Monthly Archives: दिसम्बर 2008

चोट तो फ़ूल से भी लगती है, सिर्फ़ पत्थर कड़े नहीं होते

हिंदी ब्लाग जगत के आदि चिट्ठाकार के रूप में (?) ख्यात आलोक कुमार ने हमारे अनुरोध को स्वीकार करते हुये खिचड़ी-चर्चा पेश की। आर्यपुत्र शब्द पर कविताजी ने मौज लेते हुये टिपियाया- पहले यह बताया जाए कि फुरसतिया ने आपको … पढना जारी रखे

अनूप शुक्ल, २१/१२/०८ में प्रकाशित किया गया | 25 टिप्पणियां

आज की चिट्ठा खिचड़ी

फुरसतिया देव ने कल आह्वान किया, “आर्यपुत्र! तुम चिट्ठाचर्चा क्यों नहीं करते? कब तक हमीं कलम घिसते रहेंगे? आखिर हमें भी कुछ और काम होते हैं!” आर्यपुत्र जी अपनी जिम्मेदारी स्वीकारते हुए शुक्रवार की रात ऐसे सोए कि शनिवार – … पढना जारी रखे

आलोक, २०.१२.२००८ में प्रकाशित किया गया | 23 टिप्पणियां

रोटी पानी की जद्दोजहद में जुग़ाड़ की ज़िन्दगी

चिट्ठाचर्चा पर अपने मिजाज़ का रंग न आए यह कैसे सम्भव है भला , जब मनोविज्ञान कह चुका और रस-सिद्धांत ने उसे साहित्य पर लागू भी करके सिद्ध कर दिया कि व्यक्ति अपने अपने मूड के शेडस को ही बाहरी … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 17 टिप्पणियां

आप कौन हैं? इंडियन या भारतीय?

आप कौन हैं? इंडियन या भारतीय?धीरू सिंह जी ने अपनी पोस्ट में ये सवाल उठाया है. बता रहे थे कि हम पहले भारतीय थे लेकिन अंग्रेजों ने हमारी पहचान बदल दी. हमें भारतीय से इंडियन बना दिया. अंग्रेज़ बदलाव में … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 24 टिप्पणियां

चर्चा-ऐ-चिट्ठा

सबसे पहले आप लोग सोच रहे होंगे की एक ही दिन में ये दूसरी चर्चा क्यो?? दरअसल मैने शिव कुमार मिश्रा जी को सुबह उनके मोबाइल पर एस एम एस भेज दिया था की आज चर्चा मैं करूँगा.. परंतु वे … पढना जारी रखे

कुश में प्रकाशित किया गया | 36 टिप्पणियां

वर चाहिए जो ”सुंदर, सुशील, और गृहकार्य में दक्ष हो

नये चिट्ठाकार BLUCK TIGER :देवेन्द्र प्रकाश मिश्र Life through my eyes… : शीना जयहिन्द लगे रहो कोशी कथा विवेक कुमार के माध्यम से महाशक्ति :ये भी नये हैं का? गुपचुप: रोशनाई की ज़िन्दगी ‘Live’ (जीने का फ़लसफा) हिन्दी त्रैमासिक पत्रिका: … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 23 टिप्पणियां

रोटी बनाम भाषा

अगर आप हिन्दी ब्लॉगर हैं और अब तक चने के पेड पर चढे हुए हैं तो तुरंत नीचे आजाएं ….।नीचे आगए ? अब यह पढें …”मैंने इससे कहा कि भाई, मेरी ब्लॉग पढ़। बोला कि ये ब्लॉग कौन सा “लोग” … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, विवेक सिंह में प्रकाशित किया गया | 43 टिप्पणियां

यूं ही कोई कैमरा फोटॊ खराब नहीं खीचता

वैसे तो हमने सुबह चर्चा कर दी और कल का मामला बजरंगबली भक्त विवेक सिंह संभालेंगे लेकिन अभी सोचा कि सुबह की चर्चा पर कुछ चर्चा कड्डाली जाये। तो हुआ भैया ये कि सुबह जब चर्चा पोस्ट करी तो मार … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 19 टिप्पणियां

आओ जल्दी करो आगे बढ़ते चलो

नये चिट्ठाकारों में एक विजय कुमार की इस कविता पंक्ति के साथ आज की चर्चा की शुरुआत करते हैं: आओ जल्दी करो आगे बढ़ते चलो !छोड़कर वक्त आगे निकल जाएगा !! नये चिट्ठाकार कुछ खट्टी कुछ मीठी :कहानी अमित की … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 31 टिप्पणियां

घर भेजते रहना पिछवाडे वाले हरसिंगार जितनी हंसी

बचपन में सुनते थे- रामचन्द्र कह गये सिया से , ऐसा कलयुग आयेगा,हंस चुनेगा दाना जूठा, कौवा मोती खायेगा। नये चिट्ठाकार मेरी कलम, मेरे जज़्बात.:ढिंचक-ढिंचक ब्लाग एक शहर है दो ब्लागर myshots प्रवीन शाह का ब्लाग SmaLL DreamS iN big … पढना जारी रखे

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