हमरी भैसिया को घंटी किसने मारा

दीदी, कंचन और सौम्या

इतवार छुट्टी का दिन होता है। कल चिट्ठे कम लिखे गये। ई-स्वामी ने कल हिंदिनी को हाईटेक बनाया। नये कलेवर से रामचन्द्र मिश्र इत्ता इम्प्रेस हो गये कि बोले :

पहले ये थीम टेस्ट कर लें अपनी साइट पर बाकी पढ़ना लिखना बाद में

इस थीमबाजी के चक्कर में हुआ यह कि फ़ुरसतिया की नई पोस्ट सारे संकलकों से गायब हो गयी। शायद फ़ीड का कुछ लफ़ड़ा है। यह पोस्ट कंचन के बारे में हैं। आप इसे पढिये :

अपने जीवन में जिन ‘लीजेंडरी’ लोगों से कंचन मिलना चाहती थीं उनमें से एक के.पी.सक्सेनाजी हैं। के.पी.सक्सेनाजी ने कंचन से मुलाकात बाद कहा- आज जब तुम मुझसे ‘लीजेंडरी’ मानते हुये मिल रही हो। फोटो खिचवा रही हो। मुझे इस बात का अफ़सोस रहेगा कि कल को जब तुम ‘लीजेंडरी’ बनोगी तब मैं तुम्हारे साथ फोटो खिंचवाने के न रहूं।”

रजनीश मंगला आजकल जर्मनी में हैं। सप्तांत में गायिकी का आनंद लिया। समूह गायिकी के बारे में बताते हुये वे लिखते हैं-

choir एक ऐसा समूह होता है जिसमें बहुत से लोग तीन या चार टुकड़ियां बनाकर लिखित संगीत को पढ़कर गाते हैं। अधिकतर ये संगीत खासकर choir के लिये लिखा जाता है जिसमें हर टुकड़ी एक ही ताल में अलग झलग स्वरों में गाती है जिससे गानों में अजीब सी कशिश पैदा होती है। इसकी एक और खास बात ये है कि इसमें कोई भी थोड़े अभ्यास के बाद गा सकता है, जबकि भारतीय संगीत में गुरू से सीखकर, बहुत रियाज़ करके अकेले गाने का रिवाज़ है। इससे एक दूसरे की आवाज़ सुनकर पहचानने, सीखने का मौका मिलता है, टीम की भावना उत्पन्न होती है।

रवीशकुमार गोवा गये तो वहां उनको परशुराम, डा.राममनोहर लोहिया और चार्ल्स शोभराज के बारे में लिखने का मौका मिला। डा. लोहिया भारत छोडो़ आंन्दोलन के दौरान गोवा गये थे। इसके बारे में लिखते हैं-

भारत छोड़ो आंदोलन में हुई गिरफ्तारी के बाद लोहिया गोवा आए थे। अपने मित्र के यहां आराम करने। इतिहासकारों ने आज़ादी की लड़ाई में शामिल नेताओं के जीवन के दूसरे पहलुओं का अध्ययन नहीं किया है। इतने सघन संघर्ष में भी लोहिया गोवा पहुंचे थे आराम करने। मैं कुछ देर तक विस्मय से सोचता रहा।

अजित वडनेरकर अपने शब्दों के सफ़र में आज हाथी के बारे में बताते हैं:

अगर कहा जाए कि हाथी के पास भी हाथ होता है तो शायद कोई यकीन नहीं करेगा मगर हाथी के नामकरण के पीछे उसकी सूंड का ही हाथ है। दरअसल हाथी की सूंड ही उसका हाथ होती है जितनी सफाई से इसके जरिये असंभव लगनेवाले काम करता है, इन्सान को उन्हें करने के लिए भारीभरकम मशीनों की ज़रूरत पड़ती है।

महावीर शर्माजी बिंदिया पर तीन क्षणिकायें पेश करते हैं। इनमें से एक है:

तबले पर ता थइ ता थैया, पांव में घुंघरू यौवन छलके
मुजरे में नोटों की वर्षा, बार बार ही आंचल ढलके
माथे से पांव पर गिर कर, उलझ गई घुंघरू में बिंदिया
सिसक उठी छोटी सी बिंदिया !

