बेनज़ीर की हत्या यानी पश्चिमी मीडिया के हैप्पी हॉलीडेज़!


कल पाकिस्तान में बेनजीर भुट्टो की हत्या कर दी गयी। ब्लागर साथियों ने इस घटना पर अपने विचार व्यक्त किये हैं।
मुखियाजी कहते हैं-

हमे आज भी याद है १९९० का दौर जब उनका दुपट्टा और मुस्कान भारत मे भी काफी मशहूर हुआ था ! हम सभी उनको एक खानदानी और सभ्य महिला के रुप मे जानते थे ! उनके पिता भी काफी कड़क मिजाज थे और पाकिस्तान की राजनीती के शिकार हुए !
किसी भी राष्ट्र की तरक्की वहाँ की राजनीती स्थिरता मे है – यह बात अब पाकिस्तानी राजनेताओं को समझ लेनी चाहिऐ वरना २१ वी सदी की चाल मे वह कहीं अफगानिस्तान न बन जाएँ !

इरफ़ान के लिये मोदी की जीत और बेनजीर भुट्टो की हत्या एक ही जैसा दुखद प्रसंग है। इस दुख की घड़ी में वे मशहूर पाकिस्तानी शायरा फ़हमीदा रेयाज़ की नज़्में सुन-सुना रहे हैं। रीतेश को तो इस खबर पर यकीं ही नहीं हो रहा है कि बेनजीर भुट्टो चली गयीं। इस मौके पर विजय शंकर का दिमाग फ़िदायीन हो गया। दीपक भारतीय ने बेनजीर को नजीर के रूप में पेश किया।


संजय का मानना है कि अमेरिका परस्ती बेनजीर की मौत का कारण बनी। वहीं अमेरिका से ई-स्वामी इस घटना को एकदम अलग अन्दाज में देखते हैं-

३० दिसम्बर २००६ को सद्दाम की हत्या की गई थी; २७ दिसम्बर २००७ को बेनज़ीर को निपटा दिया गया! इस क्रिसमस और नये साल की छुट्टियों के बीच तीन दिनों में किये जाने वाले सनसनीखेज़ कामों की टाईमिंग बडी जानदार है. ठीक पिछले साल जैसा माहौल बना दिया गया है. इस मौसम में कोई भी टीवी नही देखता, घूमना-फ़िरना, शॉप्पींग-वॉप्पींग सैंटा-फ़ैंटा यू नो! ऐसे में घर में कोई लफ़डेवाली खबर बना सकते नहीं तो बाहर ही सही! ये अपनी कांस्पीरेसी थ्योरी है!

अपने देश के हालात बदलने के लिये लालयित, जनता में लोकप्रिय पश्चिमी मानसिकता वाली स्त्री पात्र के आतंकवादियों द्वारा मार दिये जाने की खबर, फ़िर उसकी लगातार जुगाली – आपको साल के सबसे आनन्ददायक समय में ये याद दिलवाने के लिये, की आपके अमरीका के बाहर की दुनिया कितनी सडी जगह है, और आपको कितना भयभीत रहने की जरूरत है. ये याद दिलवाने के लिये की आपके धर्म के लोग कितने सहिष्णु हैं और बाहरी दुनिया कितनी हैवानियत से भरी पडी है. “थैंक गॉड फ़ार अमेरिका” जपो की आप का एक और साल सहीसलामत निपट गया और टीवी बांचो.

पाकिस्तान के ताजा घटनाक्रम को देखने के लिये पिटारा की शरण में जायें।

महाशक्ति पर मनुष्य को महान बताया गया-

धरती की शान तू भारत की सन्तान
तेरी मुठ्ठियों में बन्द तूफ़ान है रे
मनुष्य तू बडा महान है भूल मत
मनुष्य तू बडा महान् है ॥धृ॥

आप अक्सर अपने ब्लाग में बड़ी-बड़ी फ़ोटुयें लगाकर पाठकों को बिदकाते होंगे। इस बिदकन से निजात पाने रविरतलामी बता रहे है एक नहीं दो-दो जुगाड़। ज्ञानजी के भरतलाल के तमाम किस्से आपने पढ़े आजतक। अब आप एक और इलाहाबादी पन्नालाल के किस्से बांचिये अनीताजी के ब्लागपर। वे लिखती हैं-

