आह, पुलाव….. वाह, पुलाव- आनंदम् आनंदम्


शुरआत एक सुन्दर से चित्र से। आप देखिये इसे। आलोक पुराणिक बताते हैं कि ये बगल वाला बन्दर बाद में बड़ा दंतिस्ट बनेगा। इसकी नोटबुक उन्होंने अभी से अपने पास रख ली हैं।

नया चिट्ठा देखिये प्रतिमा वत्सजी का। देखिये लोकरंग के लोग लिखना शुरू कर रहे हैं।

कुछ लोग खासकर ज्ञानजी और शास्त्रीजी चिट्ठाचर्चा से कुछ ज्यादा ही इम्प्रेस्ड हैं। एक घंटे में यह पोस्ट लिखी गयी। आप भी इम्प्रेस्ड होइये न!

हिन्दु आतंकवाद – नहीं आता मुझको : फिर कैसे चलेगा? सीखिये भाई! सबको आ जाता है।

क्रिसमस की छुट्टियाँ: शुरू हो गयीं।

बड़ा दिन न मनायें: सब दिनों को काट कर छोटा कर लें तब मनायें शान से।

मेरा घर का कम्प्यूटर और संचार नेटवर्क : हमको समझ में ही नहीं आता। पर वह काम कर रहा है! क्या मौज है। 🙂

प्लीज शट अप, मैं था डान :आप लोग न जाने कहां -कहां पुलिस दौड़ाते रहे जबकि हम नच बलिये में थे।

मौत का सौदागर:की नयी दुकान चालू जल्दी ही!

मोदी के तारे आसमान में : तारे आसमान में रहते हैं अगर आमिर खान के न हॊं।

व्यक्ति पूजा : करिये। बड़े काम की चीज है।


बन्दर : झांक रहा है मुंह के अन्दर। गोरी लगती बेसी सुन्दर।

पैसे वसूल : वेलकम, लेकिन पैसे थे किसके?

बचपन: देखने के लिये सुबह-सुबह अलसाई आंखों से ताजी ओस की बूंद देखें।

आह पुलाव, वाह पुलाव: मुंह में पानी आ गया आनंदम,आनंदम।

लोकदेव करमा : की जय हो।

किराये पर खुशी और गम : आसान किस्तों में। बुकिंग करायें। फ़ेस्टीवल आफर में विशेष छूट।

बधाई नरेन्द्र भाई:आदमियों से बने कितने गलीचे बनाये हैं इसने।

गुजरात में फिर खिला कमल : कीचड़ बहुत अच्छा फ़ैला था न इसीलिये।

अंधेरे का व्यापार : बहुत चमक रहा है उजाले में।

मसखरों को अन्तरिक्ष में मत ले जाओ : वर्ना वो चुटकुला सुनाने लगेगा। हंसी आयेगे, फ़ंस जाओगे।

दांये हाथ की नैतिकता : सफ़ाई के लिये जरूरी है। इसे सिर्फ़ बायां हाथ ही समझ सकता है।

मेरे शब्द : सीधे हैं, सपाट हैं आपकी टिप्पणी इनकी सच्चाई को सहलाती है। टिपियाइये न!

परिवार में कि‍चकिच से लगती है तंबाकू की लत : विक्स की गोली लें किचकिच दूर करें।

अगर इंग्लिश से परहेज है तो इन फॉर्मेलिटीज़ को क्यों गले लगाते है ??? हिन्दी ब्लोग्गेर्स !!!!!!!!!!!!!!!!! गला होता ही है लग जाने के लिये। आ तू गल्ले लग जा रे हमराही।

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9 Responses to आह, पुलाव….. वाह, पुलाव- आनंदम् आनंदम्

  1. केवल सच कहते हैं:

    आप गले लगा रहे हैं या गल्ले मे डाल रहें है ? स्पष्ट करे !!!!!!!!!!!!

  2. चिन्टू कहते हैं:

    भाई आप का तो अंदाज़ ही अलग है, वाह मज़ा आ गया|चिंटू

  3. mamta कहते हैं:

    जोरदार चिटठा चर्चा ।

  4. एक जोरदार फोटोयुग्म हमने भी लगाया था आज – इस चर्चा में छपनीय! आपने सेंसर कर दिया!

  5. “आपका क्या कहना है?”हमारा कहना यह है कि आप काफी मेहनत करते है एवं पाठगण आपके आभारी हैं. ईश्वर आपको शतायु करें !!

  6. अजित वडनेरकर कहते हैं:

    शुक्रिया हुजूर…फिर पुलाव का लुत्फ उठाया कि नहीं….लंच या डिनर पर…पुलाव से ज्यादा मशक्कत तो आपने चिट्ठा चर्चा को खिला खिला बनाने में लगा दी। पढ़ते हुए पुलकित हो रहा हूं।

  7. DEO PRAKASH CHOUDHARY कहते हैं:

    टिप्पणियां अच्छी हैं, लेकिन बिना पढ़े टिप्पणी करना रस्म अदायगी की करह लगता है। हर ब्लॉग पर टिप्पणी करने से पहले उसे पढ़ें भी। किस नाम का ब्लॉग है, लेखक कौन है,क्या लिखा है….ध्.वाद

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