समीरलाल के लिये मेरी जान कहना भी बबालेजान है। वेलिखते हैं:

तुमको मैं अपनी जान कहूँ
या नील गगन का चाँद कहूँ

घनघोर उदासी छाती है
जब दूर जरा तुम होती हो
मदहोशी छाने लगती है
जब बाहों में तुम होती हो
ये कलम हो रही है डगमग
तब मधुशाला का जाम कहूँ

अब इसके बाद कुछ और बचता नहीं सिवाय चंद एकलाइना के:

1. मोहल्ले का कवि सम्मेलन भाग दो: सही शीर्षक- मोहल्ले का कवि सम्मेलन भाग लो।

2.जरा इन्हे पहचानिए और गीत सुनिए 🙂 : क्या इनका भी कोई ब्लाग है?

3. खामोशी का खामोशी से कत्ल.: बतर्ज लोहे को लोहा काटता है।

4. एक लड़की: ख्वाब में ही दिखेगी जी।

5.तुम कहाँ चले गये????????????? : इत्ते सवालिया निशान के बाद भी कोई जवाब नहीं।

6.दो व्यक्ति, एक दूसरे के जमानती हो सकते हैं? : हां, बशर्ते वे ब्लागर न हों।

7. हमरी भैसिया को घंटी किसने मारा: उसका तो बैलेन्सै गड़बड़ा गया है जी।

8.मेरी चाहत का जनाजा : निकाल दिया तुमने।

9.हर अधूरे प्रश्न का उत्तर : मिल जायेगा गीतकलश की कुंजी में।

10. देर से या लंबे फैसले सुनाने वाले जजों पर नज़र: कहीं जल्दी में न निपटा दिये जायें वे।

11. ब्लाग गिरा सकता है, भाषा की दीवारें मलबा कहां फ़ेका जायेगा?

12.दिखावे की संस्कृति-1 ….एक दुपहर शमशान में :दिखावे के लिये श्मशान जाना पड़ा!

13.तुमको मैं अपनी जान कहूँ : अरे बबाले जान को जान कैसे कह सकते हैं जी।

14.विफल लवर और सफल नागिस्ट :पद के लिये आवेदन करें। वेतन के बारे में कोई चर्चा नहीं।

15. माननीय एपीजे अब्दुल कलाम और गोपालकृष्ण विश्वनाथ:के बारे में माननीय ज्ञानदत्त जी की पोस्ट रिठेल।

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8 Responses to हमरी भैसिया को घंटी किसने मारा

  1. Tarun कहते हैं:

    नया कलेवर तो वाकई जानदार है हम इसे पढ़ने से पहले देख चुके लेकिन पता यहाँ से ही हुआ कि ये रंगापोती कल की गयी है।

  2. अरुण कहते हैं:

    ये क्या चक्कर है जी , आज कह रहे हो घंटी मारी ,कल कहने लगोगे की आंख मारॊ , भैसिया को कंट्रोल मे रखिये कल जीतू जी कह रहेथे कि जब आपसे मिलने गये तो भैसिया ने पूंछ मारी 🙂

  3. संजय बेंगाणी कहते हैं:

    एक लाइनर महारथी हो गये है आप तो 🙂

  4. Gyandutt Pandey कहते हैं:

    हम तो आपके ब्लॉग का पाउडर लिपिस्टिक देख कर ही कल से मगन हैं। और क्या टिपेरें! 🙂

  5. सही कहा। नमाज को गए थे, रोजे गले पड़े।

  6. Udan Tashtari कहते हैं:

    आपका ब्लॉग तो ब्यूटी पार्लर से हो आया दीखे है-यहाँ भी माहौल जमा है. जय हो, जय हो!! जारी रहें.

  7. डा० अमर कुमार कहते हैं:

    एगो घंटिया से भईंसिया को कित्ती सुरसुरी भई होगी ?

  8. PD कहते हैं:

    नहीं सर जी.. हम ख्वाबों में नहीं जी रहे हैं… वो लड़की ख्वाबों में जीने वाली है.. 🙂

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