द साईलेंस इज़ डेफनिंग

जी हाँ आपने “खामोशी की आवाज़” जैसे जुमले सुने होंगे पर उदाहरण ज्यादा न देखे होंगे। तो पढ़िये अशोक जी चक्रधर की नवीनतम पोस्ट जो उन्होंने न्यूयॉर्क में संपन्न विश्व हिन्दी सम्मेलन पर लिखा। और शायद ये हिन्दी ब्लॉगजगत की पहली ऐसी पोस्ट है जिसे बिना कुछ लिखे टिप्पणियाँ मिलीं। फुरसतिया ध्यान दें 😉

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यह प्रविष्टि debashish में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

6 Responses to द साईलेंस इज़ डेफनिंग

  1. अभय तिवारी कहते हैं:

    इस के पीछे क्या राज़ है, कौन जानता है? पर एक पोस्ट पहले भी आई थी ऐसी..http://tooteehueebikhreehuee.blogspot.com/2007/06/blog-post_12.html

  2. अभिनय कहते हैं:

    चक्रधर तो इस सम्मेलन की हस्ती रहे है। उनसे तो लगता है गलती से कुछ छूट गया और भाई लोग मेरे मजाक को ले उड़े। देबाशीष तो हर बात में पहला ढूंढने के चक्कर में रहते हैं अभय भाई। इससे पहले इरफान के अलावा और भी कई पोस्ट आचुकी हैं

  3. Debashish कहते हैं:

    अभिनयः अवव्ल तो हर चीज़ को इतनी गंभीरता से लेने की कोई तुक नहीं है। ये आप भी जानते हैं और मैं भी कि शायद प्रकाशन की किसी तकनीकी त्रुटि से ये काम हो गया। आपकी टिप्पणी से रिक्त पोस्ट के भी मायने निकल आये तो हमने उसकी मौज लेते हुये चर्चा कर दी जो इस जालस्थल का काम है। इस प्रसंग में इससे अधिक महत्व प्रविष्टि लेखक और टिप्पणीकार का नहीं है। चुटकी लेती पोस्ट में फिर भी मैंने “शायद” लफ़्ज़ का इस्तेमाल किया है। इस बहाने मुझ पर तंज कसने का भावार्थ में समझ नहीं पाया, विशेषतः तब जब आप मुझे जाल पर और व्यक्तिगत तौर जानते भी नहीं। मेरी “आदतों” से आप इतना वाकिफ़ कैसे हो गये अवश्य जानना चाहुंगा।कोई भी काम पहली बार करने वाला खुश होता ही है और बोलता भी है, ज़रा वर्ल्ड्स फर्स्ट गूगल करेंगे तो आप को पता चलेगा कि कितनी वेबसाईट्स पहली बार कोई काम करने का दावा करती रही हैं। निरंतर पर मैंने जो दावा किया वो सौ फीसद सही है और मैं उस पर अब भी कायम हूँ। बुरा लगे या भला, जो है सो है।

  4. Debashish कहते हैं:

    अभय: आप जिस पोस्ट का ज़िक्र कर रहे हैं वो कोई कोरी पोस्ट नहीं है। ब्लॉगर पर ये सुविधा है कि आप पोस्ट की टाईटल को एक कड़ी बना सकते हैं। तो जाने या अनजाने इरफ़ान नारद की एक पोस्ट को लिंक कर रहे थे।

  5. अनूप शुक्ला कहते हैं:

    ये तो मौज मजे की बात है। बस इससे ज्यादा कुछ नहीं। 🙂

  6. Nishikant Tiwari कहते हैं:

    लहर नई है अब सागर मेंरोमांच नया हर एक पहर मेंपहुँचाएंगे घर घर मेंदुनिया के हर गली शहर मेंदेना है हिन्दी को नई पहचानजो भी पढ़े यही कहेभारत देश महान भारत देश महान ।NishikantWorld

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