशन और लोकार्पण पर हार्दिक बधाई !अभिनन्दन!!

  17. कार्तिकेय कहते हैं:

    सुंदर चर्चा. आज के दिन की चर्चा का इंतज़ार रहता है. भाषाई दीवारों के पार भी बहुत कुछ है जो एक संवेदनशील मानस की बाट जोहता है.

  18. उन्मुक्त कहते हैं:

    पुस्तक विमोचन की बधाई।

  19. Gyan Dutt Pandey कहते हैं:

    बहुत विविधता है चर्चा में। प्रभावी।

  20. Dr. Vijay Tiwari "Kislay" कहते हैं:

    चर्चा पढ़ी. आनंद आया.-विजय

  21. कविता जी,चिठ्ठा चर्चा का एक नया आयाम आज ही देख पाई हूँ – बहुत अच्छा लगा देख कर गुजराती मेँ कविता देखकर और हाँ, समझ भी गई:)-लावण्या

  22. परमजीत बाली कहते हैं:

    बहुत अलग हट कर बहुत बढिया चर्चा करने के लिए बधाई।।

  23. Udan Tashtari कहते हैं:

    अनुपम चर्चा- हर बार एक नया आयाम और एक नया सा रंग.बहुत बधाई.

  24. Udan Tashtari कहते हैं:

    पुरानी ही चर्चा फिर आन पड़ी एक नये प्रभाव के साथ अतएव उपरोक्त टिप्पणी.

  25. alka sarwat कहते हैं:

    behtar agle lekh par lambee charcha hogi

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