पन्नालाल अपने हिसाब का बड़ा पक्का है, बिना पैसे लिए वो कोई काम नहीं करता, अगर उसकी लाई हुई बाई आपने रक्खी तो वो बाई से कमीशन लेता है काम दिलाने का, अगर आपने उसे नीचे से गुजरते ठेले वाले को रोकने को कहा तो जो कुछ भी खरीदो उसे नजराना देना पड़ेगा। है तो दसवीं फ़ैल पर अग्रेजी काफ़ी समझ लेता है। ऊपर लिखे सब काम वो पैसे ले कर ही करता है।

मेरे नव-वर्ष संकल्प ! : करके भूल जायें ताकि साल के अन्त में कह सकें बेकार गया।

जमीन, भैंसें और शिलिर-शिलिर परिवर्तन: से उकताकर ज्ञानजी दो दिन के लिये छुट्टी पर गये।

धमकी पुराण : का पहला अध्याय बांच रहे हैं पंडित शिवकुमार मिश्र कलकत्ता वाले।

तसलीमा : अतिथि देवो भव! : हम तुम्हें पूज सकते हैं लेकिन रहने के लिये कैसे कहें? हमें अपने कट्टरपंथियों का भी तो लिहाज करना है।

माया एकैदम ठोस:उनके आगे बाकी सबकी पालिटिक्स तरल हो गयी है।

चलिये अब मेथी उगाये डायबीटीज के लिये:डायबिटीज का जुगाड़ इसके बाद करेंगे, अवधियाजी?

मैं रोज़ अख़बार पढ़ता हूँ : उसमें सब तमाम लफ़ड़ा आता है। दुनिया भर का। आपौ बांचिये न!

भारत का इन्कलाब – चाय और पान के दुकान पर : दो रुपये में स्पेशल चाय साथ में इंकलाब मुफ़्त में। आइये मुट्ठी भींच के।

फ़ुग्गों की बिरादरी : में
शामिल होइये। मिर्च पानी में डालिये, तितलियों को तंग कीजिये।

आप किससे लेते हैं राय: लेते कहां है सब अपने आप देते हैं। दुनिया में तमाम रायचंद हैं।

मेरी पसंद


सपनो के खिचडी पका
भोर किरनों का दे छोंका
भरी दुपहरी का उबाला
साँझ हवा का मसाला
इंद्रधनुषी रंगो से सज़ा
निहार रही तुम्हारी राह!

कीर्ति वैद्य

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5 Responses to बेनज़ीर की हत्या यानी पश्चिमी मीडिया के हैप्पी हॉलीडेज़!

  1. ALOK PURANIK कहते हैं:

    बेनजीर जैसी भी सही, एक उम्मीद तो थीं पाकिस्तान में। उनके जाने के बाद तो वह उम्मीद भी नही रही।

  2. ” मेरे नव-वर्ष संकल्प ! : करके भूल जायें ताकि साल के अन्त में कह सकें बेकार गया।”अरे अरे !! सारा किया कराया बर्बाद करने पर तुले हैं आप!!”मेरी पसंद” एक अच्छा प्रयोग है. इससे बहुत से चिट्ठाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा, जो हिन्दी चिट्ठाकरिता के इस मोड पर बहुत जरूरी है. सिर्फ आने वाल कल बतायगा कि इस चिट्ठे पर आपकी सक्रियता ने हिन्दी चिट्ठाकरिता के प्रोत्साहन के लिये कितना कुछ किया. यह प्रोत्साहन/रचनात्मक अभियान जारी रखें.

  3. केवल सच कहते हैं:

    are you giving promotion to keerti vaidya ?? by pasting her photo on your blog . its weird because when we click on her photo it takes us to your own photo with you wife on flicker .its nice that you are trying to encourage young authors but what is the point because we are waiting our time by clicking on the link and not rreacjing there .or may be this your way of promoting your own self @shastri siri think you did not click the link we thought you had clicked the link so we also clicked on the same

  4. इम्प्रेसिव। यह शब्द शायद आपकी चिठ्ठाचर्चा के लिये परमानेण्ट हो जाये।

  5. बात कहने का अच्छा तरीका है चिट्ठा चर्चा।

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