केवल एक गंभीर बात

अभी कुछ ही मिनट पूर्व पान की दूकान ने इस करतूत को सार्वजनिक किया है, इसे हम तक पहुँचाने के लिए धन्यवाद।

बहुत गम्भीर मुद्दा है, कृपया सभी बन्धु यू ट्यूब पर जा कर इस सीरिज पर अपना विरोध दर्ज़ कराएँ व प्रतिबंधित करवाएँ। इस सीरीज के कुल ५ वीडियो हैं।

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यह प्रविष्टि INDIA, Kavita Vachaknavee, YOU TUBE में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

10 Responses to केवल एक गंभीर बात

  1. ताऊ रामपुरिया कहते हैं:

    कुछ प्लेयर की दिक्कत थी मुझे ऐसा लगा की ये हटा लिए गए हैं पर ऐसा नही है ! ये गंदे जबान में बोल रहे हैं ! चिट्ठाचर्चा की ये लिंक सभी दोस्तों और अपने संपर्को को मेल कर रहा हूँ और सभी लोगो से अनुरोध है की ये लिंक मेल करे और इसे प्रबंधित करने की ठोस कारवाई करे ! और ज्यादा से ज्यादा संख्या में विरोध दर्ज करवाए ! रामराम !

  2. avinash कहते हैं:

    इसमें गड़बड़ क्‍या है… जिस तरह हमारा मीडिया बहस करता है – वहां भी ऐसी बहस हो रही है। क्‍या आप सोचते हैं कि वो लोग कहेंगे – हां, हां हमारे मुल्‍क ने साजिशें रची हैं – हमारा मुल्‍क कितना अहमक। जनाब, ठहर कर उनकी बातों पर ग़ौर भी कीजिए कि वे जो कह रहे हैं – अगर उनमें रत्ती भर भी सच्‍चाई है, तो हमारे देश के पॉलिटिशियनों ने कितनी गिरी हुई हरकत की है!

  3. खरी-खरी कहते हैं:

    कविता जी विरोध दर्ज करवा कर आया हूँ पर इनको बोलने दीजिये। इन सब की हालत दयनीय है। जब भी चाहे अमेरिका पाकिस्तान मे घुसकर उनको पीट आता है। कर्ज मे डूबा देश है। वो कहा गया है न, माछी मारे हाथ बस्साये अर्थात मख्खी मारने से अपने ही हाथ से बास आती है। ये अपने आप मरने वाले है। हम काहे इनकी बातो मे उलझे।

  4. ab inconvenienti कहते हैं:

    इनकी शक्लें हिदुओं वाली हैं. इनके हाथों में सेफ़्रोन हिंदू ज़ीनोइस्ट बैंड है, यह यहूदी ईसाई और हिंदू का इस्लाम को बदनाम करने की साजिश है …….. ये है वो है अविनाश जी एनडीटीवी वाले ने इन अकाट्य तर्कों पर गंभीरता से विचार भी शुरू कर दिया. हमें भी अपने देश की नीचता पर विचार करने की नेक सलाह दे रहे हैं. इनको भी शकल से हिंदू या मुस्लिम का पता लग जाता है.

  5. कविता जी पाकिस्तान के चैनल तो अपना राष्ट्रीयधर्म निभा रहे हैं,हमारे चैनल्स तो ऎसी सेन्सटिव परस्थिति में भी मीड़िया ट्रायल कर रहे दिख रहे होते हुए भी अन्तर्राष्ट्रीय टी आर पी बढ़ानें और समबन्ध बनानें में लगे हुए हैं।

  6. सौरभ कुदेशिया कहते हैं:

    or hamare media wale bhi to inka sath de rahe hai, abhi do char din rukiye phir har shahid ki lash par chichaledar karenge..kuch ne to suru bhi kar di hai..kahe ka rastra dharam?TRP dharam sarvopari hai aajkal toविचार-मंथन—एक नये युग का शंखनाद: क्षमा करना मेरे पूर्वजों, मैं हिजड़ा बन गया हूँ!

  7. डा. अमर कुमार कहते हैं:

    कविता जी, पहले तो यह वीडियो हम तक पहुँचाने के लिये धन्यवाद, मैं कहता न था कि पान की दुकान जनता की नब्ज़ पकड़ने की माकूल जगह है.. लोग खैनी ठोंक कर चिल्ला उठे ,, खैर… आपसी बातें बाद में !मैं तो कहूँगा कि सनद रखने के लिहाज़ से, बेहतरीन विडीयो है, यह ! यह अपनी अपनी प्रोपेगैन्डा मशीन है, उनको इसी बात की तन्ख़्वाहें मिलती हैं, और वह इसे बख़ूबी निभा रहे हैं ! सरकारें, अपने को बनाये या बचाये रखने के लिये रियाया को गुमराह कर मुग़ालते में तो रखती ही हैं… यहाँ भी तो यही चल रहा है ! हर मुल्क की रियाया अमन चाहती है, पर सरकारें मुद्दों को जिलाये रखना चाहती है, यही उनका चारा पानी है !दूसरे नज़रिये से देखें, तो नाशुक्रग़ुज़ार बच्चे अपने बाप को गाली देते ही हैं, पावर के लिये दारा-शिकोह कत्ल किये गये.. शाहज़हाँ कैद किये गये.. यही उनकी तहज़ीब है, यही उनकी सोच है ! जो उर्दू वह बघार रहे हैं, वह मेरठ की पैदावार है… पर एक बात की तो वह तस्दीक कर रहे हैं, कि पूरी दुनिया उनकी दुश्मन बनी बैठी है ! पर, इससे आगे वह दिमाग नहीं लगाना चाहते, कि आख़िर क्यों ? गीदड़ जब चारों तरफ़ से घिर जाता है, तो दाँत तो दिखलायेगा ही !मेडिकल नज़रिये से, यह स्लो इम्प्लांन्टेसन रिज़ेक्शन है… आपने अपने ज़िस्म का एक हिस्सा कहीं और प्रत्यारोपित कर दिया, करोड़ो रूपयों की इमदाद दी.. फिर भी पनप न सका, उल्टे ऎसी सड़न पैदा हो गयी कि, पूरा उपमहाद्वीप बज़बज़ा रहा है ! केमोथेरैपी के सिवा कोई अन्य चारा नहीं दिखता !ज़ल्दबाज़ नतीज़े निकालने वाले इस विडीयो को सांप्रदायिक रंग देकर फिर अपना ऊल्लू सीधा करेंगे, इस लिहाज़ से यह वीडियो यहाँ बहुत माक़ूल भी नहीं लगता ! बमुश्किल जनता एकजुट हुई है, मुल्क के गुनहगार सहमें हुये हैं… ऎसा कोई सांप्रदायिक मोड़ आने पर यह ज़ज़्बा बिखर जायेगा !” अग़र यह शहीद ( उन्नीकृष्णन ) का घर न होता, तो वहाँ कुत्ता भी झाँकने न जाता ” ऎसा कहने वाला पाकिस्तान से तो आया नहीं है, न ही इस्लामी है, फिर ? इनको चुन कर बैठाया भी हमने ही है, फिर ? हम अपने सिविल रिस्पोन्सबिलिटी को कायम रख सकें, अपने घर के सूराख बंद करें,, फिर ज़लज़ले के घर में घुसने पर चिल्लायें.. यही वक़्त की ज़रूरत है ! फिलहाल गाँधी को ताख़े पर सज़ा दें, वह तो महात्मा थे … और सरदार पटेल पर से धूल झाड़ें.. शास्त्री और इन्दिरा के कलेज़ों से उठता क्रंदन सुन सकें, यही वक़्त का तक़ाज़ा है ।आपका प्रयास अपनी ज़गह पर सही है !

  8. रचना कहते हैं:

    “अखबारों में छपी ख़बर के अनुसार ,यह फ़ैसला है मुंबई की मुस्लिम संस्थाओं का, कि इन ९ हत्यारों की लाशों को, मैरिन लाइन बड़ा कब्रिस्तान में कोई जगह और इज्ज़त नहीं बख्शी जायेगी ! मुस्लिम काउन्सिल देश के बाकी संस्थाओं को भी यह मैसेज भेजने का प्रयत्न कर रही है! “agar aesi baato ko blog par daal kar ham glamarize kar saktey haen to phir upar diyae gayae video ka kyaa doshapney ander jo vidruptaa haen apne desh kae aur apne dharm aur kartavya kae parti pehlae usko saaf kare aur uskae prati vidroh dikhayae phir dusrey desh mae jo ho rahaa us kae prati kuch karae

  9. डॉ .अनुराग कहते हैं:

    लगता है लोग या तो पढ़ते नही है या देखते नही है …पकड़े गए आतंकवादी ने साफ़ सुथरे लहजे में कहा था की उन्होंने ये सब जान बूझ कर पहना था ताकि कोई उन पर शक न करे ओर उन्हें रोके नही …..ये भी उनके प्लान का एक हिस्सा था वो नाव जिस पर वे आये है उस पर मिले बैग ,साबुन की टिकिया ,शेविंग क्रीम ,डेंटल जेल सब पर पकिस्तान की मोहर है….सटेलाईट फोन से trace की गई कॉल कराची ओर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से है…..दो दिन पहले के टाईम्स ऑफ़ इंडिया में हमले में बचे गवाह का साफ़ साफ़ बयान की उन्होंने लाइन में खड़ा किया ओर फ़िर शूट करने लगे तो एक औरत ने पूछा की क्यों ?ऐसा कर रहे हो ?तो उन्होंने गोधरा ट्रेन का जिक्र किया .आज के एक अखबार में postmartam करने वाले डॉ का ब्यान है की यहूदियों को मारने से पहले उन पर काफ़ी अत्याचार किया गया था ,उस होटल के कुक ने कहा की वे पाकिस्तानी थे …..न्यूज़ चैनल times now पर मै ये देखकर हैरान था की वहां का पढ़ा लिखा पत्रकार हो या आर्मी का पूर्व जनरल सभी ऐसे हिन्दुस्तानी साजिश करार दे रहे है……हैरान हूँ उनकी सोच पर ….वैसे ओबामा ने साफ़ साफ़ कह दिया है की अगर इंडिया के पास पुख्ता सबूत है तो वो कोई भी कारवाही करने के लिए स्वतन्त्र है…….हैरान मै उर्दू अखबारों के नकरात्मक रविय्ये ओर एक गवर्नर साहब के ब्यान से हूँ जिन्होंने कहा है की इसमे पाकिस्तान का हाथ नही ?मुझे एक बात समझ नही आती की पाकिस्तानी हाथ होने से उन्हें क्या तकलीफ है ?एक ओर गुजारिश मै भारतीय मीडिया से करना चाहता हूँ की हमारा मुख्या मुद्दा इस वक़्त आतंकवाद ओर सरकार से जवाबदेह होना चाहिए ……

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