Monthly Archives: दिसम्बर 2008

बिंदी के तो हिलने का इंतजार और बोरियत

सुबह-सबेरे जब चर्चा के वास्ते बैठे तो सबसे पहले जो पोस्ट दिखी उसमें कुछ ऊब-चूभ की बातें की गयीं थीं। वर्तमान पीढ़ी और ऊब में ज्ञानी लेखक ने ये बताया ही नहीं कि वर्तमान पीढ़ी में किस उमर तक के … पढना जारी रखे

अनूप शुक्ल, २४/१२/०८ में प्रकाशित किया गया | 22 टिप्पणियाँ

आप बिलागिंग क्यों करते हैं ?

अगर आपको पता चले कि साहित्य का अगला नोबेल पुरस्कार आपके बगल वाले ब्लॉगर को मिलने वाला है तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी ? आप शायद तुरंत कोई प्रतिक्रिया देने की स्थिति में न रहें क्योंकि आप तो शॉक्ड रह … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 32 टिप्पणियाँ

आपको कंडोन नहीं कंडेम बोलना था

२००८ २००८ वर्ष २००८ ईस्वी सन् की अपनी अन्तिम चर्चा करते हुए भोर के ४ बजे मुझे इस कल्पना से अत्यन्त हर्ष हो रहा है कि चिट्ठाचर्चा के लिए इस वर्ष का यह अन्तिम पखवाड़ा बहुत महत्वपूर्ण रहा है। क्य़ों … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, हिन्दी, Blogger, hindiblogs, Kavita Vachaknavee में प्रकाशित किया गया | 23 टिप्पणियाँ

चोट तो फ़ूल से भी लगती है, सिर्फ़ पत्थर कड़े नहीं होते

हिंदी ब्लाग जगत के आदि चिट्ठाकार के रूप में (?) ख्यात आलोक कुमार ने हमारे अनुरोध को स्वीकार करते हुये खिचड़ी-चर्चा पेश की। आर्यपुत्र शब्द पर कविताजी ने मौज लेते हुये टिपियाया- पहले यह बताया जाए कि फुरसतिया ने आपको … पढना जारी रखे

अनूप शुक्ल, २१/१२/०८ में प्रकाशित किया गया | 25 टिप्पणियाँ

आज की चिट्ठा खिचड़ी

फुरसतिया देव ने कल आह्वान किया, “आर्यपुत्र! तुम चिट्ठाचर्चा क्यों नहीं करते? कब तक हमीं कलम घिसते रहेंगे? आखिर हमें भी कुछ और काम होते हैं!” आर्यपुत्र जी अपनी जिम्मेदारी स्वीकारते हुए शुक्रवार की रात ऐसे सोए कि शनिवार – … पढना जारी रखे

आलोक, २०.१२.२००८ में प्रकाशित किया गया | 23 टिप्पणियाँ

रोटी पानी की जद्दोजहद में जुग़ाड़ की ज़िन्दगी

चिट्ठाचर्चा पर अपने मिजाज़ का रंग न आए यह कैसे सम्भव है भला , जब मनोविज्ञान कह चुका और रस-सिद्धांत ने उसे साहित्य पर लागू भी करके सिद्ध कर दिया कि व्यक्ति अपने अपने मूड के शेडस को ही बाहरी … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 17 टिप्पणियाँ

आप कौन हैं? इंडियन या भारतीय?

आप कौन हैं? इंडियन या भारतीय?धीरू सिंह जी ने अपनी पोस्ट में ये सवाल उठाया है. बता रहे थे कि हम पहले भारतीय थे लेकिन अंग्रेजों ने हमारी पहचान बदल दी. हमें भारतीय से इंडियन बना दिया. अंग्रेज़ बदलाव में … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 24 टिप्पणियाँ